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जहानों में तुम उभरते चलो

जहानों में तुम उभरते चलो जो करना है, वो ही करते चलो

हिसार टुडे । मंदार राजे

जहानों में तुम उभरते चलो जो करना है, वो ही करते चलो
सितारों में दुनिया खोजना है, इस धरती को छोड़ते चलो. और ऊँचा चढ़ते चलो

बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो मुश्किल कहां कुछ होता है,
बेकार में तू ऐसे रोता है,चल पगले हंस लें

खिलखिला के काहे को दुखों को संजोता है.
अपना नसीब खुद गढ़ते चलोबढ़ते चलो तुम ,बढ़ते चलो

सीख तो हर चीज  तुझे सीखाती है,
छत ऊँचा उठाता है,घड़ी पाबंद बनाती है.

पर्वत मुसीबतों में अड़ना बताता है,
समुन्दर सहनशीलता का गुण गाता है

अंधेरों को चीरते चलोभीड़ को पीछे छोड़
के आगे निकलो सितारों में दुनिया खोजना है,

इस धरती को छोड़ते चलो।और ऊँचा चढ़ते चलो
बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो

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