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हर हर मोदी, घर घर मोदी

अर्चना त्रिपाठी | हिसार

हरियाणा लोकसभा चुनाव के आये नतीजों ने भाजपा की ताकत को हरियाणा में बुलंद करने का काम किया है तो वहीं ठीक दूसरी तरफ कांग्रेस की डूबती नैय्या और खत्म होते साम्राज्य की तरफ इशारा कर दिया है। हिसार लोकसभा चुनाव बात करें तो यहां के नतीजे कांग्रेस के लिए इतने दुर्भाग्यपुर्ण रहे कि जमानत बचाना भी कांग्रेस प्रत्याशी भव्य बिश्नोई के लिए मुश्किल हो गया। स्वर्गीय भजनलाल के गढ़ में हिसार को राजधानी बनाने का ख्वाब देख रहे भव्य बिश्नोई की पहली हार किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं। वहीं ठीक दूसरी तरफ विकास और अपने काम को लेकर आगे बढ़ने वाले जननायक जनता पार्टी प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला को दूसरे पायदान में लाकर यह तो दिखा दिया कि इस बार मोदी लहर के सामने मिली हार में दुष्यंत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भाजपा के जाट प्रत्याशी का खामियाजा उन्हें इस चुनाव में भुगतना पड़ा।
सबसे चौंका देने वाली बात यह रही कि इस चुनाव में भजनलाल परिवार के सामने भाजपा ने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस चुनाव में भाजपा ने आदमपुर हलके जो कुलदीप बिश्नोई और भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता है वहां से भी भाजपा ने कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को करारी हार का स्वाद चखाते हुए वहां से कांग्रेस को हराकर सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की। वहीं उचाना में जहां से दुष्यंत को उम्मीद थी वहां से स्थानीय उम्मीदवार, सत्ता और जाट उम्मीदवार होने के नाते दुष्यंत को भाजपा के प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह ने करारी शिकस्त दी। इस चुनावी आकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस के लिए इस बार विधानसभा चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।

मोदी लहर में भाजपा िवजयी
सबसे हॉट सीट कहे जाने वाले हिसार लोकसभा चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद रोचक साबित हुआ। इस बार पैराशूट उम्मीदवार बृजेन्द्र सिंह को जनता ने मोदी के राष्ट्रवाद के मुद्दे पर दिल खोलकर वोट दिया। आकड़े बताते है कि हिसार लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह 5,58,382 वोट मिले, जबकि दूसरे पायदान में रहे जननायक जनता पार्टी प्रत्यशी दुष्यंत चौटाला जिन्हे 2,78,608 वोट मिले जबकि कांग्रेस के सबसे युवा प्रत्यशी भव्य बिश्नोई को 1,76,239 वोटो से तीसरे पायदान में आकर संतुष्ट होना पड़ा। जिसने इस बात को साबित कर दिया कि कांग्रेस के लिए आने वाले समय में हिसार या आसपास के हलके से जीत की उम्मीद करना बेमानी साबित होगी। क्योंकि भाजपा के प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह ने न केवल कांग्रेस के गढ़ आदमपुर, हिसार, कांग्रेस प्रत्याशी भव्य बिश्नोई की माँ रेणुका बिश्नोई के गढ़ हांसी बल्कि दुष्यंत चौटाला के उन गढ़ो में भी सेंध लगाने में कामयाबी पायी जिसमें पहले अच्छी लीड लेकर आयी। उकलाना , उचाना, बरवाला, भिवानी खेड़ा और तो और नारनौंद में भी दुष्यंत के काफी वोट काटने में कामयाबी हासिल की।

राष्ट्रवाद मुद्दे के साथ भाजपा के आगे विपक्ष ढेर
दुष्यंत चौटाला के सामने भाजपा ने जाट उम्मीदवार बृजेन्द्र सिंह को चुनाव में उतार कर नहले पर दहला खेलने का काम किया। बता दें कि जाट उम्मीदवार होने के नाते न केवल जाटों के मत तो विभाजित हुए बल्कि भाजपा के राष्ट्रवाद के मुद्दे के सामने भी दुष्यंत और कांग्रेस प्रत्याशी की एक न चली। इतना ही नहीं जो उम्मीद आम आदमी पार्टी से लेकर शहर में लगाई जा रही थी। उस आम आदमी पार्टी का भी दुष्यंत को नुक्सान उठाना पड़ा। इतना ही नहीं चुनाव के पहले केजरीवाल के थप्पड़ के कारण भी आप पार्टी की धूमिल छवि का नुक्सान भी दुष्यंत को उठाना पड़ा। हिसार टुडे ने पहले ही इस बात का खुलासा कर दिया था कि आप से गठबंधन दुष्यंत के लिए घाटे का सौदा और वही बात सच साबित हुयी।

मोदी के नाम के आगे दुष्यंत का काम ‘फेल’
“ जनमत स्वीकार, हार स्वीकार,
संघर्ष के लिए हम फिर तैयार,
चलते रहेंगे हौसलों के साथ,
दिल में लेकर ताऊ के विचार”
इस पंक्ति के साथ जननायक जनता पार्टी प्रत्यशी दुष्यंत चौटाला ने अपनी हार स्वीकार कर ली। बता दें कि पिछली बार दुष्यंत 31,847 वोटों से कुलदीप को हराकर जीत कर आये थे, मगर इस बार उन्हें भाजपा से करारी हार का सामना करना पड़ा। जानकारों का मानना है कि दुष्यंत को पिछली बार जिन इलाकों से अच्छी लीड मिली थी, वह लीड इस बार 2019 के चुनाव में बेहद कम दिखाई दी। बरवाला, उकलाना, उचाना, बवानी खेड़ा में दुष्यंत को हार का सामना करना पड़ा। साथ ही शहरी इलाकों में भी दुष्यंत को भी आशा के अनुरूप वोट नहीं मिले, जो उनके लिए हार का सबसे बड़ा कारण है।

 

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