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134-ए की परीक्षा में अव्यवस्था का आलम, नौनिहालों को पीने का पानी व पंखे की हवा भी नहीं हुई मयस्सर

10 मिनट देरी से शुरू हुई परीक्षा, अभिभावकों के साथ धक्का मुक्की

टुडे न्यूज | हिसार
हिसार जिला में शिक्षा विभाग की लापरवाही और खामियों का कहानी जितना भी बयान करंे वह कम ही नजर आती है। एक तो अधिकारियों के पास लोगों के फोन उठाने का समय नहीं और न ही 134-ए के तहत शहर में चल रही परीक्षा का जायजा लेकर कोई कार्यवाई की है।
हमेश ऐयरकण्डीशन और कूलर ही हवा खाते शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने दफ्तर में बैठे जहां पंखे और एसी की हवा खा रहे थे तो दूसरी तरफ दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवी कक्षा के छोटे बच्चे कड़कती धूप में बिन पंखो, बिना लाइट, बिना डेस्क के जमीन पर टाट पर बैठने को मजबूर हुए। कुछ बच्चों को तो बैठने के लिए टाट मिल गया था, जबकि कुछ बच्चों को टाट नहीं मिला। जिसके चलते वह जमीन पर बैठकर परीक्षा देने पर मजबूर हो गए थे। हालत यह थे कि 10 बजे परीक्षा शुरू होने वाली थी, 10 बजे भी गया था मगर न बच्चों को बैठने की व्यवस्था थी, न ही उनका रोल नम्बर लिखा गया था। बच्चों को रामभरोसे बिठा कर उनके और निजी स्कूलों में अपने बच्चों के एडमिशन का ख्वाब पाले बच्चों के अभिभावकों के साथ विश्वासघात किया गया। यह हाल और कहीं नहीं बल्कि गंगवा के सीनियर सेकंडरी स्कूल में देखने को मिली। 134-ए परीक्षा के दौरान भयंकर अव्यवस्थाओं का आलम इस हद्द तक देखने को मिला कि परीक्षा खुद 10 मिनट देरी से शुरू करनी पड़ी। हजारों की संख्या में परीक्षा देने आये छात्रों के साथ अभिभावकों में काफी अफरातफरी रही।
दरअसल प्राइवेट स्कूलों में सरकारी खर्चे पर पढ़ने के सपने पाले हुए 7 हजार 134-ए विद्यार्थियों ने नियम 134-ए के तहत प्रवेश परीक्षा दी। मगर इस दौरान अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम था कि सरकार की इस योजना के प्रति सरकार कितनी गंभीर है इसकी कलई खुल गयी।
दरअसल गंगवा में कुल 1400 बच्चे परीक्षा देने आये थे, मगर उनके लिए न बैठने की व्यवस्था थी, न पंखे की व्यवस्था थी, न लाइट थी और न ही पानी की उचित सुविधा। तेज गर्मी में बच्चे जमीं पर बैठकर परीक्षा देते नजर आये और प्रशासन गहरी नींद में सोता नजर आया जो बेहद शर्मनाक वाकिये के अलावा और कुछ नहीं।

शर्म करे शिक्षा विभाग, बच्चों को बैठाने की कोई व्यवथा नहीं, ना “टाट-न डेस्क”
एसी के कमरों में बैठकर हवा खाने वाले शिक्षा विभाग को शर्म आनी चाहिए कि जिन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उनपर दी गयी है उन बच्चों के साथ भाजपा के शासन काल में अमानवीय व्यवहार से होकर गुजरना पड़ा। एक तरफ पंखे, कूलर और एसी में अधिकारी बैठे थे, वहीं प्राइवेट स्कूलों में सरकारी खर्च पर पढ़ने के सपने पाले हुए बच्चों में से असंख्य बच्चों के लिए डेस्क न होने के कारण भयंकर गर्मी में जमीन पर बैठकर परीक्षा देने के लिए बाध्य होना पड़ा, जबकि कुछ बच्चों को टाट पर बिठाकर परीक्षा दिलवाई गयी। आलम यह था कि परीक्षा शुरू होने का समय अर्थात 10 बजे तक बच्चों के लिए बैठने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी। न रोल नम्बर लिखे गए, न जगह का ही कुछ अता-पता था। परिणामस्वरुप ऐसे कई बच्चे बड़े ही अमानवीय तरीके से परीक्षा देने में बाध्य हुए।
देरी से शुरू हुई परीक्षा और अभिभावकों के साथ धक्का मुक्की
^ बता दें कि गलत और अव्यवस्था के कारण बच्चों की परीक्षा देरी से शुरू करनी पड़ी। तकरीबन 10 मिनट देरी से शुरू हुई परीक्षा ने न केवल शिक्षा विभाग की पोल खोली। बता दें कि जब प्रशासन को पता था कि अभिभावक आएंगे तो उनके लिए भी रुकने और बैठने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं थी। पानी की व्यवस्था नहीं, बैठने की व्यवस्था नहीं। इतना ही नहीं जांच अधिकारी की गाड़ी आयी तो गेट पर तैनात पुलिस वालों ने गाड़ी निकालने के लिए अभिभावकों को हटाना शुरू कर दिया, जिससे धक्का मुक्की का माहौल पैदा हो गया था।

8356 विद्यार्थियों ने किया था आवेदन
दूसरी, तीसरी, चौथी, पांचवीं, छठी, सातवीं, आठवीं, नौवीं, दसवीं और 12वीं कक्षाओं के लिए 8356 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। मगर इसमें से 1222 विद्यार्थी परीक्षा से गैरहाजिर रहे, जबकि 7134 परीक्षा में बैठे। अब इन विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम 18 अप्रैल को जारी होगा। 18 अप्रैल को परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद उसके अगले दिन 19 अप्रैल को पहला ड्रॉ निकाला जाएगा। ड्रॉ के जरिये विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए जाएंगे। 22 से 24 अप्रैल तक स्कूलों में दाखिला लिया जाएगा। स्कूल चुनने के लिए विद्यार्थियों से च्वाइस भरवाई गई है। इसके बाद दूसरा ड्रॉ 25 अप्रैल को निकाला जाएगा। 29 अप्रैल से 1 मई तक दूसरे चरण के दाखिले करवाए जाएंगे। उसके बाद भी अगर कोई विद्यार्थी बचेगा तो तीसरा ड्रॉ निकालने पर शिक्षा विभाग विचार करेगा।

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