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मनोहर राज को चुनौती देना गुटबाजी में फंसी कांग्रेस के लिए नहीं आसान

Hisar Today

महेश मेहता | हिसार टुडे
हरियाणा में मिशन 75 को लेकर चलने वाली भाजपा को चुनौती दे रही है कांग्रेस। जो एक साथ दिख रही है, मगर गुटबाजी में भी कम नहीं है। जनआशीर्वाद यात्रा के बाद भाजपा के पक्ष में बने माहौल को कम करने में हुड्डा और शैलजा की जोड़ी कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई है। जो जोश भाजपा के रैलियों में दिखाई दे रहा है वह इन जोड़ी के रैलियों में नहीं है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अगर यही हाल रहा था तो भाजपा का 75 पार का नारा रोक पाना कांग्रेस के लिए असंभव है।

शैलजा के बयान ने कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी को दी हवा
हरियाणा में कुछ समय पहले मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त करने वाली कांग्रेस की गुटबाजी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि कांग्रेस पूरे दमखम के साथ विधानसभा चुनाव में उतरेगी। कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने हिसार में स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता की। इस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने कुमारी शैलजा से सवाल किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री कौन बनेगा तो शैलजा ने कहा कि हरियाणा का मुख्यमंत्री सोनिया गांधी तय करेंगी। इतना ही नहीं अशोक तंवर और किरण चौधरी के नाराजगी पर शैलजा का जवाब कांग्रेस के अंदर व्याप्त गुटबाजी को प्रदर्शित करता है। बता दें कि ठीक दूसरी तरफ कांग्रेस के नवनियुक्त विधायक दल के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार अपने को मुख्यमंत्री प्रत्याशी के तौर पर प्रोजेक्ट करते हुए घोषणाएं करते जा रहे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणाएं रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं। इससे यह समझ से परे है कि पावर किसके हाथ में है।

रणदीप सुरजेवाला को सता रहा है अपने ही नेताओं का डर
वहीं ठीक दूसरी तरफ ताज छीनने से बेचैन डॉक्टर अशोक तंवर अलग ही राग अलाप रहे हैं। अशोक तंवर कह चुके है कि “जिसने जितना साथ दिया है उसको उतना साथ मिलेगा।”वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला कैथल में जनता से कह रहे हैं कि इस बार हो सकता है कोई कांग्रेसी भी आपकी कान फूंकने आ जाए तो सतर्क रहना, किसी के बहकावे में मत आना मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है।

किरण को नहीं मना पाए हुड्डा!
किरण चौधरी के पद पर कब्जा जमाने के बाद चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने दल बल के साथ किरण चौधरी को मनाने दिल्ली तक चले गए थे। लेकिन अंदर खाते यह कहा जा रहा है कि चौधरी साहब को किरण चौधरी की ना ही नसीब हुई है।

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