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भूपेंद्र हुड्डा पर ईडी की कार्यवाई एजेएल मामले में चार्जशाीट दाखिल

रोपपत्र दाखिल होने के बाद भाजपा को मिला हुड्डा के खिलाफ मुद्दा, ईडी ने एजेएल मामले में दाखिल की चार्जशाीट, 64.93 करोड़ रुपये का भूखंड 69.39 लाख रुपये में देने का आरोप

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर मानो मुसीबतों का पहाड़ थमने का नाम ही नहीं ले रहे। दरअसल हाल में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के ऊपर ईडी की कार्यवाई के बाद अब ईडी के निशाने में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा आ चुके हैं। दरअसल ईडी ने हुड्डा पर शिकंजा कसते हुए एजेएल प्लाॅट आवंटन मामले में हुड्डा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इतना ही नहीं उनके साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है। ईडी ने इस मामले में पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में पहला आरोप पत्र दायर किया है। हरियाणा में कुछ ही महीनो में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले इस कार्यवाई के बेहद गंभीर मायने निकले जा रहे हैं। क्योंकि इस आरोपपत्र दाखिल होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेताओं को हुड्डा पर प्रहार करने का एक और सुनहरा अवसर मिल जाएगा। बता दें कि अब तक हुड्डा पर किसी भी प्रकार का आरोपपत्र साबित नहीं हुआ है, मगर आरोपपत्र दाखिल करने के कारण वह विवादों में फंस गए है। ईडी के इस कदम से न केवल उनके साथ नई पार्टी बनाने की मंशा पालने वाले विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।

क्या इसलिए नहीं मिल रही हुड्डा को हाई कमान से तब्बजो

बता दें कि हुड्डा प्रदेशाध्यक्ष बनाने की कोशिशों में तब से लगे हैं जब से केंद्र ने अशोक तंवर को हरियाणा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। हालांकि उनकी मांग को हर बार हाईकमान सुनकर भी अनसुना कर देता है। मगर इस बार रोहतक में हुड्डा ने परिवर्तन रैली का आयोजन कर हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिशों में आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। हालांकि हुड्डा के दबाव के सामने कांग्रेस हाईकमान झूकने को तैयार नहीं। भले ही हुड्डा को लेकर अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी का नरम रुख रहा है, मगर राहुल गाँधी किसी भी हाल में हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के मूड में नहीं है। जानकारों का मानना है कि जब से गुरुग्राम के एक भूखंड आवंटन मामले में हुड्डा के साथ रोबर्ट वाड्रा का नाम सामने आया है और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे है। तब से हुड्डा से खफा गाँधी परिवार उनको प्रदेश की कमान सौपने को तैयार नहीं। इतना ही नहीं ईडी का मामला सामने आने के बाद माना जा रहा है कि हुड्डा का अब प्रदेशाध्यक्ष बनने का सपना हमेशा के लिए अधूरा ही रहेगा।

हुड्डा के समर्थित विधायकों को भुगतना पड़ेगा खामियाजा

बता दें कि जिस महापरिवर्तन रैली में हुड्डा ने जिन विधायकों और पूर्व विधायकों के दम पर अलग पार्टी बनाने का दम रख रहे हैं, आज उन्ही नेताओं के सामने हुड्डा के मामले में ईडी का आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अंधकार के बादल छा गए हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि जिस हुड्डा के नेतृत्व में वह चुनाव में उतरने की योजना बना रहे है अगर उन पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते है तो इसका खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ेगा, क्योंकि भाजपा के सामने हुड्डा के खिलाफ जोरदार और मजबूत हथियार होगा जिसका शिकार चुनाव प्रचार के दौरान न केवल हुड्डा बल्कि उनको समर्थन देने वाले विधायकों को उठाना पड़ेगा।

विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज है मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की शिकायत पर राज्य सतर्कता विभाग ने मई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया। चूंकि मुख्यमंत्री ही हुडा के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यह गड़बड़ी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुई, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। सतर्कता ब्यूरो ने 5 मई 2016 को भारतीय दंड सहिंता की धारा 409, 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। 5 अप्रैल 2017 को राज्य सरकार ने मामला सीबीआइ को सौंप दिया। सीबीआइ ने हुड्डा के खिलाफ 120बी, 420 एवं सेक्शन 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) डी के तहत चार्जशीट दाखिल किया। बता दें, प्लॉट आवंटन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत में दिसंबर 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, एजेएल के तत्कालीन चेयरमैन कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी।

क्या था मामला

गौरतलब है कि 24 अगस्त 1982 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएट्स जनरल लिमिटेड (एजेएल) के हिंदी अखबार नवजीवन को पंचकूला सेक्टर छह में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट (नंबर सी -17) अलॉट किया था। कंपनी को इस पर छह माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन वह 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई। इसके बाद 30 अक्टूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण यानि हुडा ने आवंटन को रद्द कर दिया था। इसके बाद 18 अगस्त 1995 को नए आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। इसी दौरान 14 मार्च 1998 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने हुडा के चेयरमैन को पूर्व प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की अपील की। 14 मई 2005 को हुडा के चेयरमैन ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा, लेकिन कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफतौर पर इन्कार कर दिया। मामले के अनुसार 28 अगस्त 2005 को हुडा ने एजेएल को 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट कर दिया। जबकि इसे 2005 की दरों पर जारी किया जाना चाहिए था। इसके साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके एक साल में काम पूरा करने को भी कहा। एजेएल अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज अखबारों का प्रकाशक रहा हैै।

भाजपा को मिला मुद्दा

भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ ईडी ने आरोपपत्र दाखिल करते हुए भाजपा के हाथों पर गरमागरम मुद्दा दे दिया है। क्योंकि भाजपा इस बात से अवगत है कि भाजपा को चुनौती सिर्फ कांग्रेस दे सकती है और कांग्रेस के बड़े नेता हुड्डा हैं। ऐसे में हुड्डा पर आरोप लगने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, भाजपा को विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस और हुड्डा के खिलाफ गरमागरम मुद्दा उठाने को मिल गया है।

 

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