टुडे न्यूज़युवा प्रतिभा

उड़ने को अम्बर भी दे

लेकिन पहले घर भी दे

हिसार टुडे।सुरेन्द्र चतुर्वेदी

उड़ने को अम्बर भी दे,
लेकिन पहले घर भी दे।

सच्चाई गर दे दी है,
कटने वाला सर भी दे।

ख़ौफ़ज़दा मत कर लेकिन,
ख़ुद को ख़ुद का डर भी दे।

बीनाई से होगा क्या,
रूहानी मंज़र भी दे।

जो सवाल पूछे तूने,
अब उनका उत्तर भी दे।

मन्नत मांग रहा कबसे,
अब ये झोली भर भी दे।

या इस पार के या उस पार,
जो करना है कर भी दे।

मौत जो मिलने आए तो,
फिर मुझसे शरमाए तो।

मैं शीशा हूँ वो पत्थर,
माना अब टकराए तो।

बरसों पुराना ख़्वाब कोई,
रस्ते में मिल जाए तो।

ज़िन्दा हैं मुर्दे मुझमें,
आके कोई दफ़नाए तो।

दर्द का बच्चा ग़लती से,
रात गए जग जाए तो।

प्यासा साहिल पर आकर,
सागर को ठुकराए तो।

बदन पहन ले अब वापस,
लौट गए हैं साए तो।

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