टुडे न्यूज़युवा प्रतिभा

कौन कहता !!

शैलेश दायमा

हिसार टुडे।शैलेश दायमा

जो बुरे ना होते हम अगर, तो अच्छा तुम्हे कौन कहता…
खामोश ना होते लब हमारे, तो सच्चा तुम्हे कौन कहता…
जो बुरे ना होते हम अगर, तो अच्छा तुम्हे कौन कहता…
कौन कहता शान-ए-महफ़िल तुम्हे, जो मसखरे हम ना होते…
कौन कहता हाल-ए-दिल तुम्हे, जो दिलजले हम ना होते…
मगरूर ना होते हम अगर, मशहूर तुम्हे कौन कहता…
जो बुरे ना होते हम अगर, तो अच्छा तुम्हे कौन कहता…
कौन कहता गुणवान तुम्हे, जो अवगुन हमने छुपाये होते…
कौन कहता धनवान तुम्हे, जो सिक्के हमने दिखाए होते…
रावण ना होते हम अगर, तो राम तुम्हे कौन कहता…
जो बुरे ना होते हम अगर, तो अच्छा तुम्हे कौन कहता…
जो बुरे ना होते हम अगर, तो अच्छा तुम्हे कौन कहता…

। कभीरा।

सुख-दुख,
सही गलत से परे…
नैन मेरे खुशियो से भरे…
मुस्काए मोहन अपने वृंदावन,
दुआ कभीरा खूब करे।।
सुख-दुख,
सही गलत से परे..
अपना-पराया,
मान-अपमान…
ये तो हैं शन भर मेहमान…
हर कण हर क्षण
दिखे है मोहन,
झूम कभीरा नीर तरे…।।
सुख-दुख , सही गलत
से परे…
दूर-पास, जीत-हार से परे…
मन मेरा एक भाव भरे…
प्रीत मोहन मनमीत भी मोहन,
चाहे कभीरा देहलीज मरे…।।
सुख-दुख, सही गलत से परे…

अलबेला….

ज्योत जले ना उस दीपक मे, जिस दीपक मे बात नही…
प्रेम मिले ना उस मन से, जिस मन मे भाव का साथ नही…
ज्योत जले ना उस दीपक मे…
लाख जतन किया रे ऊधो, लाख मनाया कान्हा को…
हर भाव अपने इसे मन का, लाख समझाया कान्हा को…

मगर…।।

ऐतबार की बूंदे ना हो
जिस गागर, उसमे साच
की बरसात नही…
ज्योत जले ना उस दीपक मे, जिस दीपक मे बात नही…
ना मीरा ना राधा मैं तो, ना सखा ना संत कबीर…
मैं कहलाऊँ जग का स्वामी, लेकिन साल सब से गरीब…

क्यू…।।

पत्थर जान ठुकराया मोहन, बिन पत्थर भगवान नही…
ज्योत जले ना उस दीपक मे, जिस दीपक मे बात नही…
आधी उम्र कटी ख्वाहिश मे,
आधी कटेगी दुवाओ मे…
एहसास मेरे होने का कभी,
तुझे भी होगा हवाओ मे…

लेकिन…।।

मिलेंगे हम तारो की
गर्दिश मे, जो इस जीवन मुलाकात नही…
ज्योत जले ना
उस दीपक मे,
जिस दीपक मे बात नही…

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