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134-A में धांधली का आरोप, शिक्षकों द्वारा पेपर हल करवाने और मेरिट के लिए नम्बर बढ़ाने का लगा आरोप

Hisar Today

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
सरकार ने ग्रुप डी की भर्ती का मामला जींद उपचुनाव के दौरान लाकर माहौल को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की थी, जिसका सकरात्मक असर चुनाव परिणाम में नजर आये। अब ठीक उसी प्रकार लोकसभा चुनाव के पहले 134A के तहत गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर नतीजे ठीक चुनाव के पहले लाकर भाजपा चुनाव के दैरान दुबारा लाभ उठाने का आरोप लगाया जा रहा है। यही कारण था कि हिसार टुडे ने इसी का रियलिटी चेक करने की कोशिश की और शैक्षणिक संस्था की परीक्षा के नाम पर होने वाली धांधली का खुलासा हुआ।

एडमिट कार्ड रद्दी की तरह बाटें गए
बीईओ के कार्यालय में एडमिट कार्ड देने के लिए अभिभावकों के साथ खिलवाड़ और ज्यादती की गई। पहले कहा 12 को मिलेंगे एडमिट कार्ड, 12 को अभिभावक पहुंचे तो कहा 13 को आओ। 13 को आये तो एक नया नोटिस लगा दिया कि अटेस्टेड आधार कार्ड और फोटो के साथ आओ। अभिभावक धक्के खाकर पहुंचे तो बिना आधार चेक किये ऐसे ही रद्दी की तर्ज बाटें जा रहे थे कार्ड। हद्द तो और थी कि शिक्षा विभाग वाले अपने कुछ परिचित को लेकर आये कहा इसका एडमिट कार्ड दे दो, जबकि अभिभावक 2 घण्टे से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

परीक्षा केंद्र का बुरा हाल
हिसार टुडे ने अपनी खबर में इस बात का खुलासा किया था कि कैसे परीक्षा केंद्र में अव्यवस्था का आलम था। परीक्षा का समय 10 बजे होने के बावजूद न रोल नम्बर लिखे थे, न बच्चों को बैठने के लिए टाट थे न बेंच, न पंखे, न पिने का पानी। इतना ही नहीं 2 घंटे इंतजार करने वाले अभिभावकों के लिए भी बैठने की व्यवस्था नहीं कर रखी थी।

धक्के खिला रहे हैं अभिभावकों को, इससे तो अच्छा नार्मल स्कूल में पढ़ा देते बच्चे को
रोष में आये अभिभावकों ने हिसार टुडे को बताया कि अभिभावकों को मात्र धक्के खिलवाने में शिक्षा विभाग को बहुत ख़ुशी मिल रही है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन रिजल्ट नहीं बताया जा रहा, बच्चों के नम्बर नहीं बताये जा रहे, इससे शक हो रहा है कि यहां कुछ लोगों ने अपने ख़ास लोगों के नम्बर बढ़वाए हैं, ताकि उनका एडमिशन हो जाए। इसलिए बाकी बच्चों के नम्बर नहीं बताए गए। उन्होंने कहा कि इन लोगों को अच्छा लगता है अभिभावकों को धक्के खिलाते हुए। इससे तो अच्छा था कि नार्मल स्कूल में एडमिशन करवा लंू अपने बच्चों का। मुझे तो लगा कि मेरे बेटे को अच्छे स्कूल में दाखिला मिलेगा, मगर लगता नहीं कि अब उसका एडमिशन हो पायेगा।

मनोहर लाल खट्टर अभिभावकों के साथ मत करो भद्दा मजाक
हिसार टुडे से बात करते हुए अभिभावकों ने बताया कि फॉर्म के समय जब स्कुल के नाम भरने थे तो पहले दिन अलग स्कूल की लिस्ट थी, दूसरे दिन अलग और तीसरे दिन अलग। ताकि अभिभाक इन स्कूलों का नाम न भर पाएं और उनके बच्चे को एडमिशन न मिल पाए। इतना ही नहीं एक अभिभावक ने कहा कि एक तो परीक्षा में बच्चों को नकल करवाई गयी, एक तो स्कूल में न कैमरा था न फ्लाइंग। ऊपर से आज कहने के बाद भी रिजल्ट नहीं। कृपया करके मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जनता से न करे ऐसा भद्दा मजाक।

134 ए के तहत हुई परीक्षा में गंगवा की टीचरों ने करवाई चीटिंग
हिसार टुडे से बात करते हुए सूर्यनगर से आई एक अभिभावक ने परीक्षा में हुयी धांधली का खुलासा करते हुए कहा कि परीक्षा में जमकर चीटिंग करवाई गई। महिला अभिभावक का आरोप था कि उनके पड़ोस के 4 बच्चे परीक्षा देने गए थे, जिसमें से कुछ बच्चों ने परीक्षा के बाद बताया कि दूसरी क्लास के बच्चों को टीचरों ने सारे पेपर के उत्तर बताए। इतना ही नहीं उसने इस बात का खुलासा किया कि सूर्यनगर से गंगवा के सरकारी स्कूल में यह बच्चे अपनी परीक्षा देने गए थे।

मेरिट के नाम पर नम्बर बढ़ाने का हो रहा था कॉल
बता दें कि इस बार बच्चों का दाखिला मेरिट में होना था, मगर अभिभावकों का आरोप था और कुछ शिक्षकों ने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि देर तक उत्तर पुस्तिका जांचने के दौरान कुछ लोग अपने बच्चों के नम्बर बढ़वाने के लिए टीचरों को और प्रिंसिपल को कॉल कर रहे थे। जिन बच्चों ने कुछ नहीं किया उनके भी नम्बर बढ़वाने की कोशिश अभिभावक कर रहे थे। ऐसे में इसमें कोई शक नहीं कि कुछ बच्चों के मार्क्स बढ़वाए गए और बहुत बड़ी धांधली को अंजाम दिया गया।

अभिभावक परीक्षा के दौरान सीधे एग्जाम सेंटर के अंदर मौजूद टीचर से साध रहे थे संपर्क
हिसार टुडे की टीम जब न्यूज कवर करने गई थी तो हमारी टीम ने पाया कि बाहर खड़े अभिभावक अंदर टीचर को बार बार फोन करके कह रहे थे “मेरे बेटे को देख लेना, पूरा पेपर दे रहा है या नहीं, उसे देखना आदि” जिसका साफ अर्थ था कि जिस सेण्टर में फोन नहीं होना चाहिए था, वह शिक्षक फोन पर अभिभावकों के मनमुताबिक काम कर रहे थे।

अभिभावकों ने 134-A पर लगाया धांधली का आरोप, ऑनलाइन नहीं मिला रिजल्ट
एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पारदर्शिता की बात करते हैं, मगर असल में उनकी ही योजना की धज्जियां आज उनकी सरकार का शैक्षणिक विभाग करने पर तुला है। विभाग ने खुद अभिभावकों को कहा था कि 18 को रिजल्ट आएगा, मगर अभी तक अभिभावकों को उनके बच्चों के रिजल्ट दिखाई नहीं दिए। अभिभावक जब अपनी शिकायतों के साथ पहुंचे और बच्चों के नम्बर जानने चाहे तो बीइओ ने उन्हें यह कहकर उलटे पाँव वापस लौटा दिया कि 19 को दोपहर बाद आना। इस बात से अभिभावक नाराज नजर आये और उन्होंने अपनी व्यथा हिसार टुडे से बयान की। अभिभावकों का कहना था कि विभाग सही प्रकार से जवाब नहीं दे रहा कि रिजल्ट कब आएगा ? कब सूचि लगाई जाएगी ? कुछ अभिभावकों को कहा गया 19 तारीख को दोपहर 2 बजे के बाद सूचि लगाएंगे, कुछ को कहा 24 तो कभी कहते हैं 28 को रिजल्ट पता चलेगा।

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