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चमकी बुखार कोई वायरल बुखार नहीं

‘कुपोषित’ बच्चों द्वारा लीची का सेवन है बच्चों की मौत का कारण

 हिसार टुडे। आशीष लावट

चमकी बुखार है क्या?

बाल रोग एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ अजीत टेलटिया से विशेष बातचीत मे उन्होंने बताया कि चमकी बुखार कोई वायरल बुखार नहीं है अभी तक के शोध से यह पता चलता है कि यह कोई वायरस भी नहीं है इसका मुख्य कारण कुपोषित बच्चों द्वारा लीची का सेवन करना है। क्योंकि कुपोषित बच्चों में शुगर का लेवल बहुत कम होता है और जो बच्चे रात को भूखे पेट सो जाते हैं और सुबह जल्दी उठकर लीची का सेवन कर लेते हैं तो यह चमकी बुखार हो जाता है।

क्योंकि बिहार में इस समय लीची फसल का बिल्कुल पिक टाइम है यह बच्चे अपने माता-पिता के साथ लीची हार्वेस्ट के लिए चले जाते हैं और जो लीची जमीन में पड़ी हुई होती है। उसका सेवन कर लेते हैं अभी तक जिन-जिन भी बच्चों की मौत हुई है वह कुपोषित के शिकार बच्चे थे। दरअसल लीची में प्राकृतिक रूप से हाइपोग्लाइसिन ए एवं मिथाइल साइक्लोप्रोपाइल टॉक्सिन पाया जाता है।

यह टॉक्सिन शरीर में बीटा ऑक्सीडेशन को रोक देते हैं। इससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है और रक्त में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। क्योंकि बच्चों के लिवर में ग्लूकोस स्टोरेज कम होता है। ग्लूकोस रक्त के द्वारा मस्तिष्क में नहीं पहुंच पाता है और मस्तिष्क गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है और बच्चे पूर्णता बेहोश हो जाते हैं

बचाव के उपाय:

बच्चों को रात में अच्छी खाना खिलाएं खाना पौष्टिक और संतुलित होना चाहिए। बच्चे को खाली पेट लीची ना दें। (इलाज) चमकी बुखार का इलाज संभव है जैसे ही चमकी बुखार के लक्षण दिखाई दें वैसे ही बच्चे को मीठी चीज खाने को दें।

अगर संभव हो तो ग्लूकोस पाउडर या चीनी को पानी में घोलकर दें जिससे कि रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाएगा और मस्तिष्क को प्रभावित होने से रोकेगा इसके बाद तुरंत बच्चे को अस्पताल ले जाएं। मेरी पर्सनल तौर पर भी सभी सरकारों से निवेदन है की आज के इस युग में कोई भी बच्चा कुपोषित ना रहे सरकार की इतनी योजनाएं हैं जैसे कि मिड डे मील योजना है उसमें सरकार को संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए जिससे कि कोई भी बच्चा कुपोषित ना हो।

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