युवा प्रतिभा

मीत जलना लौ में तेरी

रीना गोयल
हरियाणा

मीत जलना लौ में तेरी

मीत जलना लौ
में तेरी,मन समर्पण
भाव का हो।
ज्यूँ समाए बूँद सागर,
भेद ना गहराव का हो।
आह! हुआ व्याकुल
हृदय, जब घाव
अपनों से मिले हों।
टीस बढ़ती है
अति जब मन
सुमन ही ना खिले हों ।
तिलमिलाता
सकल तन, जब दर्द
गहरा घाव का हो।
ज्यूँ समाए बूँद सागर,
भेद ना गहराव का हो।
एकाकार तुझमें रहुँ अब,
क्या अलग
अस्तित्व मेरा।
सौंप मन की डोर
तुझको, छोड़कर
सब तेरा मेरा।
शेष कुछ न चाहिए अब
अंत ही अपनाव का हो।
ज्यूँ समाए बूँद सागर,
भेद ना गहराव का हो।

खुश रहना जैविक आवश्यकता

खुश रहना जैविक आवश्यकता,
सबके लिए जरूरी।
अगर न रोगी
बनना चाहो,
डोज़ रोज़ लो पूरी।
पैसा होगा तब
खुश होंगे,
ऐसा कहां लिखा है।
मन से शान्त
व्यक्ति को खोजो ,ईश्वर वहीं दिखा है ।
आनँद धन को
संचित करलो,
आस न रहे अधूरी।
अगर न रोगी
बनना चाहो,
डोज़ रोज़ लो पूरी।
महँगी महँगी
सुख-सुविधाएं,
सब साधन खर्चीले।
पराकाष्ठा नहीं
खुशी की,
मत बनना रंगीले।
कह साईं चिंतन में लेलो,
श्रद्धा और सबुरी ।
अगर न रोगी
बनना चाहो,
डोज रोज
लो पूरी।

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