युवा प्रतिभा

आँसू

Hisar Today

रीना गोयल
हरियाणा

करें व्यथित मन के
भावों को, पीर हृदय
की जब पढ़ते हैं।
बह जाते है अनायास ही,
आँसू जब मुझसे लड़ते हैं।
हाँ खुद ही आमंत्रण देकर,
असमय उन्हें बुला लेती हूं।
और नयन का द्वार
खोल कर, गालों
पर सहला लेती हूं।
आँसू भी उद्वेलित होकर,
बनते लहर उछल पड़ते हैं।
बह जाते है अनायास ही,
आँसू जब मुझसे लड़ते हैं।
कह दूँ किससे
हृदय वेदना, अकसर
आँसू पी जाती हूँ।
मटमैला सा
स्वाद कसैला,
पीकर भी मैं जी जाती हूँ।
करूँ मोल क्या
इन आँसू का, हैं अनमोल
निकल पड़ते हैं।
बह जाते है अनायास ही,
आँसू जब मुझसे लड़ते हैं।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

Close
Close