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दुष्यंत चौटाला की शायरी को दोहरा कर उन्होंने बदलाव की तरफ दिया इशारा

हुड्डा ने शायर वसीम बरेलवी की शायरी कहते हुए अपने भाषण का सम्मपन किया

हिसार टुडे

जननायक जनता पार्टी के शुभारम्भ के दौरान जो शायरी दुष्यंत चौटाला ने कह कर सभी समर्थको की वाहवाही लूटी ठीक वैसे ही अंदाज में हुड्डा नजर आये उन्होंने भी वही शायरी कही जो दुष्यंत ने कही. हुड्डा ने शायर वसीम बरेलवी की शायरी कहते हुए अपने भाषण का सम्मपन किया जिसमें उन्होंने कई संकेत दिए। उन्होंने कहा की

उसूलों पे जहां आंच आये टकराना जरुरी है ,
“जो जिंदा हों तो ज़िंदा नजर आना जरुरी है।

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