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राहुल-प्रियंका की आस “कुलदीप बिश्नोई” (Video)

90 विधानसभा के दौरे के साथ दिखाएंगे अपना दम

हिसार टुडे।

कांग्रेस की ताकत को बलवान करने के लिए अब स्वर्गीय भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई ने हरियाणा में जाट -नो जाट वोटो के ध्रुवीकरण को रोकने के लिए कमान अब अपने हाथो में संभाली है। हाल में अपने प्रिय नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी से कुलदीप बिश्नोई ने मुलाक़ात की।

इस मुलाक़ात को कुछ लोग औपचारिक मुलाक़ात कहे मगर इसके कई मायने निकाले जा रहे है। यह महज एक आम मुलाक़ात नहीं बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के पहले कुलदीप बिश्नोई का वो बड़ा कदम है जिसका लाभ पार्टी को जरूर हो सकता है। दरहसल इस बार लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार से जाट – नॉन जाट का मुद्दा छाया रहा। ऐसा आरोप लगाया गया कि भाजपा ने नॉन जाट पर दांव खेल कर वोटो के ध्रुवीकरण करने की कोशिश की। जिसका असर रोहतक में भी दिखाई दिया। यही कारण है कि कांग्रेस में नॉन -जाट चेहरे के तौर पर मशहूर कुलदीप बिश्नोई ने नॉन जाट मतदाताओं का ध्रुवीकरण रोकने का जिम्मा अपने हाथो में उठाया है।

कुलदीप बिश्नोई इसके माध्यम से एक तीर से साधने की तैयारियों में है। अपने बिमारी से बाहर आये कुलदीप बिश्नोई जल्द ही हरियाणा की 90 विधानसभा में अपना पुराना करिश्मा लाने की फिराक में है। वैसे कुलदीप बिश्नोई के मामले में कहा जाता है कि वह प्रदेशाध्यक्ष के दौड़ में शामिल है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी उनके नाम का शुमार है।

इसलिए कुलदीप के लिए यह जरुरी बन गया है कि हरियाणा में अपनी खोयी ताकत दुबारा पाए और नॉन जाट मतदाताओं का ध्रुवीकरण होने से रोके। वैसा माना यह भी जा रहा है कि इसके माध्यम कुलदीप की इन दोनों ही पदों को लेकर दावेदारी मजबूत होगी ही , साथ ही पार्टी में यह भी सन्देश जायेगा कि कुलदीप बिश्नोई पार्टी हित की दिशा में काम करने में लगे है।

कुलदीप बिश्नोई के सामने अभी चुनौतियां बेहद है। उनका मुकाबला 2 बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से है। खैर यहां मुकाबला करने से ज्यादा कुलदीप अपनी दावेदारी को पार्टी के हित में साबित करने में जुट गए है। एक दौर था जब स्वर्गीय भजनलाल की पुरे हरियाणा में तूती बोलै करती थी अब उसी दौर को वापस लाने की चुनौती कुलदीप के कंधो में आ चुकी है। यही कारण है कि कुलदीप बिश्नोई हो सकता है जुलाई से हरियाणा के सभी विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करे।

उनका विशेष फोकस रोहतक भी रहेगा। क्योंकि उनको पता है कि रोहतक में एक बहुत बड़ा वोट बैंक नॉन जाट का रहा है। इसी वोटबैंक की नाराजगी से दीपेंद्र हुड्डा को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। मगर इस बार कुलदीप ने जिस प्रकार से कांग्रेस की कमान संभाली है वह पार्टी को एकजुट रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। साथ ही वह दूसरे नेताओ को भी सन्देश दे जाएंगे की खुद की सोचने से जयदा अन्य नेताओ को पार्टी को मजबूत करने की दिशा में सोचना चाहिए। वर्ण आगामी भविष्य किसी खतरे की घंटी से कम न होगा।

आज की राहुल और प्रियंका से मुलाकात के बाद से कुलदीप बिश्नोई में एक मजबूत ऊर्जा के साथ पार्टी को मजबूती देने की रणनीति भी सामने आ रही है। अब कुलदीप मैदान में पूरी तरह उतर चुके है। उन्होंने इस बात को भाप लिया है कि प्रदेशाध्यक्ष को लेकर पार्टी के अंदर कुछ लोग “चूहे -बिल्ली” का खेल खेल रहे है।

इसलिए अब कुलदीप सबसे हटकर एक नेता की भूमिका कैसी होनी चाहिए इसका परिचय देने के लिए तमाम कांग्रेस के कार्यकर्ताओ और मतदाताओं का दिल जितने के लिए 90 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे। हो न हो कुलदीप के इस कदम से शायद दूसरे नेता कुछ सिख ले पाते और कम से कम पार्टी के लिए कोई कदम उठा पाते।

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