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योग व अध्यात्म से ही विश्व का कल्याण होगा- स्वामी मित्र देव

याेग व अध्यात्म मनुष्य जीवन के मूल में है, इसी से विश्व का कल्याण होगा।

हिसार टुडे

याेग व अध्यात्म मनुष्य जीवन के मूल में है, इसी से विश्व का कल्याण होगा। यह बात आज प्रातः टाऊन पार्क में चल रही योग कक्षा में  योगाभ्यास के दाैरान पतंजलि याेगपीठ हरिद्वार से पधारे स्वामी मित्रदेव जी ने कही। गौरतलब है कि स्वामी मित्रदेव स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन में पिछली रामनवमी काे सन्यास धारण करने वाले 92 संन्यासियों में से एक है। वे मूलतः ओडिशा से संबंध रखते हैं तथा इस समय योग व अध्यात्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्वामी रामदेव जी की प्रतिमूर्ति बनकर हरियाणा प्रवास पर हैं।

उन्होंने महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग याेग की व्याख्या करते हुए कहा कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि के मार्ग पर चलकर व्यक्ति परमात्मा के साक्षात् दर्शन करता है तथा मोक्ष काे भी प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योग दर्शन असल में पूर्ण रूप से जीवन दर्शन है। याेगदर्शन के चारो के पाद- समाधिपाद, साधनपाद, विभूति पादव कैवल्यपाद का एक-एक सूत्र जीवन जीन की कला सिखाता है। महर्षि पतंजलि का अनुसरण करने वाला व्यक्ति व्यवस्थित व समृद्ध जीवन जीता है।

उन्होंने आजकल की तनाव भारी जीवन शैली काे छोड़कर प्राकृतिक रूप से सहज जीवन जीनें का आह्वान किया। उनके साथ आए आजीवन सेवाव्रती आचार्य सुमीत जी ने भी याेगाभ्यास करवाते हुए आसनों व प्राणायामों का अभ्यास करवाया व उनकी विधियों, सावधानियाे एवं लाभो  के बारे में बताया। उन्होने बताया कि कुछ वर्षों पूर्व याेग करना बड़ा जटिल समझा जाता था। परंतु योग ऋषि स्वामी रामदेव जी ने इसे सरल बनाकर जन-जन तक पहुंचाया जिसके परिणाम स्वरूप पूरे भारत वर्ष में पतंजलि याेग समिति की लगभग एक लाख निःशुल्क कक्षाएँ चली रही है। जिनके माध्यम से लाखों लोग प्रतिदिन याेग एवं अध्यात्म का लाभ उठाते हैं।

राज्य प्रभारी श्री ईश कुमार आर्य ने भी योग साधकों काे संबोधित करते हुए कहा कि आज के युग में याेग से ज्यादा काेई घनिष्ठ मित्र नही  है। अतः हमे  याेग से दूर नहीं भागना चाहिए। उन्होने पतंजलि याेग पीठ द्वारा संचालित विभिन्न प्रकल्पों के बारे में भी बताया।
उन्होंने बताया कि पतंजलि योग पीठ में योग के साथ-साथ आयुर्वेद में भी रिसर्च चल रही है। सैंकडो विश्व स्तरीय वैज्ञानिक इसमें कार्य कर रहे है। गाय की नस्ल सुधार व शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति होने वाली है।

जिला प्रभारी श्री मुकेश कुमार व वीरेन्द्र बडाला ने स्वामी जी व आचार्य जी का अभिन्दन करते हुए कहा कि इनके आगमन से याेग कक्षाओ के संचालको  का मनाेबल बढ़ेगा तथा और अधिक ऊर्जा से कार्य करेंगें। उन्होंने याेग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग मनुष्य के लिए भोजन से भी अधिक आवश्यक है। अतः हमें प्रतिदिन याेगाभ्यास अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर याेग कक्षा संचालक रवि कुमार, डाॅ0 माया मिश्रा, मीना सरोइया, के.सी. खुराना, रामप्रसाद सैनी, रैना, दिनेश सेठी, इंद्र मनाेचा के अलावा,  भीमसिंह, सुरक्षा आर्या, महिला पतंजलि याेग समिति की जिला प्रभारी कविता शर्मा , शारदा, वीना गिनोत्रा, संतोष अत्री, अशाेक मेहता, जी.सी. नारंग, संजीव शर्मा , बलराज मलिक, मांगेराम कारेल, सतबीर, डाॅ0 त्रिभुवन भारद्वाज, मुनीराम आर्य, विनय मल्होत्रा, सीमा मल्होत्रा, टीनू, साहिल, भूपेन्द्र सिंह सरोहा व टाऊन पार्क की पांचों कक्षाओं के सैंकडो योग साधक व साधिकाएँ शामिल थे।

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