युवा प्रतिभाराजनीति

वोट की चोट से वंशवाद को भगाये

सोहन लाल गौड़
बाहमनीवाला, कलायत
राजनीतिक विरासत संभालने के लिए युवा पीढ़ी राजनीति में बढ़-चढ़ कर भाग ले रही है। वयोवृद्ध नेता भी खुद की बजाय अपनी संतान को आगे ला रहे हैं। वंशवाद की निंदा करने वाली भाजपा भी इससे अछूती नहीं है।
मतदाता पीढ़ी-दर-पीढ़ी वाले प्रत्याशी को वोट की चोट देकर राजनीति को वंशवाद मुक्त कर सकता है। प्रत्येक राजनीतिक दल के नियम होने चाहिए कि योग्य उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए। चुनाव आयोग व सुप्रीमकोर्ट को भी वंशवाद मुक्ति संबंधी दिशा निर्देश जारी करने चाहिए तभी हमारा लोकतंत्र वंशवाद से मुक्त हो सकेगा। वैसे लोकतन्त्र में भी वंशवाद का aबोलबाला रहा है। कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार की अगली पीढ़ी बागडोर संभाल रही है तो भाजपा बाप-बेटे, भाई-बहन कलचर को बढ़ावा दे रही है। अन्य राजनीतिक दलों में भी वंशवाद को ही आगे बढ़ाया जा रहा है। योग्यता व प्रतिभा को दरकिनार करके केवल परिवार के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जा रहा है जो कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
लोकतंत्र को वंशवाद से मुक्त करने के लिए जरूरी है कि कुछ नियम बनाये जायें तथा इनका सभी दल पालन करें।

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