टुडे न्यूज़ताजा खबरराष्ट्रीयसंपादकीय

मोदी शाह के हार की भविष्यवाणी नहीं होगी सत्य, मोदी ब्रांड का करिश्मा अभी भी बरकरार

Hisar Today

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उप-चुनावों में भाजपा की करारी हार के बाद कहा जाने लगा है कि अगर सारी विपक्षी पार्टियां एक जुट हो जाएं तो अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार सुनिश्चित है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी कहने लगे कि नरेंद्र मोदी का क़रिश्मा अब ढलान पर है। उनका यह भी मानना है कि इन दो उपचुनावों के नतीजों ने दिखा दिया है कि मोदी-शाह की जोड़ी हिंदी पट्टी में अजेय नहीं है और अगर मिल कर काम किया जाए तो उन्हें धूल चटाई जा सकती है। ये टिप्पणियां कुछ-कुछ वैसी ही हैं जो 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की जीत के बाद की गई थीं। उस चुनाव में भी पारंपरिक रूप से प्रतिद्वंद्वी रहे लालू प्रसाद और नीतीश कुमार साथ आए थे। उस समय लालू ने अपमान का घूंट पीते हुए न सिर्फ़ नीतीश कुमार को अपना नेता माना बल्कि चुनाव नतीजे के बाद सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने दिया। हालांकि बिहार की राजनीति में उत्तर और दक्षिण ध्रुव कहे जाने वाले लालू-नीतीश के साथ आने के बाद क्या हुआ, यह सबके सामने है। न सिर्फ़ साफ़-सुथरी छवि वाले नीतीश का दम घुटने लगा बल्कि उन्होंने मोदी विरोध के अपने रवैये से यू-टर्न लेते हुए फिर भाजपा से हाथ मिलाया।
बिहार का ज़िक्र इसलिए क्योंकि वहां जैसा ही महागठबंधन प्रयोग के तौर पर पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश में इन लोकसभा उपचुनावों में मैदान में उतरा। 1995 के गेस्टहाउस कांड की बेहद कड़वी यादों को भुलाकर मायावती ने मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव का साथ देने का फ़ैसला किया। रातों-रात मायावती की एक अपील पर उनके दलित वोट एकमुश्त सपा के खाते में चले गए। नतीजा ये हुआ कि भाजपा को लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तुलना में ज़बर्दस्त नुक़सान उठाना पड़ा। इन उप-चुनावों का नतीजा सिर्फ़ सपा-बसपा के वोट जुड़ने भर को नहीं दिखा रहा, बल्कि भाजपा के ख़िलाफ़ मतदाताओं का गुस्सा भी दिखा रहा है क्योंकि भाजपा के ख़िलाफ़ स्विंग साफ दिख रहा है।
यह भाजपा के लिए अगले लोकसभा चुनाव से पहले खतरे की घंटी है। दरअसल, भाजपा के लिए ज़्यादा बड़ी दिक्कत ब्रैंड योगी को बहुत गहरा धक्का पहुंचने से हुई है। विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद सरल, सौम्य और प्रशासनिक अनुभव के धनी मनोज सिन्हा के बजाए तेज़तर्रार, हिंदुत्व छवि वाले आदित्यनाथ योगी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सोच मानी जाती है।
मगर मोदी प्रशंसक एक तबका अभी भी है तो यह खुलेआम कहता है की नरेंद्र मोदी के आने से दुनिया में भारत महाशक्ति के रूप में सामने आया है। नवकरी और किसानो के मुद्दों के साथ आयुष्मान योजना के माध्यम से उन्होंने गरीब वर्ग के दिलो में भाजपा के प्रति प्रेम जागृत किया है वही उन्होंने यह भी दिखाने की कोशिश की कि उनके राज में देश में ईमानदारी का बोलबाला है। भाजपा की इस छवि ने कही न कही विपक्ष के रातों की नींद हराम कर दी है। यही कारण है कि दुबारा उभरते ब्रांड मोदी को मलिन करने के लिए विपक्ष के तमाम दल लोकसभा चुनाव में मोदी को मात देने और बीजेपी को सत्ता में दोबारा से आने से रोकने के लिए चक्रव्यूह रच रहे है। पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर आम आदमी पार्टी (आप) की रैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने एकजुट होकर मोदी के खिलाफ हल्ला बोला।
इसके बाद देर शाम को ही शरद पवार के दिल्ली आवास पर विपक्ष के कई दिग्गजों का जमावड़ा हुआ और रणनीति बनी। शरद पवार के घर पर विपक्षी दलों की हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, टीएमसी की ओर से ममता बनर्जी, सुदीप बंदोपाध्याय, डेरेक ओ ब्रायन, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू शामिल हुए थे और यह खबर आग की तरह फैली थी। हालांकि, आरजेडी और वामपंथी पार्टियों की ओर से कोई नेता वहां मौजूद नहीं रहा। बता दें कि जंतर मंतर पर हुई अरविंद केजरीवाल की रैली में आरजेडी और वामपंथी दल भी एकजुट हुए थे। मोदी को हराने के नाम पर विरोधी पार्टियां एक छत के नीचे तो आ चुके है। 26 फरवरी को एक बार फिर मोदी को हराने की ख्वाहिश रखने वाली तमाम पार्टियों के नेता मिलकर बात करेंगे। वैसे अगर देखा जाए तो लोकसभा चुनाव 2019 में का सियासी मिजाज 2014 से काफी जुदा है। इस बार सत्ता में मोदी हैं और विपक्ष लगातार किसान, बेरोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों पर उन्हें घेर रहा है। इतना ही नहीं, दूसरी तरफ विपक्षी एकजुट हो रहा है, ऐसे में मोदी के सामने सत्ता में दोबारा से वापसी की दोहरी चुनौती है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा पहले ही गठबंधन करके मोदी के लिए सिरदर्द बन चुके हैं।
वहीं, बिहार और झारखंड में कांग्रेस और आरजेडी सहित तमाम छोटे दलों को साथ हाथ मिलाया है। इसके अलावा महाराष्ट्र में कांग्रेस ने एनसीपी और तमिलनाडु में डीएमके साथ गठबंधन करके बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति अपनाई गई है। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों की ज्यादातर सीटें जीतकर केंद्र की सत्ता पर काबिज हुए थे। लेकिन इस बार विपक्षी की एकजुटता से उनका राजनीतिक समीकरण बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है। इसके अलावा कांग्रेस की हालत 2014 जैसी अब नहीं रही है।
हाल ही में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा से तीन राज्यों की सत्ता को छीना है। इसके अलावा जिस तरह से राहुल गांधी अपनी रैलियों में किसान और नौजवानों के रोजगार के मुद्दे को उठाने के साथ-साथ राफेल डील के बहाने मोदी को भी भ्रष्टाचारी बताने में जुटे हैं। वहीं, प्रियंका गांधी के सियासत में कदम रखने से कांग्रेसियों में एक जोश दिख रहा है। बीजेपी भी अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने में जुटी है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में जहां फोकस किया है। वहीं, मोदी-शाह की जोड़ी ने बूथ प्रबंधन को मजबूत करने और देश भर में रैलियां करके अपने जनाधार को मजबूत कर रहे हैं।इतना ही नहीं भाजपा में चाणक्य की भूमिका अदा करने वाले अमित शाह ने मौके के अनुरूप अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। हाल में किसानो के खाते में सालाना 6000 रूपए डालने की घोषणा के कारण मोदी के प्रति किसानो का रोष कम हुआ है।
इतना ही नहीं कुंभ स्नान के साथ उन्होंने प्रयागराज में कर्मियों के पांव पूजन करके उन्हें न केवल सम्मान देने की कोशिश की। जिसने आम नागरिको के दिलों में मोदी के प्रति इज्जत को और बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं कश्मीर मुद्दे पर हाल फिलहाल चल रहे राजनीतिक तनातनी के बीच उन्होंने पाकिस्तान के वजीर-ए- अज़ाम को भी झुकने पर मजबूर कर दिया है। यह सभी सियासी दांव विपक्ष को परेशान करने में जुटे है। मगर इस मौके पर भी कांग्रेस ने सियासत करना नहीं छोड़ा 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद पूरा देश जब गमगीन था तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुछ ऐसी तस्वीरें साझा की जा रही हैं, जिसमें वो हंसते-मुस्कुराते दिख रहे थे। कांग्रेस ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर द टेलिग्राफ अखबार में छपी प्रधानमंत्री की 14 फरवरी से अबतक की तस्वीरें साझा की। इसपर द टेलिग्राफ ने हेडिंग लगाई, “शर्म करो, राष्ट्र द्रोहियों! तुम कैसे प्रधानमंत्री के 14 फरवरी के बाद के दुख पर सवाल उठा रहे हो? तबसे उन्होंने लगभग हर दिन काले कपड़े पहने हैं।”
ट्वीटर अकाउंट पर टेलीग्राफ अखबार की इस क्लिप को साझा करते हुए कांग्रेस ने लिखा, “इसमें कोई हैरानी कि बात नहीं है कि मोदी ने राष्ट्रीय शोक का एलान नहीं किया, क्योंकि उस वजह से उनके प्लानड फोटो शूट नहीं हो पाते।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के इसी पोस्ट का जवाब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत करने के दौरान दिया। उन्होंने देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एक करोड़ एक लाख छह हज़ार आठ सौ अस्सी किसानों के बैंक खाते में दो हज़ार 21 करोड़ रुपए की पहली किस्त भेजी। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज का दिवस सामान्य दिवस नहीं है।
आज़ादी के बाद किसानों से जुड़ी ये सबसे बड़ी योजना आज उत्तर प्रदेश की पवित्र धरती से मेरे देश के करोड़ों करोड़ों किसानों भाइयों-बहनों के आशीर्वाद से आरंभ हो रही है। “उन्होंने अपने भाषण में विरोधी पार्टियों को महामिलावटी गैंग बता कर उनपर सीधा वार किया और यह दिखने की कोशिश की कि कांग्रेस कितना भी हो हल्ला करते रहे उन्हें कोई फर्क पढ़ने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस योजना को लेकर किसी के बहकावे में न आएं. हमारे विरोधियों का, महामिलावटी लोगों का चेहरा इस योजना के बारे में सुनते ही लटक गया था।”

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close