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वंशवाद खत्म कर स्वच्छ राजनीति देना मेरा मकसद : सांसद प्रत्याशी विकास गोदारा

Hisar Today 

  • डॉ सुभाष चंद्रा राजनीतिक गुरु, उनसे और डॉ कमल गुप्ता से मागूंगा समर्थन

  • चांदी का चम्मच मुंह में लिए लोग आ चुके हैं राजनीति में

  • बृजेन्द्र सिंह को टिकट मिलना कहीं सौदेबाजी तो नहीं

  • भव्य अनुभवहीन, नहीं लगता कि मिलेगी टिकट

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

जो अपने कदमों की काबलियत पर
विश्वास रखते हैं,
वो ही अक्सर मंजिल पर पहुंचते हैं …

इसी बता को चरितार्थ करते हुए गए 10 वर्षों से जम्भशक्ति नामक गैर सरकारी संस्था के माध्यम से जनता की सेवा कर हिसार की जनता का हमेशा आशीर्वाद और स्नेह उनके ऊपर बना रहा। इस एनजीओ के माध्यम से उन्होंने न केवल गोबर गैस प्लांट खोलकर किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध करवाए, बल्कि पशुओं के लिए भी उन्होंने काम किया। उन्होंने अपने प्रयत्नों के माध्यम से युवाओ में विभिन्न स्किल का प्रशिक्षण दिया, बल्कि उनके जीवन को नयी दिशा और दशा दी। यही कारण है कि बहुत ही कम समय में उन्होंने जनता का प्यार और विश्वास जीतकर समाज में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। अपने शुभचिंतको के इसी प्यार और विश्वास के दम पर इस बार हिसार लोकसभा क्षेत्र में निर्दलीय तौर पर बहुचर्चित समाजसेवक विकास गोदारा चुनावी रणसंग्राम में कूद चुके हैं।
फतेहाबाद के एमएम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के दौरान विकास गोदारा छात्र संघर्ष समिती के प्रधान रहते हुए छात्रों के साथ हो रहे अन्याय और उन्हें उनका हक दिलवाने की लड़ाई उन्होंने बखूबी लड़ी और इसी के साथ वह समाज के ज्वलनशील मुद्दों को लेकर बेहद सक्रीय रहे।
इतना ही नहीं डॉ सुभाष चंद्रा के साथ टीम चंद्रा का मुख्य हिस्सा रहे विकास गोदारा ने 2014 को भाजपा के प्रत्याशी डॉ कमल गुप्ता के लिए भी जमकर प्रचार का काम किया। इसी दौरान उनकी सक्रीय राजनीति में एंट्री हुयी। परन्तु आज जिस प्रकार से राजनीति में वंशवाद, पैसों की लूट-खसोट और अनुभवहीन लोग चुनाव में आ रहे हैं, उसने राजनीति को निचले दर्जे का बना दिया है। इसलिए इसी सब विचारों को बदलने और एक स्वच्छ राजनीति के माध्यम से हिसार का विकास करने के ध्येय के साथ विकास गोदारा ने हिसार लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। आज कॉफी विद हिसार टुडे में हम मिलते हैं कर्तव्यनिष्ट, जुझारू, युवा सोच और जोशीले अंदाज वाले समाजसेवक “विकास गोदारा” से।

भव्य को यह नहीं पता राजधानी बनाता कौन है, यह काम राज्य का है, सांसद का नहीं
सपोर्ट उसे किया जाता है जिसमें दम हो, भव्य बोलते हैं कि मैं हिसार को राजधानी बना दूंगा, मुझे यह समझ नहीं आता, मैंने जहां तक पढ़ा है राजधानी बनाने का काम एमपी का नहीं होता, यह राज्य के अंतर्गत आता है। मुझे लगता है कि 12 तारीख को केंद्र के लिए सांसद के लिए वोट पड़ना है न कि विधायक के। इतना ही नहीं मैंने तो आज तक कभी नहीं देखा कि बतौर विधायक कुलदीप बिश्नोई या रेणुका ने हिसार को राजधानी बनाने को लेकर कभी आवाज उठायी हो। यह सिर्फ बरगलाने का काम कर रहे हैं।

हिसार में रोजगार के साधन नहीं
हिसार में रोजगार के साधन नहीं हैं, अगर फैक्ट्री या प्रोसेंग यूनिट लगाते, उद्योग लाते तो आज यहां रोजगार के साधन उपलब्ध होता, मगर मुझे अफसोस है कि यहां के लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध करवाने में यहां के अब तक नेताओं ने कुछ काम नहीं किया।

जो मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ वो क्या करेगा विकास
चौधरी भजनलाल ने राजनीति में जो संघर्ष और पीड़ा सही, वो कुलदीप बिश्नोई ने नहीं देखी। भव्य भाईसाहब तो उससे कोसों दूर रहे, जिंदल का ही उदाहरण लेलें, ओपी जिंदल ने अपने आपको को साबित किया, मगर उसके बाद नवीन जिंदल मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए, उनको जनता से मतलब नहीं। अब चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे को ही ले लीजिये बेटा आईएएस की नौकरी कर रहा था, वो भी मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए क्योंकि उनको बिना काम किये सीधे टिकट मिल गयी। यह तमाम उदाहरण बताते हैं कि आज राजनीति में जमीन से जुड़े लोग नहीं, बल्कि विरासत में मिली सत्ता का सुख भोग रहे लोग हैं, जिनको जनता से कोई सारोकार नहीं। मेरा मानना है कि जनता से जुड़ा व्यक्ति ही आम लोगों का विकास कर सकता है और मैं हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करता आया हूं।

गन्दी राजनीति से बाहर निकालकर हिसार की जनता को स्वच्छ राजनीति देना मकसद

डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने जब सविधान बनाया था तब उस दौरान उन्होंने चुनाव लड़ने का कुछ पैमाना तय किया था, मगर आज सभी नियमों को ताक पर रखते हुए चुनाव में हर प्रत्याशी पैसा पानी की तरह बहा रहा है, लूट खसोट की राजनीति चल रही है, चुनाव बेचे या खरीदे जा रहे हैं, अनुभवहीन लोग सत्ता की कुर्सी के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, परिवारवाद राजनीति में चरम तक पहुंच चुका है। आम आदमी को गुलाम बनाने के लिए और आम आदमी कभी चुनाव न लड़ पाए इसलिए कुछ पोलिटिकल पार्टी ने एक गैंग बना रखी है, वह चाहती है कि आम आदमी कभी उपर न आ पाए। इसके लिए चुनाव महंगा बना दिया जाए। ऐसे गैंग ने झूटी हमदर्दी और खुद को प्रमोट कर बरसाती मेंढक की तरह आये, राजनीति का सुख भोगा उसके बाद इन नेताओं ने कभी जनता को नहीं पूछा। ऐसे में इस गन्दी राजनीति से जनता को बाहर निकालने और एक स्वच्छ राजनीति की शुरुवात करने के मकसद से मैंने इस बार हिसार लोकसभा सीट से अपनी ताल ठोकी है। 10 साल से समाजसेवा करते हुए मैंने बिना पद, बिना रसूख, बिना गॉड फादर समाज के लिए बहुत कुछ किया है। यही कारण है कि चुनाव को सरलीकरण अर्थात सस्ता और स्वच्छ बनाने के लिए मेरे शुभचिंतकों ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए आग्रह किया और इसलिए जनता के प्यार और विश्वास के बलबूते मैंने इस बार चुनाव में खड़े होने का निर्णय लिया है।

हिसार को ऐसे सांसद की जरुरत जो मोदी का सपना साकार करे

बृजेन्द्र सिंह 26 साल के उम्र में आईएएस बने। वो इस पद पर रहते हुए बहुत कुछ कर सकते थे, मगर पता नहीं सत्ता का ऐसा लालच उनको क्यों आया कि अपनी लंबी पारी छोड़कर 5 साल के लिए सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। यह सब सिर्फ सौदेबाजी है। भाजपा के वो लोग जो मंच में दरी बिछाने का काम करते थे उनको कभी मंच में भी जगह नहीं मिलती। विकास गोदारा ने पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि देश को आज मोदी की जरुरत है और मैं उनसे बहुत प्रभावित हूं मगर हिसार को ऐसे आदमी की जरुरत है जो मोदी के सपने को साकार करे। आपको ज्ञात होगा कि बीरेंद्र सिंह हमेशा बोलते हैं कि मुझमें सीएम की टिस है, अगर जिनको सीएम बनने का ख्वाब है वो जनता की सेवा क्या करेगा। प्रेमलता ने तो खुद कहा हिसार का जाट कम समझदार है और सोनीपत का जाट ज्यादा समझदार है। तो फिर हिसार के जाटों के लिए फिर क्या करोगे? मोदी के पास बहुत गुणी आईएएस अफसर थे मोदी उनको दे देते टिकट, मगर नहीं बृजेन्द्र को टिकट देने का मतलब है कि इसमें बहुत बड़ी सौदेबाजी हुयी है। उनको बस उनके पिता के कारण टिकट मिली है खुद की योग्यता पर नहीं।

सर्वे करवा लो दुष्यंत ने हिसार में गिनती के चार काम भी नहीं करवाए
दुष्यंत चौटाला की पारिवारिक टक्कर इतनी ज्यादा है कि मुझे टक्कर लेने की जरुरत नहीं। दुष्यंत चौटाला सांसद रहते हुए मृदभाषी और सभी का आदर सम्मान देने वाले नेता हैं, मगर मुझे नहीं लगता कि उन्होने कोई खास काम किया है। लोगों से आप सर्वे करवा ले, हिसार के कोई 4 काम बताएं जो उन्होंने किये। वो सिर्फ प्रोपोगैंडा करते हैं। दुष्यंत थ्रेशर में गेहूं काट रहे थे मुझे बताइये ऐसा कौन सा जमींदार जो 5000 का कुर्ता-पायजामा डाल के गेहूं निकालता है? मैं किन लोगों से टक्कर लूं जो अपने कर्मों की मार खुद मर जाएंगे।

कुलदीप बिश्नोई की राजनीति हो चुकी है समाप्त

मेरी टक्कर मैं किसी से नहीं मानता। क्योंकि बृजेन्द्र सिंह को मैं गिनती में ही नहीं लेता। क्योंकि वो तो बस फाइल नीचे से आती थी उस पर हस्ताक्षर करते थे, उन्होंने कोई बड़ा काम नहीं किया। जबकि मैंने तो जनता के बीच रहकर जनता के लिए काम किया है। वहीं अब तक भव्य को तो टिकट ही नहीं मिला तो वो मेरे सामने चुनौती में हो ही नहीं सकता, मुझे तो उसको टिकट मिलने में भी संशय है। क्योंकि पुत्र मोह में कुलदीप फंस गए हैं। भव्य के पास एक तो अनुभव नहीं था उन्होंने बावजूद इसके सांसद का टिकट मांग कर हंसी के पात्र बन गए हैं। आज कांग्रेस में महज सौदेबाजी है। हजकां में जब थे तो उनके पांच विधायक चुनकर आये मगर कुलदीप सौदेबाजी में इतना व्यस्त थे कि पीछे से उन्हें कोई और ले गया उनके विधायक। मेरा मानना है कि कुलदीप की राजनीतिक हत्या हो चुकी है। वह खत्म हो चुके हैं राजनीती में अब बस वह अपना वजूद बचाने के लिए कभी इस दर तो कभी उस दर जा रहे हैं।

जनता से अपील
पेरिस नहीं बनाऊंगा बल्कि मैं वंशवाद की गुलामी से मुक्ति दिलवाने का काम करूंगा। जनता से मैं कहूंगा कि यह लोकतंत्र का महापर्व है आप किसी को भी वोट दे मगर मतों के अधिकार का प्रयोग जरूर करें। मैं तो कहूंगा मुझे परखो, अब तक आप जनता शोषण का शिकार रही, सभी राजनितिक दलों ने आपके साथ खिलवाड़ किया, मगर मैं आपको इससे निजात दिलाने का काम करूंगा। आपके बीच रहूंगा और सिर्फ आपके लिए काम करुंगा।

 

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