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भूपेन्द्र हुड्‌डा व दीपेन्द्र हुड्‌डा के दबाव में हाईकमान “खुद के पांव पर मारी कुल्हाड़ी”

सोनिया गाँधी का फैसला दे रहा है संकेत कि हुड्डा के सामने नतमस्तक हो चूका है हाई कमान

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

प्रदीप कासनी ने की हाई कमान के फैसले की आलोचना

आखिर लोकसभा में करारी हार के बाद भी लगता है कांग्रेस पार्टी सुधरी नहीं है। हाल में भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई के जांच घेरे में आने के बाद से कोर्ट के लगातार चक्कर लगाने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को न केवल कांग्रेस पार्टी हाई कमान ने मजबूरी में कहे या दबाव में कमान सौपी और तो और परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए पिता-पुत्र हुड्डा को अब चुनाव कमेटी में एक साथ शामिल कर दिखा दिया कि कुछ भी हो जाए कांग्रेस परिवारवाद के गिरफ्त से न ही आजाद हुआ है और न ही कभी होगा।

पिता पुत्र को इतनी वैटेज देने को लेकर आज हरियाणा कांग्रेस का एक गुट इस फैसले के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद कर बैठा है। हर जगह पिता-पुत्र हुड्डा को घुसना कहां तक शोभनीय है। हाल में इस फैसले को लेकर खुद प्रदीप कासनी ने भी हाई कमान को घेरने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि “कांग्रेस को अंत में आकर हरियाणा में उन बाप-बेटे के अलावा कुछ दिखा ही नहीं, जो अन्दरूनी तौर पर भाजपाई बल्कि तड़ीपार की बिसात पर नाचने को अमादा हुए पड़े हों, यह भी संकेत कतई शुभ नहीं है। हरियाणा में कुछ सालों पहले कहीं न दिखने वाले भगवां के सर्वत्रगामी होने की गुंजाइश मुख्यतया इनकी काली करतूतों की वजह से ही हुई है।” कासनी का यह वक्तव इस बात की तरफ इशारा करता है कि कांग्रेस के इन्ही गलत निर्णयों के कारण कांग्रेस की आज यह दशा है। लोकसभा में करारी और शर्मानक हार के बाद लोगों ने सोचा की चलो नया प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद कुछ बदलाव होगा। बदलाव तो दूर हुआ तो परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप में ग्रसित नेता को कुर्सी।

क्यों आईएएस अफसर रहे प्रदीप कासनी ने किया फैसले का विरोध

हरियाणा कांग्रेस में बड़े बदलाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा में चुनाव कमेटी और चुनाव प्रचार अभियान कमेटी का गठन किया। अपनी भरोसेमंद कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते चुनाव कमेटी का चेयरपर्सन बनाया और उनके साथ 20 वरिष्ठ नेताओं को जोड़ दिया गया। कुमारी शैलजा के साथ चुनाव कमेटी में जहा भ्रष्टाचार के आरोप से ग्रसित विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर, विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, पूर्व मंत्री एचएस चड्ढा, कैप्टन अजय यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद मुलाना, विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादयान, पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह, कुलदीप शर्मा, पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा, विधायक आनंद सिंह डांगी, करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल, आफताब अहमद, शादी लाल बतरा, बजरंग दास गर्ग, विधायक जयबीर बाल्मीकि और जयपाल सिंह लाली को सदस्य बनाया गया। एक बार फिर सोनिया गाँधी द्वारा बनायी गयी कमेटी में हुड्डा समर्थकों का ही दबदबा दिखाई दिया। साथ ही अन्य प्रबल नेताओं को शामिल कर उनको यह दिखाने की कोशिश की गयी कि पार्टी के लिए उनका भी विशेष स्थान है। मगर इस कमेटी में हुड्डा समर्थकों का हावी होना और खासतौर पर उनके बेटे दीपेंद्र हूडा को भी शामिल करने से कांग्रेस के अंदर ही विरोध की आवाज सुनाई देने लगी है। पिता-पुत्र को इतना विशेष स्थान देने से पार्टी के निष्ठावाद कार्यकर्ता नाराज है जो न केवल उनसे कई गुना ज्यादा शिक्षित बल्कि उनसे ज्यादा कुशाग्र बुद्धि के हैं। इसलिए अब हुड्डा पिता-पुत्र के सामने नतमस्तक हाई कमान के फैसले की निंदा की जा रही है।

सोनिया का फैसला दिखाता है कि हुड्डा के सामने कितना लाचार हाई कमान!

यह बात नहीं भुलाई जा सकती कि हुड्डा के पास वो काबलियत है कि वह न केवल सारे विधायकों का आजतक भरोसा कायम कर अपने साथ उन्हें जोड़े हुए है, मगर जब विधानसभा की बात करें पार्टी के सामने अपनी पुरानी छवि से हटकर फैंसले लेना अनिवार्य है, मगर सभी बातों को अनदेखी कर चुनाव कमेटी में हुड्डा पिता-पुत्र का एक साथ होना इस बात का संकेत है कि हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा का दबाव इतना अधिक है की हाई कमान भी उनके सामने नतमस्तक हो चुका है, क्योंकि सोनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि हुड्डा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा हुआ है और यह जरुरी था कि वह किसी ऐसे नेता को कमान सौंपती जिनके ऊपर अब तक कोई दाग नहीं लगा। मगर ऐसा न कर उन्होंने हुड्डा को कमान सौंपी और उनके बेटे को चुनाव कमेटी में शामिल किया। उसने इस बात के संकेत दिए है कि कांग्रेस का भविष्य ठीक नहीं, शायद शिक्षित जनता इस बात को स्वीकार न करे।

पूर्व सीएम और उनके पुत्र का चुनाव कमेटी में होना सोनिया गाँधी का “गैर भ्रष्टाचार से ग्रसित आज जिस प्रकार से सोनिया गाँधी ने चुनाव कमेटी में हुड्डा पिता-पुत्र को शामिल किया उसे लेकर प्रदीप कासनी ने हाई कमान की गहरी निंदा की है।

भ्रष्टाचार से ग्रसित आज जिस प्रकार से सोनिया गाँधी ने चुनाव कमेटी में हुड्डा पिता-पुत्र को शामिल किया उसे लेकर प्रदीप कासनी ने हाई कमान की गहरी निंदा की है। उन्होंने हुड्डा का नाम लिए बैगर कहा “हरियाणा के लिए कांग्रेस की चुनाव कमेटियों में भ्रष्ट पूर्व सीएम और उनके लड़के का प्रमुखता से होना किसी भी एंगल से अच्छी बात नहीं है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया जी का यह फैसला गैर-राजनीतिक एवं गलत है। इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा, जजपा, इनेलो और बसपा की हालत का जिक्र करने के बाद कहा कि “कांग्रेस को अंत में आकर हरियाणा में उन बाप-बेटे के अलावा कुछ दिखा ही नहीं जो अन्दरूनी तौर पर भाजपाई बल्कि तड़ीपार की बिसात पर नाचने को आमादा हुए पड़े हों, यह भी संकेत कतई शुभ नहीं है। हरियाणा में कुछ सालों पहले कहीं न दिखने वाले भगवां के सर्वत्रगामी होने की गुंजाइश मुख्यतया इनकी काली करतूतों की वजह से ही हुई है।

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