टुडे न्यूज़युवा प्रतिभा

बड़े वेग से झरना उतरा पर्वत पर से

हिसार टुडे

मंधार राजे
कवि

बड़े वेग से झरना उतरा पर्वत पर से
बड़े वेग से झरना उतरा पर्वत पर से

बड़े वेग से झरना उतरा
पर्वत पर से
दुनिया में कुछ करने को
निकला है घर से
दृढ़ संकल्प, कठोर लक्ष्य
बस एक बनाए
चाहे कुछ भी करे
काम औरों के आए
कितना बल है,
कहीं ठहरना नहीं जानता
आगे बढ़ना, एक ध्येय
बस यही मानता
प्यास बुझाता पेड़ों की
चिड़ियों की, सबकी
हर मनुष्य की, हर पशु की
हर नन्हे कण की
निर्मल, उज्ज्वल, वेगभरा
बस बढ़ता जाता
लहर उठाता, चंचल,
कलकल छलछल गाता
पुराने दाेस्त
चार दोस्त,दो साइकिलें
खाली जेब और पूरा शहर,
एक खूबसूरत दौर ये भी था
जिंदगी का ….
मैं यादों की किताब खोलू तो
कुछ हंसते गाते चेहरे
नजर आते है,
गौर से देखा तो कुछ
दोस्त पुराने याद आते है।
यादें और गहरी हुई तो
गुलाल में रंगे कुछ चेहरे
याद आते है,
गौर से देखा तो कुछ दोस्त
पुराने याद आते है।
धूल को उड़ते और
बारिश की बूंदों को
टपकते देखा तो,
कुछ दोस्त पुराने याद आते है।
यादों की किताब के
कुछ पन्ने पलटे तो
खट्टे-मीठे बेर और स्कूल
के दिन याद आ गए ,
कुछ दोस्त पुराने याद आते है

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