युवा प्रतिभा

शहरों की भीड़

सरस, सरल हो जाये जीवन, ऐसी मन से आस करें।

हिसार टुडे।

रीना गोयल हरियाणा – महानगर की सड़कों पर है, निज वाहन का मेला।  कहने को ज़लज़ला भीड़ का, पर इंसान अकेला। काट काट करज़ जंगल सारे, नगर नवीन बसाए।

बिखर धरोहर गयी गाँव की, लोग शहर जब आये।  चहुँ दिश में भी नज़र घुमाओ, धुँध धूएँ का खेला। कहने को ज़लज़ला भीड़ का, पर इंसान अकेला।

ऊँची हुई इमारत जितनी, उतने छोटे दिल हैं। राह पाती बस  एक फैमिली, ज्यूँ चूहें के बिल हैं फँसी व्यस्तता में सबकी जाँ, बनकर बड़ा झमेला।  कहने को ज़लज़ला भीड़ का, पर इंसान अकेला।

नफरत

चलो मिटायें नफरत दिल से, यही सच्चा प्रयास करें।

सरस, सरल हो जाये जीवन, ऐसी मन से आस करें।

व्यर्थ दलित को निम्न जानकर, अहम हृदय पर क्यों थोपें जाति-पाति के भेद में पड़कर, पीठ छुरा भी मत घोपें।

दीवारें मजहब की तोड़ें, इंसा पर विश्वास करें। सरस, सरल हो जाये जीवन, ऐसी मन से आस करें।

प्रेम लुटाओ भरे हाथ से, टीस न दो मन भावों को। मन सबके सौहार्द रोप दो, नहीं कुरेदो घावों को।

दुख समेट मुस्कान बिखेरो, प्रति पल यह अभ्यास करें।
सरस, सरल हो जाये जीवन, ऐसी मन से आस करें।

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