टुडे न्यूज़युवा प्रतिभा

तुम क्यों याद आते हो?

वक्त बेवक्त आज भी न जाने, तुम क्यों याद आते हो?

हिसार टुडे।राजीव डोगरा

वक्त बेवक्त आज भी न जाने, तुम क्यों याद आते हो?
झूठे ख्वाब की तरह हर रोज,न जाने ,तुम क्यों याद आते हो ?

हम जानते हैं,आप हमें कभी,याद नहीं करते फिर भी
दिल की हर धड़कन में,न जाने,तुम क्यों याद आते हो?

सोचता हूं, तुमको भूल जाऊंगा पर न जाने, फिर भी
बहती इन फिजाओं में,बहती इन हवाओं में तुम क्यों याद आते हो?

मैं आक्रोश करता हूं, इन बरस्ती बरसातों में,
इन खामोश रातों में न जाने फिर भी तुम क्यों याद आते हो?

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