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स्वस्थ भारत अभियान के तहत “धनवंतरि ग्रुप” लाईलाज बीमारियों के लिए बना आयुर्वेद का वरदान

अर्चना त्रिपाठी | हिसार
आयुर्वेद एक बहुत बड़ा वरदान है। इस बात को चरितार्थ करते हुए महाराष्ट्र के सतारा जिला के एक छोटे से गांव से स्वस्थ भारत अभियान मिशन की शुरुवात कर धनवंतरि ग्रुप ने अपने प्रोडक्ट के माध्यम से अपने रिजल्ट के बलबूते यह साबित कर दिखाया है कि आयुर्वेद के इस वरदान से लाईलाज बीमारियों को जड़ से उखाड़ फेकने में सफल रहे।
धनवंतरि ग्रुप अपने प्रोडक्ट के साथ देश में 27 राज्यों तक अपना प्रचार प्रसार कर चुका है। इतना ही इन आयुर्वेदिक दवाइयों के नतीजों के बलबूते आज धन्वंतरि प्रोडक्ट की विदेशों में भी मांग बढती जा रही है। कॉफी विद हिसार टुडे में आज मिलिए डॉ पाटिल की इस मजबूत पहल को आगे ले जाने वाले धन्वंतरि ग्रुप में कार्यरत सुपर एग्जीक्यूटिव (डायमण्ड स्तर) पद पर कार्यरत धनसुक महावार से।
सोराइसिस से पीड़ित दोस्त की जिंदगी बदलते देख धनवंतरि से जुड़ने का लिया फैसला
नौ सालों से कार्यरत धनसुक महावार का धन्वंतरि ग्रुप से जुड़ने का मुख्य कारण है कि यह प्रोडक्ट ऐसी लाईलाज बीमारियों के लिए वरदान बनकर साबित होता है। गुजरात में मेरे एक खास दोस्त मंजीत सिंह इनको सोराइसिस हुआ था। जिसका उन्होंने काफी जगह इलाज करवाया मगर नतीजा शून्य रहा। इतना ही नहीं काफी समय से चले आ रहे इलाज में उनके लाखों रूपए तक लग गए।
मगर जब उन्होंने धन्वंतरि इम्यूरिच कैप्सूल का सेवन किया उनकी बिमारी उड़नछू हो गई। मैंने 2-3 सालों से अपने दोस्त को तड़पते देखा था, मगर अचानक हुए इस बदलाव से मुझे लगा कि यह आयुर्वेद का वरदान बनकर उनके दोस्त के लिए साबित हुआ है। इसलिए वह इस ग्रुप से जुड़े और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के सफर में वो आगे निकल गए।

स्मूथ रिच पाउडर से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास
बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए जहां “स्मूथ रिच पाउडर बच्चों के लिए अधिक गुणकारी साबित हुआ है। वहीं ठीक दूसरी तरफ इस पाउडर के सेवन से न केवल बच्चों का पढ़ाई में ध्यान बल्कि परीक्षा में भी बच्चों को अच्छे अंक आने का भी भरोसा धनसुक महावार को है।

ग्रीन रिच कैप्सूल और कैटल रिच कैप्सूल ऑर्गनिक खेती और पशुओं के लिए वरदान
हवा, पानी और खुराक यह तीन मामले है जिसको लेकर डॉ पाटिल ने काफी काम किया। आजकल खेती में कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। जिसको खाने से बहुत बड़ी मात्रा में खेतों से निकलकर जहर इंसानो के अंदर जा रहा है और वह बीमार पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ रिसर्च में इस बात का भी पता चला है कि कई बार मां के दूध में भी डीटीएच पाए गए हैं। इसीलिए ऑर्गनिक खेती को बढ़ावा देते हुए डॉ पाटिल ने काफी रिसर्च कर धनवंतरि ग्रुप ने “ग्रीन रीच कैप्सूल” का इजात किया है। हरे प्रोडक्ट ऑर्गनिक है या नहीं इसे साबित करने के लिए हम इसे पी कर भी बता सकते हैं। इतना ही नहीं पशुपालन पर भी डॉ पाटिल का ध्यान गया। उन्होंने सोचा अगर जानवर/पशुओं का ख्याल रखेंगे तो उनसे जानवर/पशुओं का दूध अच्छा आएगा, बीमारिया नहीं होंगी और जल्दी बांझपन नहीं होगा। इसके लिए “ कैटल रिच” प्रोडक्ट लेकर आए हैं।

पीएम नरेन्द्र मोदी स्वच्छ अभियान और डॉ पाटिल चला रहे हैं “स्वस्थ अभियान”
गुजरात से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आसाम, मणिपुर, नागालैंड, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में धनवंतरि का प्रचार प्रसार किया है। आज यह देश मे 27 राज्य कवर कर चुका है। जिस प्रकार गुजरात से देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन पीएम मोदी जी स्वच्छ भारत अभियान को आगे ले जा रहे हैं। उसी प्रकार डॉ पाटिल एक छोटे से सातारा डिस्ट्रिक्ट से निकलकर स्वच्छ भारत अभियान को गति देने का काम कर देश को स्वस्थ बनाने की दिशा में अपना दायित्व निभा रहे हैं।

डिटॉक्सिफिएड कैप्सूल आयुर्वेद का नया वरदान
आजकल का खान-पान-हवा भी हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचाते हैं। हवा से जहर शरीर के अंदर चला जाता है, जो शरीर में ऑर्गन डैमेज करता है। इससे व्यक्ति आगे जाकर कमजोर बनता है। ऐसे डैमेज ऑर्गन को रिपेयर करने का काम डिटॉक्सिफिएड कैप्सूल करता है। जिसके बाद इंसान स्वस्थ जीवन व्यतीत करता है। इतना ही नहीं शरीर के अंदर की गन्दगी बाहर निकाल कर उसे शरीर को साफ करने का काम यह कैप्सूल करता है जो किसी आयुर्वेद के वरदान से कम नहीं।

भारत में गोपीयुष मूवमेंट को लाने वाले हैं “डॉ पाटिल”
डॉ पाटिल गोल्ड मेडलिस्ट एमडी डॉक्टर होते हुए भी उन्होंने सतारा महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से धनवंतरि ग्रुप की शुरुवात की थी। वहां पर उन्होंने लोगों के लिए काम करना शुरू किया। उन्होंने देखा कि लोग कितने बीमार पड़ रहे हैं। जिस बात की चिंता से उन्होंने कुछ नया खोज करने की ठानी और इस बिमारी को रोकने के लिए उन्होंने रिसर्च शुरू किया। रिसर्च में उन्होंने पाया कि गाय के पहले दूध में कितने फायदे हैं। जैसे मां के पहले दूध की ताकत है वो ताकत उन्होंने गाय के पहले दूध में पायी और भारत में पहली बार अपनी खोज गोपीयुष के साथ लोगों के सामने आए। भारत में गोपीयुष मूवमेंट को लाने वाले “डॉ पाटिल” हैं।

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