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मनोहर का 70+का दावा

मनोहर सरकार ने रोजगार, किसान और व्यापारियों का मुद्दा हल करने का कदम उठाकर विपक्ष के मंसूबो पर फेरा पानी

हिसार टुडे न्यूज

यही हाल रहा तो भाजपा का “मिशन 70 प्लस” होगा कामयाब
अभी तक विपक्ष कर रहा मंथन, भाजपा उठा रही फायदा
कांग्रेस का कमजोर संगठन और इनेलो की अस्वीकारिता चुनाव में भाजपा को पहुचायेगी लाभ
जजपा का लोकसभा में कम मत फीसदी के कारण भाजपा नहीं समझती जजपा को मुकाबले में

महेश मेहता | हिसार

हरियाणा में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब सत्तारूढ़ भाजपा सहित सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। पार्टियों के पास अब इतना समय नहीं बचा है कि चुनाव प्रबंधन में और देरी की जाए। तीन-चार महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में लोकसभा की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद भाजपा के हौसले इस बार पहले से कई गुना ज्यादा बुलंद हैं। पहले मिशन 10 के बाद अब भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर “मिशन 70 प्लस” लेकर आ रही है।

इस बार इस मिशन को पूरा करने के लिए खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही विधानसभा चुनावों के लिए मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। वे पार्टी प्रत्याशियों के अलावा विधायक दल की बैठक भी विधानसभा चुनावों की रणनीति के मद्देनजर ले चुके हैं। इसी सिलसिले में वह इस हफ्ते मंत्रियों के साथ अनौपचारिक बैठक भी करेंगे। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कुछ अहम फैसले लेने के लिए उन्होंने 4 जून को कैबिनेट की बैठक भी बुलाई है।

लोकसभा चुनाव के बाद यह मनोहर लाल खट्टर की पहली मंत्रिमंडल की बैठक होगी। हरियाणा में इस बारे विधानसभा का मुख्य मुद्दा किसान, रोजगार और व्यापार होने वाला है। इसलिए केंद्र ने आगामी चुनावों की रणनीति के तहत न देश के सभी 14.5 करोड़ किसानों को पीएम किसान योजना के तहत शामिल करने का निर्णय लिया गया है, इतना ही नहीं किसानों के लिए 77,10,774 करोड़ की पेंशन योजना की भी शुरुवात की गयी है।

मोदी 2.0 सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में एक नई योजना को भी मंजूरी दी गयी, जिस जीएसटी को लेकर केंद्र सन्देश और विपक्ष के निशाने पर था, सरकार ने इसी क्षेत्र में उल्लेखनीय योजनाओं को लाया है। जिसके तहत 60 वर्ष की आयु के बाद सभी दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों और स्वरोजगार करने वालों को न्यूनतम 3,000 रूपए की मासिक पेंशन देने का फैसला लिया गया है।

अगले तीन वर्षों में पांच करोड़ व्यापारियों के इस योजना में शामिल होने की उम्मीद सरकार जता रही है। जिसमें हरियाणा का भी बहुत योगदान रहेगा। इस योजना के तहत “सभी दुकानदारों और स्व-नियोजित व्यक्तियों के साथ-साथ खुदरा व्यापारियों को जिनकी जीएसटी टर्नओवर 1.5 करोड़ से कम और उनकी आयु 18-40 वर्ष के बीच है ऐसे सभी लोग इस योजना के लिए शामिल हो सकते हैं।

रही बात रोजगार की तो खुद हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने यह फैसला कर लिया है कि वह चुनाव के पूर्व बम्पर भर्ती भी निकालेगी। ऐसे में हरियाणा के कई महत्वपूर्ण विषयों पर जब सरकार काम कर देगी तो जाहिर है जनता का विश्वास ऐसे ही भाजपा सरकार के साथ होगा। इतना ही नहीं इन सब के बीच विपक्ष के पास भी कोई खास मुद्दे नहीं बचे जिसके दम पर वह हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को घेर सके।

एक तरफ जहां कांग्रेस गुटबाजी, कमजोर नेतृत्व और मंथन में व्यस्त है, इनेलो कमजोर संगठन और जजपा अभी पार्टी को और मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा के सामने मैदान साफ होगा। विपक्ष न सदन में और न सडकों पर हरियाणा की खट्टर सरकार को घेर नहीं पाया है, ऐसे में अगर विपक्ष का यही हाल रहा तो यह कहना गलत नहीं होगा की “भाजपा मिशन 70 प्लस” में कामयाब हो जाए। आखिर कौन से मुद्दे भाजपा के इस मिशन को आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, आईये डालते है उसपर नजर।

कांग्रेस का कमजोर नेतृत्व

भाजपा के लिए इस बार सबसे सकरात्मक पहलू यही चल रहा है कि उसके सामने विपक्ष के तौर पर खड़ी कांग्रेस बेहद कमजोर नजर आ रही है। कांग्रेस के दिग्गजों की लोकसभा में हार के बाद वैसे भी प्रदेश स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को चोट पहुंची है। इतना ही नहीं एक तरफ कांग्रेस की कमजोर नेतृत्वक्षमता, गुटबाजी और अब तक हार को लेकर चल रहा मंथन का दौर उन्हे और कमजोर विपक्ष के तौर पर साबित कर रहा है। प्रदेश के जनता के सामने यह सारी बातें साफ दिखाई दे रही हैं। जिसको भुनाने में भाजपा के प्रदेश स्तर के नेता भी कोई को-कसर नहीं छोड़ते और यही बात उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

इनेलो की अस्वीकारिता बढ़ी, वोट घटे

इतना ही नहीं इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के आगमन के साथ इनेलो कार्यकर्ताओं का थोड़ा बहुत मनोबल जरूर बढ़ा है। मगर लोकसभा चुनाव के पहले पार्टी टूटी और चुनाव के नतीजे बेहद निराशाजनक और शर्मानक रहे। उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि जनता ने भी अपनी पसंदीदा पार्टी इनेलो को अस्वीकार कर दिया है।

जिस 2005 में इनेलो को मात्र 9 सीट मिली थी, 2009 में आंकड़ा बढ़ कर 31 पर पंहुचा और 2014 में इनेलो 19 सीट जीतने में कामयाब रही, मगर 2014 से 2019 का समय इनेलो के लिए सबसे बुरा रहा। पार्टी दो फाड़ हुई। जननायक जनता पार्टी के गठन के साथ काफी विधायकों ने इनलो पार्टी छोड़कर जजपा में शामिल हो गए, कुछ विधायक भाजपा में चले गए और नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी इनेलो से छीन गयी, ऊपर से लोकसभा चुनाव में सबसे बुरा हाल सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी इनेलो का रहा। यही कारण है कि भाजपा को लगता है कि इनेलो उनके लिए कभी चुनौती बनकर साबित भी नहीं हो सकती।

रोजगार नीति के सामने विपक्ष ढेर

अब तक हरियाणा में कांगेस का राज रहा करता था, इनेलो का भी राज आया। मगर जब बात आती है रोजगार की तो जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा पर बिना पर्ची और खर्ची के केवल रोहतक के लोगो को रोजगार देने का आरोप लगा जबकि इसी जेबीटी भर्ती के कारण इनेलो सुप्रीमो को 10 साल की सजा काटनी पड़ रही है।

इसके ठीक उलट भाजपा की मनोहर लाल खट्टर सरकार के राज में युवाओ की काबलियत के आधार पर रोजगार देने के लिए बंपर भर्ती निकाल कर असंख्य युवाओ को सरकारी नौकरी देने का काम किया। बल्कि इन नौकरी भर्ती में माना जाता था कि वह अपने कार्यकर्ताओ की भी सिफारिश नहीं करते थे, जिसके कारण भाजपा के लोग ही उनसे नाराज चलते थे। मगर ईमानदारी से रोजगार प्रदान कर उन्होंने भाजपा की रोजगार निति को बिना किसी भ्रष्टाचार के दाग लगे प्रदेश में लागु किया उससे विपक्ष के मुद्दे कही न कही ढेर होते जा रहे है , आगामी विधानसभा चुनाव के पहले में नौकरी निकालकर वह प्रदेश का माहौल भाजपा के पक्ष में लाने का प्रयास करेंगे।

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