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यशपाल किसके? कैप्टन अभिमन्यू का विरोध और बीरेंद्र का समर्थन, क्या खिचड़ी पक रही है अंदरखाते‌!

क्या जाट मतदाता रिझाने के लिए बृजेन्द्र को मिला मौका?

क्या जाट मतदाता रिझाने के लिए बृजेन्द्र को मिला मौका? > बृजेन्द्र को समर्थन से भाजपा को कितना फायदा?
महेश मेहता | हिसार टुडे
जाट आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा में आए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिती के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मालिक का नाम सुर्खियों में आया था। मगर इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में दुबारा यह नाम सुर्खियों में आया है।
कारण है कि यशपाल मालिक द्वारा घोषणा की गयी है कि वह हिसार लोकसभा चुनाव में चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे भाजपा प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह को न तो समर्थन देंगे और न ही उनका विरोध करेंगे। बता दें कि जाट आरक्षण को लेकर भाजपा का पूर्ण जोर विरोध करते हुए यशपाल मलिक ने सभी 9 लोकसभा सीटों पर जाट आरक्षण मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ उतरने का निर्णय लेते हुए “भाईचारा पत्र” लेते हुए जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह उठखडा होता है कि क्या हिसार में जाट नेता बृजेन्द्र सिंह का समर्थन करके भाजपा प्रत्याशी को फायदा पहुंचेगा ? वैसे इस पहल को विपक्ष और आम लोग संदेह की नजरों से देख रहे हैं।
हाल में “भव्य बिश्नोई युवा सेना” के फेसबुक ग्रुप में चन्देर भान ने यह पोस्ट किया है कि “हिसार में यशपाल मलिक का भाजपा को समर्थन देना” हरियाणा को जलाने के लिए भाजपा और मलिक के षडयंत्र को उजागर करता है” यह बात कांग्रेस प्रत्यशी भव्य बिश्नोई के समर्थक के पेज “ भव्य बिश्नोई युवा सेना में पोस्ट की गई है।
वैसे यशपाल मलिक के इस स्टैंड पर वह लोगों को यह समझा रहे हैं कि चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जाट नेता होते हुए जाटों के विषय में आवाज उठायी थी।
बता दें कि सोनीपत गोहाना रोड़ के करीब स्थित गांव बीधल के पास एक सड़क हादसा हुआ था। जिसमें यशपाल मलिक समेत अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिती के महासचिव बीएस अहलावत और उनके ड्राइवर नवीन को चोटें आई थी। बता दें कि इस दुर्घटना के बाद यशपाल मलिक को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

कैप्टन अभिमन्यु और यशपाल मलिक में हमेशा रही नोक झोंक के चलते बीरेंद्र के बेटे को पार्टी ने चुनाव में उतारा?

बता दें कि वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर को आग लगाने के मामले में कई गिरफ्तारियां हुई थी। उस समय से ही यशपाल मालिक यह मांग करते आ रहे थे कि केस से जाट लोगों का नाम हटाकर केस पीछे लिया जाए, मगर कैप्टेन अभिमन्यु इसपर राजी नहीं हुए। यही कारण है कि तब से अब तक यशपाल मालिक और कैप्टन अभिमन्यु के बीच हमेशा नोक-झोंक रही।
2018 में जसिया में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु पर हमला बोलते हुए कहा था कि कैप्टन अभिमन्यु की कोठी की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों ने हरियाणा सरकार व कैप्टन अभिमन्यु की कठपुतली की तरह काम किया। आंदोलन को कमजोर करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव अशोक बलहारा का नाम घर फूंकने के मामले में डाला है।
इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि कैप्टन अभिमन्यु के केस में अन्य लोगों के नाम भी राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा था कि हरियाणा की जनता कैप्टन व बीजेपी को उसका जवाब देगी और न्याय की लड़ाई न्यायालय में लड़ी जायेगी। यही कारण माना जा रहा है कि हो सकता है इसीलिए कैपटन की जगह जाट नेता के बेटे को सरकार ने टिकट दिया। क्योंकि उनको लगा शायद जाट वोट कहीं कट न जाए। इतना ही नहीं भाजपा यह भी सोचकर चल रही थी कि अगर भाजपा नॉन जाट चेहरा उतारे और कांग्रेस भी नॉन जाट चेहरा उतारे तो उनकी जीत कहीं न कहीं मुश्किल होगी इसलिए उन्होंने ऐसा दाव खेला जिससे जाट मतदाता भी खुश और नॉन जाट मतदाता भी खुश।
यशपाल मलिक के समर्थन से भाजपा को कितना नफा/कितना नुकसान
डेली पायनियर के जनवरी 2019 के जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा इस बात का खुलासा किया गया है कि हिसार लोकसभा चुनाव में हिसार संसदीय क्षेत्र में कुल 15.76 लाख मतदाताओं में से 5 लाख वोट जाट समुदाय के हैं। यानी कुल मतदाताओं का 33% हिस्सा जाट मतदाताओं का है।
यही कारण है कि इन समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने हिसार लोकसभा से काफी अनुभवी और दिग्गजों को छोड़कर आईएएस की नौकरी छुड़वाकर हिसार लोकसभा चुनाव से उतारा है। ऐसे में जाट नेता के तौर पर प्रख्यात यशपाल मलिक के नाम का शुमार है। मगर इस बार यशपाल मलिक ने भाजपा के हिसार के प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह के खिलाफ प्रचार करने से साफ इंकार कर दिया है।
टीवी इंटरव्यू में यशपाल मलिक ने इस बात का खुलासा किया है कि सत्ता में रहते हुए बीरेंद्र सिंह ने जाटों के पक्ष में हमेशा आवाज उठायी, इसलिए वह उनका न समर्थन करेंगे न विरोध कर रहे हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यशपाल मलिक के इस कदम से भाजपा को लाभ पहुंच सकता है। क्योंकि भाजपा जाट और नॉन जाट वोटों को लेकर बैठी है। ऐसे में यह बात भाजपा के पक्ष में जा सकती है। मगर यशपाल मलिक के इस स्टैंड को लेकर जनता में उनके खिलाफ भी राय जा रही है, उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
बीरेंद्र के घर हुई थी अमित शाह के साथ बैठक, आरक्षण का वादा किया, पर सब झूठ
बता दें कि खुद यशपाल मालिक ने 2 महीने पूर्व दिए एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि जब उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए थे तब 8 फरवरी 2016 में यशपाल मलिक भाजपा का वहां विरोध करने वाले थे। मगर यशपाल मलिक ने हिसार में दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि चौधरी बीरेंद्र सिंह के आवास पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात हुई।
उन्होंने उनसे वादा किया कि यशपाल मलिक की जाट आरक्षण की मांगे मान ली बस वह भाजपा का विरोध न करे। मगर यशपाल मलिक का आरोप है कि चुनाव होने के बाद वह अपने वादों से ही मुकर गए। तब यशपाल मलिक ने कहा था कि भाजपा ने सिर्फ और सिर्फ झूठे आश्वासन दिए।
आरोप था कि ओमप्रकाश धनखड़ के मौसा, राजकुमार सैनी, अश्वनी चोपड़ा और मनीष ग्रोवर ने रची थी साजिश
बता दें कि 2 महीने पूर्व यशपाल मलिक ने यह वक्तत्व दिया था मीडिया में कि 2016 में हरियाणा में भाजपा के नेता ओमप्रकश धनखड़ के मौसा ने आंदोलन शुरू करवाया था, फिर राजकुमार सैनी, अश्वनी चोपड़ा और मनीष ग्रोवर ने उस दौरान साजिश रची।
उसी साजिश का खुलासा वह भाईचारे पत्र के माध्यम से सम्पूर्ण हरियाणा में करेंगे। इन बड़े नेताओं का नाम लगाने के बाद यशपाल मलिक के बयानों के खिलाफ कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। मगर यह जरूर था कि भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में जाटों के नाराजगी का डर जरूर था।
जाट समुदाय में यशपाल के इस कदम से “कन्फ्यूजन”
जाट आरक्षण के मामले में यशपाल मलिक ने काफी समय से बड़ी बड़ी बयान बाजी करते हुए कहा था कि भाजपा ने हरियाणा जलाने का काम किया है और उनके खिलाफ उन्होंने लोकसभा चुनाव में काम करने का फैसला लेते हुए “भाईचारा पत्र” हर गांव गांव में जारी करने का फैसला लिया था।
मगर 10 लोकसभा सीट में उन्होंने भाजपा के खिलाफ प्रचार शुरू कर दिया और हिसार लोकसभा में चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे आईएएस अफसर रहे बृजेन्द्र सिंह के खिलाफ प्रचार न करने का फैसला लिया, उससे जाट समुदाय में यशपाल मलिक के इस स्टैंड को लेकर कन्फ्यूजन का दौर चल रहा है। उनका मानना है कि अगर 9 लोकसभा में भाजपा का विरोध तो हिसार में क्यों नहीं ?
बता दें कि खुद “भव्य बिश्नोई युवा सेना” के फेसबुक ग्रुप में चन्देर भान ने पोस्ट किया है कि “हिसार में यशपाल मलिक का भाजपा को समर्थन देना” हरियाणा को जलाने के लिए भाजपा और मलिक के षडयंत्र को उजागर करता है।” यह बात कांग्रेस प्रत्यशी भव्य बिश्नोई के समर्थक के पेज “ भव्य बिश्नोई युवा सेना में पोस्ट की गयी है। उससे कहीं न कहीं विपक्ष भी अवाज है कि आखिर यशपाल ने बीरेंद्र सिंह के मामले में ऐसा निर्णय क्यों लिया? जबकि अभी तक भाजपा ने उनकी तमाम मांगो को पूरा नहीं किया है।

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