युवा प्रतिभा

“ये तुच्छ प्राणी खुद को इंसान बताता है”

हिसार टुडे 

कल्पना ‘खूबसूरत ख़याल’
पुरवा, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

ये कलयुग है,
हर युग से बेहतर
हर युग से बद्दतर।
समझ नही पाते
समझा नही पाते,
ये परम्पराओं में छिपी कुरीतियों की बातें।
यहाँ सब अपनी
अपनी चलाते,
एक तरफ
पूजते है मूरत,
दूसरी तरफ बेटी
को बोझ बताते हैं।
बड़ी ग़ज़ब है
ऊपरवाले माया तेरी,
शैतान को दे दी
इंसानी काया।
बड़ी बड़ी बातें
करता है,
सच सुनने से
डरता है।
झूठी तारीफ पर
खुश हो जाता है,
गलत कह दो
तो लड़ जाता है।
बुराई देख कर
रोकता नही,
अंधो की तरह
आगे बढ़ जाता है।
समाज क्या
कहेगा ये बताता है,
कभी कुछ तो
लोग कहेंगे ये
जुमला सुनाता है।
गिरगिट के भी
रंग फीके पड़ जाएंगे,
इतने रंग ये इंसान
दिखाता है।
जाति धर्म मे अटका रहता है,
अल्लाह भगवान
में लड़ता
रहता है।
ऐसे ढकोसलों
को मनवाता है,
ये तुच्छ
प्राणी खुद को
इंसान बताता है।

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