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सट्टा बाजार में पहली पसंद ‘भाजपा’ मगर फिर भी क्यों है भाजपा को हिसार में टेंशन

Hisar Today

  • शहरी वोट भाजपा के खाते में मगर ग्रामीण वोट में दुष्यंत का दबदबा

  • कांग्रेस को एकजुट करने में हुई देरी से भाजपा को न हो जाए फायदा

    अर्चना त्रिपाठी | हिसार

    हरियाणा लोकसभा चुनाव इस बार बेहद रोचक रहा है, मगर मतदान होने के बाद भी 23 तारीख तक सभी पार्टियों में चिंता बरकरार है। मगर इन सब चीजों से दूर भारतीय जनता पार्टी को यह लगता है कि इस बार भी मोदी लहर का उन्हें फायदा मिलेगा। मगर जब से सट्टा बाजार में भाजपा सभी की पहली पसंद बनी हुई है, तभी से भाजपा के प्रत्याशी बहुत ज्यादा निश्चिन्त नजर आ रहे हैं। हर तरफ ओपिनयन पोल में भी सभी भाजपा की जीत सुनिश्चित बता रहे हैं। मगर 3 जगहों पर भाजपा का पेंच फसा है पहला हिसार, दूसरा सोनीपत और तीसरा रोहतक। हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनको विश्वास है कि पूरी सीट भाजपा के पाले में आएगी। मगर दूसरी तरफ 23 के नतीजों के पहले विभिन्न कोंग्रेसी नेता चुनाव में धांधली की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने इस चुनावी प्रणाली पर संदेह की स्थिति भी पैदा कर कर दी है।

    सट्टा बाजार में छाया “मोदी-मोदी”

    गौरतलब बात है कि हरियाणा में भाजपा के अधिकतर प्रत्याशियों को जनता के विरोध का सामना करना पड़ा था। खराब ट्रैक रेकॉर्ड और सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन का शिकार हुए रतनलाल कटारिया और रमेश कौशिक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मोर्चा बंदी कर के इन प्रत्याशियों के काम गिनाने लगे। अमित शाह द्वारा राज्य के सभी छोटे-बड़े किसानों को 6000 सालाना देने की घोषणा करनी पड़ी, उससे हरियाणा की आबोहवा जरूर बदली। यही कारण है कि 12 तारीख के बाद भाजपा के तमाम प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का गुणगान करते हुए यह आशा कर रहे हैं कि इस बार भी मोदी के सहारे ही उनकी नैय्या पार होगी। यही कारण है कि इन दिनों सट्टा बाजार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सभी का “फेवरेट” बताया जा रहा है।

    हिसार में दुष्यंत चौटाला से भाजपा की टक्कर से भाजपा के लिए “मामला सस्पेंस”

    बता दें कि माना जा रहा है कि भाजपा के नेता बड़े विश्वास के साथ कह रहे हैं कि उनकी जीत सुनिचित है। मगर हकीकत तो यह है कि वह खुद भी दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि मामला इतना भी सरल नहीं। इसका साफ मतलब है कि गांव और शहरी इलाकों के वोटों के कारण मामला बेहद पेंचीदा मना जा रहा है। भाजपा जानती है कि दुष्यंत चौटाला के प्रभाव से 4 हल्के उनकी जीत की राह आसान कर सकते है। वो है उचाना (70.50%), नारनौंद (72.46%), उकलाना (72.20%) और बरवाला (74.41%), हालांकि यह बात भी सही है कि दुष्यंत को शहरी इलाको जैसे हिसार, हांसी, कुलदीप बिश्नोई के गढ़ आदमपुर, नलवा, भवानी खेड़ा में भाजपा और कांग्रेस बढ़त बनाये हुए है। हालांकि दुष्यंत चौटाला के पक्ष में गांव से आये वोट भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

    कांग्रेस के वोट भाजपा की तरफ होंगे ट्रांसफर

    इस चुनाव में कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा को कड़ी चुनौती देने में कामयाबी हासिल की है। मगर माना जाता है कि पिछले कुछ सालों में कांग्रेस की कम सक्रियता और गुटबाजी का खामियाजा इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को हो सकता है। क्योंकि इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इन कुछ वर्षो में कांग्रेस के अधिकतर वोट भाजपा की तरफ ट्रांसफर हुए हैं। अगर इस बार भी यही हुआ तो कांग्रेस का जीत का समीकरण बिगाड़ने में भाजपा कहीं न कहीं कामयाब होगी। इतना शहरी इलाको में भाजपा का जिस प्रकार डंका बजा वो भी भाजपा को चुनाव में मदद दिलाने का काम करेगा।

    इनेलो की हो सकती है जमानत जब्त

    वैसे कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस चुनाव में हरियाणा की एकमात्र क्षेत्री पार्टी इनेलो के लिए यह चुनावी नतीजे कोई शुभ संकेत नहीं लेकर आ पाएंगे। हो सकता है कि इनेलो नेता अभय चौटाला ने सुरेश कौथ को चुनावी मैदान में उतारा मगर चुनाव आया और गया मगर सुरेश कौथ की कहीं उपस्थिति दिखाई नहीं दी और न ही कोई बड़ी चुनावी प्रचार सभा। इसलिए कहा जाता है कि जिन ताऊ देवीलाल के नाम पर अभय चौटाला इस पार्टी को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, मगर यह तय माना जा रहा है कि जननायक जनता पार्टी के बनने के बाद इनेलो का अधिकतर वोटबैंक जजपा की तरफ शिफ्ट हुआ है। यही कारण है कि ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव में आने वाले नतीजों के साथ इनेलो की जमानत जब्त हो जायेगी।

    आदमपुर में अधिक वोटिंग भव्य को दिलाएगी राहत

    अगर कांग्रेस के वोट भाजपा अपने तरफ मोड़ने में भाजपा अगर कामयाब होती है, मगर आदमपुर जो भजनलाल परिवार का गढ़ है उसे भेदने में भाजपा शायद असफल बनकर साबित हो क्योंकि हिसार जिले में सबसे ज्यादा वोटिंग आदमपुर में हुई और अगर आदमपुर का प्यार पाने में भजनलाल परिवार इस चुनाव में कामयाब रहा है तो 23 के नतीजे कांग्रेस को बल देने का काम करेंगे।

    रणबीर गंगवा बनेंगे भाजपा के तारणहार , मगर दुष्यंत ने भी लगाई सेंध

    इनेलो से भाजपा में शामिल रणबीर गंगवा के मामले में कहा जाता है कि भाजपा को चुनाव में बढ़त दिलवाने में रणबीर गंगवा की अहम भूमिका रहेगी। जिसके चलते जहां इनेलो को चुनाव में नुक्सान, वहीं भाजपा को फायदा पहुंच सकता है। हालांकि माना जा रहा है कि नलवा में इनेलो के काफी बड़ा वोट बैंक दुष्यंत की तरफ मुड़ा है जिसका फायदा भी इस चुनाव में दुष्यंत को होगा।

    हांसी में मामला बराबरी पर

    माना जा रहा है कि कांग्रेस के लिए इस बार हांसी में थोड़ी मुश्किल जरूर होगी क्योंकि इस बार हांसी से सभी पार्टी को बराबर मत मिले हैं। यानी वहां एक तरफा वोट किसी एक पार्टी को न जाकर सबमे बराबर बटें है।

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