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राजनीति में परिपक्वता की तरफ भव्य बिश्नोई के बढ़ते कदम

Hisar Today 

  • चौ. भजनलाल की तरह भव्य गढ़ रहे अपनी छवि स्वयं

  • अगर समय पर टिकट की होती घोषणा तो माहौल होता अलग

  •  भव्य के पीछे युवा ताकत

महेेश मेहता | हिसार
कहते हैं कि अगर सत्ता चांदी के चम्मच में मिले तो उस सत्ता की कोई अहमियत नहीं, मगर जब सत्ता पाने के लिए कठिन परिश्रम कर खुद के दम पर हासिल करनी पड़े तो उस सत्ता का स्वाद लाजवाब होता है। “भव्य बिश्नोई” जिनके बारे में अब तक लोग उन्हें राजनीति के कच्चे खिलाड़ियों में गिना करते थे मगर आज भव्य बिश्नोई ने जिस प्रकार से हर चुनौतियों का सामना कर इन कुछ दिनों में अपना दमखम दिखाने की कोशिश की है उसने साबित कर दिया कि वह आने वाले समय में राजनीति के परिपक्व खिलाड़ी बनकर साबित होंगे।
भव्य बिश्नोई जब 2019 के चुनावी मैदान में उतरे थे तो उनके सामने कटीले पत्थर अधिक थेे। पिता कुलदीप बिश्नोई की बिमारी के बाद जनता से कम सम्पर्क की नाराजगी उनके सामने थी, दिग्गज पार्टी के प्रत्याशी उनके सामने थे, एक तरफ मौजूदा सांसद तो दूसरी तरफ आईएएस अफसर। मगर भव्य बिश्नोई ने जिस प्रकार बिना घबराए सभी चुनौतियों का डट कर सामना किया उसने इस बात को उजागर कर दिया कि भव्य बिश्नोई आने वाले समय में एक दमदार नेता बनकर उभरेंगे। मगर यह तभी मुमकिन हो पायेगा जब उनके पिता कुलदीप बिश्नोई और मां रेणुका बिश्नोई उन्हें खुली छूट दे।
बता दें कि इतिहास गवाह है कि कुलदीप बिश्नोई को हमेशा अपने पिता स्वर्गीय भजनलाल के कार्यों से पहचान मिली। पिता के स्वर्गवास के बाद कुलदीप बिश्नोई का काफी समय कठिन राजनीतिक दौर, छल-कपट के बलि चढ़ा। मगर पुरानी बातें भूल कर भव्य ने एक अलग हिसार का रूप जनता के सामने दिखाने का प्रयास किया। मात्र 26 की उम्र में राजनीति में डेब्यू करने के साथ ही भव्य का सामना विरोध, कठिन सवालों और आलोचनाओं से हुआ, मगर हर परिस्थिति में भव्य बिश्नोई का संयम न खोना, हर सवालों का जवाब देना इस बात का संकेत था कि भव्य बिश्नोई आने वाले समय में उन दिग्गज नेताओं के बीच खड़े होंगे जो हरियाणा की राजनीती को अपनी युवा सोच से एक मजबूत पहचान देंगे।
2019 के चुनाव में बेहद कम समय में भव्य बिश्नोई ने न केवल एक उभरते हुए शिक्षित उम्मीदवार के तौर पर पहचान बनाई बल्कि वह यह साबित करने में भी सफल रहे कि वह हिसार शहर के विकास को लेकर वह कितने गंभीर हैं। अगर भव्य बिश्नोई की टिकट को लेकर पार्टी हाईकमान पहले ही सकरात्मक सन्देश दे देता तो शायद आज भव्य बिश्नोई के सामने उतनी चुनोती नहीं होती। मगर देरी के बावजूद भव्य बिश्नोई ने अपनी पूरी मेहनत दिखाई और अपनी एक अलग छवि को जनता के सामने लाने में वह कामयाब हुए। उनकी पहचान अपने पिता या मां से नहीं बल्कि भव्य बिश्नोई में इतना दम है की वह अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं। आखिर क्यों 2019 के चुनाव में भव्य बिश्नोई एक राजनीति का परिपक्व खिलाड़ी बनकर साबित हुए आइये जानते हैं।

जमीनी स्तर पर विरोध को भव्य ने कम करने का काम किया
जब भव्य बिश्नोई हिसार लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरे थे तब हर जगह उन्हें इसी विरोध और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा था कि उनके पिता का जनसम्पर्क कमजोर रहा, मगर भव्य बिश्नोई ने एक परिपक्व नेता के गुण दिखाते हुए न केवल अपने बड़े बुजुर्गों की नाराजगी को दूर करने का काम किया बल्कि उन्हें और अधिक मजबूती से अपने साथ जोड़ने का काम किया। फलस्वरूप चुनावी दौर के अंतिम चरणों में भव्य बिश्नोई को जितना लोगों का प्यार दुलार मिला वो केवल और केवल उनकी छवि और उनके स्वभाव के कारण मुमकिन हो पाया।

भव्य में लोगों ने देखी भजनलाल की छवि
हिसार टुडे ने अपने चुनावी सर्वेक्षण के दौरान ऑफ कैमरा जब लोगों का मिजाज जानने की कोशिश की तब लोगों का मानना था कि उनको उम्मीद है कि भव्य स्वर्गीय भजनलाल की तरह लोगों के बीच रहने और जनता का काम करने की कूवत रखता है। इतना ही नहीं जिस प्रकार से इस बार कम्पैनिंग में बिश्नोई ने स्वर्गीय भजनलाल का स्वर्णिम दौर वापस लाने की बात करके चुनावी मैदान में उतरे थे। उसके चलते वह पहले ही अपने दादाजी के नाम से उनके चाहने वालों से कनेक्ट होने का काम कर चुके थे। कांग्रेस की टिकट घोषित होने के बाद भव्य ने जिस प्रकार सभी हलकों का दौरा कर मुख्यतः पुराने पार्टी कार्यकर्ता और बड़े बुजुर्गों के बीच अपना स्नेह दिखाया, वो बात भी चुनाव के अंतिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते अपना करिशमा दिखाने में कामयाबी हासिल की।

भव्य बिश्नोई के पीछे “यूथ पॉवर”
यह सभी जानते हैं कि आने वाले समय में युवा वोटरों की संख्या हिसार हलके में सबसे अधिक होगी। आने वाले दौर युवाओं का है, नई पीढ़ी, नई सोच का है। इसलिए यह जरुरी है कि ऐसा नेता हो जो युवाओं में जिसका क्रेज हो और इसमें भव्य बिश्नोई ने बाजी मारी। आज हकीकत तो यह है कि भव्य बिश्नोई सिर्फ 26 वर्ष के हैं, विदेश से शिक्षा लेकर आये हैं। उनको पता है कि युवाओं के सामने सबसे ज्यादा चुनौतियां और प्रश्न क्या होंगे। यही कारण है कि युवाओं को भी उम्मीद है कि भव्य बिष्नोई अपनी अलग और विकासशील सोच के चलते उनका भविष्य और रोजगार के साधन उपलब्ध करवा पाएंगे।

विरासत नहीं बल्कि जमीन से जुड़े नेता के तौर पर भव्य बना रहे हैं अपनी पहचान
आज सबसे बड़ी बात यह है कि आपका नेता, आपकी सुध लेता है? क्या वो मदद में आगे आएगा? जैसा की स्वर्गीय भजनलाल के मामले में कहा जाता था कि वो अपना नहीं अपने साथ काम करने वाले गनमैन के खाने-पीने का ज्यादा ख्याल रखते थे। ठीक उसी प्रकार भव्य बिश्नोई ने इस चुनाव में जिस प्रकार से प्रचार किया वह कहीं ना कहीं इस और संकेत दे रहा है कि भव्य भी अपने दादा की तरह जनता से जुड़े नेता के तौर पर अपनी छवि बनाने का काम कर रहे हैं। यदि भव्य लगातार जनता से जुड़ा रहा अपने स्तर पर अपनी नई छवि गढ़ने में कामयाब होगा।

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