टुडे न्यूज़संपादकीय

अब भाजपा की निगाह दलित और पिछड़ों पर

हिसार टुडे

शायद ही कोई बेवकूफ है जो यह नहीं समझता कि क्या खिचड़ी पक रही है। किसे खुश करने के पीछे भाजपा लगी है। नॉन जाट और जाट मतदाताओं पर सेंध लगाने के साथ अब भाजपा की नजर पिछड़े और दलित वर्गों के वोटबैंक पर लगी है। मुख्यमंत्री खुद तो कहते हैं कि सबसे पहले कहो कि हम हरियाणवी हैंं मगर उनके सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसले किसी और तरफ इशारा कर रहे हैं और विपक्ष को बोलने का मौका दे रहे हैं। यह सभी जानते हैंं कि चुनाव में अक्सर ऐसा होता है कि सभी राजनीतिक दल महत्वपूर्ण घोषणा और फैसले के लिए चुनाव के नजदीक आने का इंतजार कर घोषणा करती है।

अमूमन यह काम सभी सत्ताधारी पार्टिया करती है मगर इस बार यह काम भाजपा ने कर दिखाया है और विपक्ष पर नहले पर दहला देने की कोशिश की है। हाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ऐसी कई घोषणा की जो कई सवालों के खुद ब खुद जवाब दे गए। पता है वो फैसले यह घोषणायें क्या हैं? मनोहर लाल ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में सवा लाख बीपीएल कार्ड धारकों के कार्ड उनके घर पंहुचा दिए जाएंगे, यानि कि गरीब मतदाताओं को मदद कर सर्वांगीण विकास दिखाने की छवि पेश करने की भाजपा ने कोशिश की।

साथ ही उन्होंने जींद में संत कबीर छात्रावास के लिए अपने कोटे से 35 लाख व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृष्णलाल पंवार, मनीष ग्रोवर, कृष्ण बेदी, सांसद सुनीता दुग्गल व रमेश कौशिक के कोटे से 11-11 लाख रुपये की घोषणा की। इतना ही नहीं हर विधानसभा क्षेत्र से 100 लोगों को हर साल संत कबीर की जन्मस्थली वाराणसी या महर्षि वाल्मीकि की जन्मस्थली अमृतसर में रेल की द्वितीय श्रेणी के टिकट पर सरकार द्वारा मुफ्त यात्रा करवाने का फैसला लिया और तो और समाज के शोषित व वंचित वर्ग के लोगों को शिक्षा के और अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश में 11 नए सरकारी छात्रावास बनाए जाने का फैसला किया। इन सब में एक बात गौरतलब है कि हरियाणा में भाजपा की नजर वाकई अब दलितों और पिछड़ा वर्ग पर है।

सबसे खास फैसला तो वह है जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शिक्षण संस्थानों में दाखिले में एससी की ए व बी कैटेगरी बनाने की घोषणा की। माना जा रहा है कि इसका साफ असर अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुत फायदा पहुचायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक नियुक्तियों में भी धानक समाज के लोगों को नियुक्तियां दी जाएंगी। प्रदेश में अनुसूचित जातियों को नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 20 फीसद आरक्षण मिलता है।

1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने एससी आरक्षण को ए और बी कैटेगरी में बांट दिया था। ए कैटेगरी में धानक, खटीक, वाल्मीकि, डेहा, सैंसी सहित सभी निम्न जातियों को शामिल किया गया था, जबकि बी कैटेगरी में सिर्फ रविदासिया समाज रह गया था। बाद में यह मामला हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। वर्ष 2006 में हुड्डा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एससी ए व बी कैटेगरी को खत्म कर दिया था। तभी से ए कैटेगरी के लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं। बता दें कि ए कैटेगरी के लोग खुलकर यह आरोप लगाते रहे हैं कि वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुमारी सैलजा व अन्य नेताओं के दबाव में आकर एससी की कैटेगरी को खत्म किया था।

वहीं बीसी ए व बी कैटेगरी अभी बरकरार हैं। इसकी आग लोकसभा चुनाव में देखने को मिली थी जब अम्बाला में ए कैटेगरी के लोगों ने कांग्रेस प्रत्याशी कुमारी सैलजा का घेराव कर विरोध किया था। काले झंडे भी दिखाए थे। ए कैटेगरी में आने वाली जातियों के लोगों का आरोप है कि रविदासिया समाज के लोग ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, इसलिए 20 फीसद आरक्षण का ज्यादातर हिस्सा वे ले जाते हैं।

इसलिए इसका वर्गीकरण करना जरूरी है। ऐसे में इस नाराजगी को भुनाते हुए अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सिर्फ शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिले में वर्गीकरण की मांग मानकर बड़ा सियासी दांव खेल दिया है। प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में धानक, खटीक, वाल्मीकि, डेहा व सैंसी जातियों की बड़ी संख्या है। मुख्यमंत्री ने एक दांव से सबको साध दिया है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close