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गोदरेज परिवार में मतभेद, ताले बनाने से चंद्रयान तक का कारोबारी सफर

गोदरेज ग्रुप की स्थापना अर्देशिर गोदरेज और उनके छोटे भाई पिरोजशा गोदरेज ने 1897 में की थी। इसकी उत्पत्ति ताले बेचने से हुई।

हिसार टुडे | 

आज जब गोदरेज परिवार में बिजनस स्ट्रैटिजी और जमीन को लेकर मतभेद की खबर आई, तो इस ग्रुप की उत्पत्ति की कहानी याद करना लाजिमी हो गया। गोदरेज ग्रुप की स्थापना अर्देशिर गोदरेज और उनके छोटे भाई पिरोजशा गोदरेज ने 1897 में की थी। इसकी उत्पत्ति ताले बेचने से हुई। दरअसल, अर्देशिर ने अखबार में पढ़ा कि मुंबई में चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। तब उन्होंने ताले बेचने की शुरुआत की।

निःसंतान थे गोदरेज ग्रुप के संस्थापक

अर्देशिर को कोई संतान नहीं थी जबकि पिरोजशा के चार पुत्र हुए- शोराब, दोसा, बुरजोर और नवल। शोराब निःसंतान थे। दोसा के पुत्र रिशद ने कंपनियां चलाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि, वह कंपनी में शेयर होल्डर जरूर रहे। वन्य जीवों एवं फटॉग्रफी के शौकीन रिशद ने की भी कोई संतान नहीं हुई। बुरजोर के बच्चे आदि गोदरेज और नादिर गोदरेज हैं। दोनों गोदरेज प्रॉपर्टीज, गोदरेज इंडस्ट्रीज, गोदरेज कन्ज्यूमर प्रॉडक्ट्स और गोदरेज ऐग्रोवेट का कामकाज देखते हैं। नवल की संतानें जमशेद गोदरेज और स्मिता गोदरेज कृष्णा हैं।

क्या कर रहे है किनके बच्चे

जमशेद परिवार की होल्डिंग कंपनी गोदरेज ऐंड बॉयस के चेयरमैन हैं। स्मिता परिवार के कारोबार से जुड़ी नहीं हैं, लेकिन उनके पति विजय कृष्ण और पुत्री नायरिका होल्कर बिजनस ऑपरेशन से जुड़ी हैं। आदि के तीन बच्चे तान्या, निसाबा और पिरोजशा बिजनस में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उसी तरह नादिर के तीन बच्चे हैं। सबसे बड़े पुत्र बुरजिस गोदरेज ऐग्रोवेट जबकि दूसरे पुत्र शोराब गोदरेज इंडस्ट्रीज का कामकाज देखते हैं। सबसे छोटे पुत्र होरमुसजी का फैमिली बिजनस से कोई लेनादेना नहीं है।

जमशेद गोदरेज के पुत्र नवरोज गोदरेज ऐंड बॉयस में गैर-कार्यकारी निदेशक (नॉन-एग्जिक्युटिव डायरेक्टर) हैं जबकि बेटी राइका का इस ग्रुप में औपचारिक प्रवेश नहीं हुआ है। परिवार के ज्यादातर सदस्य ग्रुप कंपनियों के बोर्ड में शामिल हैं। उनकी ग्रुप की सभी कंपनियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष हिस्सेदारी भी है। गोदरेज परिवार (आदि, जमशेद, नादिर, स्मिता और रिशद) के पास गोदरेज ऐंड बॉयस के 9 से 10 प्रतिशत शेयर हैं जबकि 27 प्रतिशत हिस्सेदारी गोदरेज इन्वेस्टमेंट्स की है।

गोदरेज ऐंड बॉयस मुंबई में सबसे ज्यादा जमीन वाली निजी कंपनी है। सरकारी रेकॉर्ड्स में कंपनी के पास विखरोली, नाहुर और कुर्ला में 3,401 एकड़ जमीन है। गोदरेज ग्रुप इन जमीनों पर हाल के वर्षों में कमर्शली बड़ी-बड़ी आवासीय परियोजनाएं विकसित करता रहा है। ऐसा लगता है कि अभी परिवार के बीच उभरे मतभेद का प्रमुख कारण भी रियल एस्टेट बिजनस ही है। परिवार के पास विखरोली में अति-संरक्षित मैनग्रोव के पौधों का बगीचा है।

महाराष्ट्र की स्लम अथॉरिटी का आकलन है कि गोदरेज ग्रुप ने विखरोली स्टेश के पास कम-से-कम 300 एकड़ जमीन का अतिक्रमण किया हुआ है। गोदरेज ने मुंबई के पूर्वी उपनगरीय इलाके में 1940 के दशक के शुरुआती सालों में खरीदी थी। यह जमीन मूल रूप से पारसी व्यापारी फ्रैमजी बानाजी को 1830 में ईस्ट इंडिया कंपनी से मिली थी। 1940-41 में यह बिक्री के लिए रखा गया। गोदरेज ग्रुप ने इस जमीन को खरीद लिया तो फिर आसपास के 200 जमीन मालिकों से उनकी जमीनें खरीदने की बातचीत शुरू कर दी। पिछले दशक में गोदरेज ग्रुप मुंबई की अग्रणी रियल एस्टेट सेक्टर का बड़ा प्लेयर बन गया।

सोच का फर्क

गोदरेज परिवार के एक करीबी सूत्र ने कहा कि मतभेदों के कारण आंतरिक उथल-पुथल नहीं दिख रहा है। उसने कहा, ‘वे बोर्ड मीटिंग्स में जाते हैं और इनका एक-दूसरे के प्रति बेहद सद्भावनापूर्ण व्यवहार है।’ परिवार को जानने वाले एक अन्य व्यक्ति ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘यह सिर्फ वक्त की बात है। नई पीढ़ी भिन्न-भिन्न दिशाओं में बढ़ना चाहती है। वे तेजी से कदम बढ़ाने वाले हैं और अगर कोई उनसे कदमताल नहीं मिला सकेगा तो संघर्ष की स्थिति पैदा होगी ही।’

आदि और जमशेद में अंतर

सूत्र के मुताबिक, ‘आदि गोदरेज अंतरराष्ट्रीय सामाजिक परिदृश्य में छाए रहते हैं। वह बेहद चतुर और कुशाग्र बुद्धि के बिजनसमैन हैं जिनके पास कमोडिटी मार्केट की गहरी जानकारी है। वहीं, जमशेद गोदरेज लोगों की नजर में बहुत कम आते हैं और सामाजिक जीवन का आनंद नहीं उठाते। वह साधारण जीवन जीने वाले और मेहनती हैं।’

किनके बच्चे कहां

प्रॉपर्टी मार्केट के एक बड़े एक्सपर्ट ने कहा, ‘आदि के बच्चों का कारोबार पर पूरी पकड़ है। वे बेहद महत्वकांक्षी और बुद्धिमान हैं। पिरोजशा के नेतृत्व में गोदरेज प्रॉपर्टीज के शेयर आसमान छू रहे हैं।’ सूत्रों का कहना है कि जमशेद शायद अपनी भांजी नायरिका को तैयार कर रहे हैं। परिवार के अंदरूनी सूत्रों ने बताया, ‘नायरिका वकील हैं और जमशेद के साथ काम करती हैं।’

ताले से लेकर चंद्रयान तक का सफर

1897 युवा पारशी वकील अर्देशिर ने कुछ कारोबार में असफलता मिलने के बाद ताला बनाने की कंपनी स्थापित की।
1918 गोदरेज ने जानवरों के वसा से मुक्त दुनिया का सबसे पहला वनस्पति तेल युक्त साबुन बनाया।
1923 आलमीरा बनाने के साथ ही फर्नीचर बिजनस में कदम रखा।
1951 स्वतंत्रता के बाद पहले लोकसभा चुनाव के लिए कंपनी को 17 लाख बैलॉट बॉक्स बनाने का सरकारी ठेका मिला।
1952 स्वतंत्रता दिवस पर सिंथॉल साबुन लॉन्च किया।
1958 रेफ्रिजरेट बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।
1974 लिक्विड हेयर कलर प्रॉडक्ट्स की बिक्री शुरू की।
1990 रियल एस्टेट बिजनस में कदम रखा।
1991 कृषि व्यवसाय में भी प्रवेश किया।
1994 गुड नाइट ब्रैंड के तहत मच्छर मारने वाली चकरी (मैस्किटो मैट्स) बनाने वाली कंपनी ट्रांस्लेक्टा को खरीदा।
2008 चंद्रयान 1 के लिए लॉन्च वीइकल और ल्यूनर ऑर्बिटर बनाए।

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