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राहुल ने कहा सभी दिग्गज लड़ें या गठबंधन करें!

महेश मेहता | हिसार टुडे
सुना है महागठबंधन को अपने कांग्रेस के वो नेता राजी नहीं थे जिनके ऊपर अक्सर सीबीआई की रेड पड़ा करती थी। सुना है कि की महाशय गठबंधन को तैयार नहीं थे। जबकि आम आदमी पार्टी नेता अरविन्द केजरीवाल मोदी को हारने के लिए कांग्रेस और जजपा से बार बार गठबंधन की बात कर रहे थे।
जब आप और जजपा की संयुक्त प्रेस कॉनफेरेन्स हुयी तब भी आप सूत्रों ने कहा महागठबंधन हो गया है। मगर जजपा नेता दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से इंकार कर सभी खबरों को बेबुनियाद करार देकर अपने 4 प्रत्याशियों के नामो की घोषणा कर दी।
कांग्रेस से गठबंधन की बात से इंकार करने के पीछे माना जाता है कि दुष्यंत यह दिखाना चाहते थे कि जब महागठबंधन की चर्चा हो तो उनसे भी सामान रूप में चर्चा की जाए। यही कारण है कि जजपा ने कांग्रेस से गठबंधन से इंकार कर अपने 4 प्रत्याशियों के नामों का एलान भी कर दिया।
मगर राहुल गाँधी कांग्रेस के कोर कमेटी के इस फैसले से काफी नाराज नजर आये है। क्योंकि राहुल हो हरियाणा से अधिक सीटें जितनी है इसलिए वह खुद चाहते है कि दिल्ली के साथ हरियाणा में महागठबंधन को मुहर लगे, मगर हरियाणा में इस फैसले के सामने कवाब की हड्डी के तरह थे अपने हुड्डा साहब।
राहुल इस हद्द तक नाराज थे कि एक तो उन्होंने यह तक कह दिया था कि एक तो पार्टी सेदिग्गज चुनाव लड़ने के लिए आगे नहीं आ रहे ऐसे में भाजपा से अकेले जितना उनके बस की बात नहीं होगी। वैसे अगर राहुल के गुस्से के बाद पार्टी महागठबंधन कर लेती है तो सवाल यह उठ खड़ा होता है कि ऐसी सूरत में कुलदीप का क्या होगा ? उनके बेटे भव्य का क्या होगा ?
बता दें की कुलदीप बिश्नोई ने स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें राहुल गाँधी ने भरोसा दे दिया है कि वह अपने बेटे के साथ प्रचार में उतर जाए। इतना ही नहीं कुलदीप ने यह भी कहा था कि राहुल ने भव्य के नाम पर हामी भर दी है।
ऐसे में सवाल यह उठखडा होता है कि आज 2 बजे दुष्यंत चौटाला हिसार लोकसभा क्षेत्र से नामांकन पर्चा दाखिल करने वाले है ऐसे में अगर महागठबंधन हो जाता है तो कुलदीप को यह सीट अपने हाथो से गवानी पढ़ सकती है। क्यूंकि जजपा उम्मीदवार दुष्यंत चौटाला तो यहां से नामांकन पर्चा भर चुके होंगे।
इसका अर्थ यही है कि हो सकता है कि कुलदीप को दुबारा कांग्रेस की दगाबाजी का सामना करना पड़ सकता है। बता दे कि इन दिनों अपने हर प्रचार सभाओ में कुलदीप बिश्नोई और उनकी पत्नी जजपा के खिलाफ अनाप शनाप बयानबाजी करते आ रहे है। ऐसे में अगर दुष्यंत को उन्हें समर्थन देना पड़े तो वह क्या करेंगे।
बता दें कि भव्य बिश्नोई को राजनीति में उतारने के लिए कुलदीप बिश्नोई बेहद गंभीर है . इतना ही नही खुद भव्य बिश्नोई बड़े जोशोखरोश के साथ धुप में पसीने बहा आहे है। वह चाहते है कि इस चुनाव के साथ वह राजनीति में अपने पाँव पसार ले, मगर क्या यह मुमकिन हो पायेगा ? क्या महागठबंधन की तलवार में उनके मंसूबो पर पानी फिर जाएगा ?
फिलहाल इस बात पर अभी कोई कुछ नहीं कहना चाहता। 23 तारीख को नमानकन परचा भरने की आखिरी तिथि है। इतना ही नहीं महागठबंधन के चर्चाओं को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा दिल्ली और हरियाणा में रोक दी।
इतना ही नहीं जो प्रत्याशी आज दिल्ली में नमानकन पर्चा भरने के लिए जाने वाले थे उन्होंने भी नामांकन परचा भरने की तारीख पोस्टपोंड कर दी है। देखते हैं कि क्या यह महागठबंधन परवान चढ़ता है ? और अगर चढ़ा तो कुलदीप और उसके बेटे भव्य का क्या होगा? यह तो आने वाला समय बताएगा ? अगर ऐसा होता है तो दो राजनीतिक दुश्मन क्या दोस्त बन पाएंगे?
क्या दुष्यंत और कुलदीप हाथ मिला पाएंगे? यह भी बस कयास लगाया जा सकता है। खैर राजनीति है ही ऐसी जिसके बारे में महज कयास लगाए जा सकते है।
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