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“साईलेंट वोटर्स” एग्जिट पोल का बिगाड़ेंगे गणित

दावा है कि हिसार से अपने बृजेन्द्र सिंह जीत कर आएंगे

HISAR TODAY
महेश महता | हिसार
जब से टीवी चैनल में सभी एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में जातें दिखाई दे रहे हैं, तभी से भाजपा वाले हवा में उड़ रहे हैं। इनके नेताओ का यह भी दावा है कि हिसार से अपने बृजेन्द्र सिंह जीत कर आएंगे। वैसे एग्जिट पोल की इस खबर से मुसीबत भी बनी हुई है विपक्ष की। कुछ लोगों ने अपनी हार स्वीकार कर ली, तो कुछ काफी दिनों से ब्रेक पर चल रहे हैं। कुछ प्रत्याशी फोन के जरिये यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरी पार्टी में क्या खबर चल रही है।
वैसे मेरा मानना है कि इस बार के वोटर में जो उत्साह 2014 में दिखाई दिया था इस बार के वोटर्स में बड़ा ही संन्नाटा छाया हुआ था। इसलिए इसका सही आकलन लगाना मुश्किल है कि वोटर्स ने किसे चुना। यह साइलेंट वोटर ही है जिन्होंने कई चुनावों में जीत का गणित बिगाड़ा और बनाया है।
क्योंकि उस दिन का अलग सन्नाटा 12 बजे तक काफी इलाकों में दिखाई दिया था। इसलिए यह पता लगाना कि उनका वोट किसे गया किसे नहीं यह आज तक पार्टी आकलन नहीं लगा पा रही है। क्योंकि यह सभी जानते है कि इस बार लोकसभा चुनाव में काफी मतदान केन्द्रों के पास भाजपा के कार्यकर्ता दिखाई नहीं दिए थे। जो उत्साह मेयर चुनाव में हिसार की भाजपा टीम में था वो लोकसभा में मिसिंग था।
मगर हां बात तो मोदी की थी मगर बृजेन्द्र की नहीं। मतदाता के लिए भाजपा मतलब मोदी न कि बृजेन्द्र। पैराशूट उम्मीदवार, मतदाताओं से अनभिज्ञता, राजनीतिक विरासत का ठप्पा, बीरेंद्र सिंह के तल्ख तेवर, भाजपा प्रत्याशियों का विरोध। यह सभी बातें साबित करती हैं कि इस बार जो साइलेंट वोटर है वही करिश्मा करेंगे। हो सकता है यह साइलेंट वोटर कांग्रेस से हटकर भाजपा या भाजपा से हट कर जजपा या इनेलो से हटकर भाजपा के खेमे में चले गए हों।
इस बार जो हिसार में माहौल दिखाई दिया उसने यह तो साबित कर दिया कि सभी के मन में अब भी असमंजस है कि भाई जीतेगा कौन? जीत के दावे करने में भाजपा ने एक पल की भी देरी न लगाई और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लगे हाथो इन्ही एग्जिट पोल के आधार पर अपने जीत के दावे कर दिए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हमने पहले ही कहा था नरेंद्र मोदी देश के एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे। भाजपा को जनता का प्यार मिला है और एग्जिट पोल ने उस पर मुहर भी लगाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 10 की 10 सीटें भाजपा जीतेगी। मगर भाजपा के इस उमंग में पानी फेरने में विपक्ष भी कहां पीछे है उसने तो मतदान के बाद आए एग्जिट पोल को एक सिरे से ही नकार दिया। जिस तरह के नतीजे हरियाणा को लेकर दिखाए जा रहे हैं, अगर ऐसा ही चुनाव परिणाम आता है तो पूरे विपक्ष को नये सिरे से अपनी रणनीति तय करनी पड़ेगी।
2014 से भी अधिक लोकसभा की सीटें भाजपा हरियाणा में जीतती है तो इससे विरोधियों का मनोबल गिरना स्वाभाविक है। प्रदेश में लोकसभा की 10 सीटों को लेकर एग्जिट पोल के अलग-अलग नतीजे हैं। कुछ सर्वे एजेंसियां दिखा रही हैं कि राज्य में भाजपा सभी 10 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। वहीं कुछ का कहना है कि 7 से 8 भाजपा और 2 से 3 सीटों पर कांग्रेस जीत हासिल कर सकती है।
कुछ न्यूज चैनल 8-2 का आंकड़ा बता रहे हैं यानी 8 भाजपा और 2 कांग्रेस। हालांकि इन एग्जिट पोल ने हरियाणा में विपक्षी दलों की नींद भले ही उड़ा दी हो। मगर वह यह मानाने को राजी नहीं कि भाजपा यहां से सभी 10 सीटें जीत जायेंगी। लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बल पर खुद को जीत के बेहद करीब मानकर चल रहे राजनीतिक दलों में एग्जिट पोल रिपोर्ट के बाद मंथन का दौर शुरू हो गया है। अगर चुनाव परिणाम एग्जिट पोल रिपोर्ट के अनुकूल आ जाते हैं तो हरियाणा के चुनावी रण में उतरे सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी बज जायेगी।
इन एग्जिट पोल के अनुसार अगर 10 सीट पर भाजपा फतह करती है तो हरियाणा में कांग्रेस मुक्त करने में भाजपा कोई को कसर नहीं छोड़ेगी। आगामी विधानसभा में भाजपा लोकसभा जीत के बाद माहौळ को अपने पक्ष में रखेगी और हो सकता है मतदाताओं के दिमाग में भाजपा ही भाजपा छायी रहे और विधानसभा में कांग्रेस के दिग्गजों को हराने में भाजपा अपनी नई रणनिति के तहत उतरे।
वैसे आपने गौर किया होगा कि कांग्रेस पार्टी पिछले पांच साल से प्रदेश में होने वाले लगभग सभी चुनाव हारी है। जींद उपचुनाव, मेयर चुनाव हो। हर जगह कांग्रेस को हार का मुँह देखना पड़ा। कांग्रेस के लिए शर्मनाक वाक्य तब और था जब 3 राज्यों में कांग्रेस की जीत के बावजूद हरियाणा में कांगेस मेयर का एक चुनाव भी जीत क्या अपना खता भी नहीं खोल पाई। अगर एग्जिट पोल सही साबित हुआ तो मतलब साफ है कांग्रेस को एकजुट करने में गुलाम नबी आजाद कामयाब नहीं हुए।
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