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हालिया इतिहास भी हो हिंदी फिल्मों में

प्रकाश.के.रे (लेखक, द वायर)

Hisar Today

भारत में इतिहास पर आधारित फिल्में बनाने में अनेक चुनौतियां हैं। एक तो तथ्यों और विवरण को लेकर अलग-अलग राय होने के कारण मुश्किल यह है कि किस पक्ष या आयाम को लेकर कथानक की रचना हो। दूसरी दिक्कत बजट और बाज़ार से जुड़ी आशंकाओं का है। तीसरी कठिनाई यह है कि फिल्म को लेकर कुछ लोग या तबके सवाल उठा सकते हैं और सरकार या फिल्म सर्टिफिकेट देनेवाला बोर्ड की ओर से रुकावट आ सकती है। लेकिन इन अवरोधों का बहाना नहीं बनाया जा सकता है। स्टारडम और ग्लैमर से ग्रस्त बॉलीवुड को कम-से-कम पैसे का रोना नहीं रोना चाहिए। मैंने ऐसा पाया है कि बहुत ज़माने से यूरोपीय टिप्पणीकार कहते रहे हैं कि भारतीयों में इतिहास-बोध की कमी प्राचीन काल से ही रही है।

इस बयान पर आलोचनात्मक या निंदात्मक टीका करना आसान है, पर आज के संदर्भ में ठोस सिनेमाई पहल कर इसका जवाब देना मुश्किल है। खैर, मुझे लगता है उम्मीद पर दुनिया कायम है और बॉलीवुड ने भी अपनी सीमाओं का विस्तार किया है, सो यह अपेक्षा की जा सकती है कि बहुत जल्दी ही हिंदी सिनेमा हालिया इतिहास को वो भी गंभीरता से खंगालना शुरू करेगा।

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