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मैं हो चुका हूं रिटायर, 2-6 महीने बाद बृजेन्द्र आएगा यहां वो जवाब देगा, मैं नहीं: बीरेंद्र सिंह (Video)

मैं भारत सरकार में मंत्री हूं और स्थानीय मुद्दों के सवाल या तो किसी विधायक से पूछें या फिर सरकार के मंत्रियों से! वो खुद सिर्फ राजनीतिक सवालों के ही जवाब देंगे।

पत्रकार के स्थानीय मुद्दों के सवाल पर भड़के मंत्री जी, कहा मैं हो चुका हूं रिटायर, जीत के बाद 2-6 महीने में बेटा बृजेन्द्र यहां आएगा उसी से पूछना, वो जवाब देगा मै नहीं!
अर्चना त्रिपाठी | हिसार
चौधरी बीरेंद्र सिंह सुना है वह खुद को राजनीति का माहिर खिलाड़ी बताते हैं। वह अक्सर ऐसा कहते हैं कि दूसरे नेताओं की जितनी उम्र नहीं उससे तो ज्यादा उनका राजनीतिक तजुर्बा रहा है।
सुना है वो इन दिनों यह भी छाती पीट कर कह रहे हैं कि उनका रसूक और पहुंच इतनी ज्यादा है कि खुद उनका इस्तीफा भी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं स्वीकार कर सकते।
यह उनका आत्मविश्वास है या स्वभाव? आज जब भाजपा के प्रत्याशियों का जगह-जगह विरोध हो रहा है तो इन प्रत्याशियों को पीएम मोदी की याद आ रही है। यह लोग बोलते हैं मुझे नहीं पीएम मोदी को वोट दो। भाई जनता को मुर्ख बनाने की भी हद्द होती है।
साहब यह बताओ, अगर हमारे गांव या शहर में कुछ हो जाए तो क्या हम पीएम मोदी के पास दिल्ली जाएंगे कि भाई हमारा काम करवा दो। अगर चुना हुआ सांसद काम न करे तो क्या जनता मोदी के पास जाएगी? यह सवाल मेरा नहीं बल्कि सभी आमजन का बन गया है।
आज तो हद्द यह हो गयी है कि हिसार के जाने माने नेता और केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह एक जो जनता से अपने बेटे के लिए वोट की भीख मांग रहे है। खुद के कार्यो को तो नहीं गिना रहे, अपनी पत्नी के कार्यो के दम पर वोट नहीं मांग रहे वो अपने बेटे की नैया मोदी के नाम से पार करवाना चाहते हैं।
हाल में यह मंत्री जी पहुंचे गांव लाडवा अपने पूर्व आईएएस बेटे के लिए वोट मांगने। उनका मानना था कि उनका होनहार बच्चा जीतेगा तो गांव का कायापलट करेगा। मगर आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि आज लाडवा में 1993 से बना प्राथमिक स्वास्थ सुविधा केंद्र आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां के मरीजों को इलाज के लिए 15 किलोमीटर दूर हिसार जाना पड़ता है।
मगर आज तक इस मुद्दे को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। यही कारण है कि जब जनता की इस समस्या को लेकर वोट मांगने बरवाला विधानसभा के लाडवा गांव में बीरेंद्र सिंह पहुंचे तो पत्रकारों ने उनसे गांव में हॉस्पिटल की समस्या से अवगत करवाते हुए उनका पक्ष जाना चाहा, लेकिन घमंड में चूर वीरेंद्र सिंह इस सवाल पर आग बबूला हो गए।
उन्होंने गुस्से में तमतमाते हुए कहा कि वो केंद्र सरकार के मंत्री हैं और स्थानीय मुद्दों के सवाल या तो किसी विधायक से पूछे या फिर सरकार के मंत्रियों से! वो खुद सिर्फ राजनीतिक सवालों के ही जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल नहीं है या फिर पानी नहीं आ रहा ऐसे सवाल उनसे ना पूछे जाएं।
उन्होंने दो टूक कहा कि उन्हें नहीं पता है कि कहां पानी आया है या फिर नहीं आया। जब उनसे स्थानीय संवाददाता ने पुनः सवाल दोहराना चाहा तो मंत्री जी ने जवाब दिया कि जब जीतकर उनके बेटे 2 महीने या 6 महीने बाद यहां आए तो इस प्रकार के सवाल उनसे करना।
हैरत की बात है बेटा चुनाव जीता नहीं पिता की जुबान और तेवर ऐसे! बता दें कि उन्हें किस सम्मानीय पद पर भेजा गया है अगर वह खुद को जमीं से जुड़ा नेता मानते तो वह यह कहते कि मैं स्वयं मुख्यमंत्री से बात कर इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाऊंगा। मगर मंत्रीजी ने ऐसा नहीं किया। ऐसे में सवाल यह उठखडा होता है कि अगर बीरेंद्र सिंह इस अहंकार में चूर रहेंगे तो उनके बेटे अर्थात भाजपा प्रत्याशी बीरेंद्र सिंह से जनता किस काम की उम्मीद कर सकती है।

मामला

हिसार जिले के गांव लाडवा में 1993 में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद अपने मौजूदा हालत पर रोता नजर आ रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पानी की निकासी के अभाव में यहां पानी चार से पांच फिट तक भर जाता है। जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालात जर्जर हो चुकी है।
संक्रमण की संभावनाओं के चलते इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का रख-रखाव करने के बजाए इसे गांव की चौपाल में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन अब इसका नया पता ग्राम सचिवालय है। लाडवा गांव में बने इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लाभ गांव लाडवा समेत आस-पास के 6 अन्य गांव को भी मिलता था।
स्वास्थय केंद्र के खस्ता हालातों के बाद ग्रामीणों को इन सुविधाओं के लिए 15 किलोमीटर दूर हिसार जाना पड़ता है। वहीं ग्रामीण समस्या को लेकर नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन बावजूद इसके उन्हें आश्वासन के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ केंद्र की बिल्डिंग के जर्जर होने और ग्राम सचिवालय में स्वास्थ्य केंद्र के लिए उपयुक्त स्थान ना होने के कारण चिकित्सकों सहित एंबुलेंस को अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।
सुरेंद्र पुनिया ने कहा काम किया मंजूर, मगर काम में देरी पर कोई जवाब नहीं
1993 से बना यह सरकारी अस्पताल जिसकी आज तक किसी ने सुध नहीं ली। बता दे कि खुद भाजपा के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पुनिया यहां बरवाला विधासभा से चुनाव लड़ चुके है वो तब यहां से चुनाव हार गए थे। उन्होंने भी इस मुद्दे को उठाने में बड़ी देरी लगा दी। वो कहते हैं कि उन्होंने 3 साल पहले इस काम को मंजूरी दिलवाई मगर इस देरी का उनके पास कोई जवाब नहीं था।
बीरेंद्र सिंह का बयान का मतलब “लोग पहले वोट दें फिर होगा काम”: बिमल
बीरेंद्र सिंह के बयान पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एल. बिमल का कहना था कि उनके इस वक्तत्व से यह जाहिर होता है कि वह यह कहना चाहते हैं कि लोग पहले उनके बेटे को वोट दें, फिर काम होगा।
मेरा तो मानना है कि बीरेंद्र सिंह को इस सरकारी अस्पताल की दयनीय अवस्था को देखते हुए उनको तो चाहिए था कि वह इस गंभीर मुद्दे को तुरंत उठाकर उसे हल करवाते। मगर ऐसा न करके इस प्रकार की बयानबाजी देना मतलब साफ है यह तो सौदेबाजी चल रही है। मेरा तो मानना है कि बीरेंद्र की उम्र से मैं ज्यादा बड़ा हूं मुझे पता है वो बुजुर्ग हो गए हैं, मगर उन्हें अच्छा बर्ताव करना चाहिए।

मोदी के नाम पर मांग रहे बेटे के लिए वोट, जनता का सवाल मदद के लिए क्या मोदी के पास जाना होगा ?

आजकल भाजपा के प्रत्याशी और प्रत्यशियों के मां-बाप बड़े जोशोखरोश के साथ पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं, मगर अब सयानी जनता भी यह समझ चुकी है कि बड़ी-बड़ी बात करके कोई फायदा नहीं। आज हिसार की जनता मुर्ख नहीं है।
उनका मानना है कि अगर उनके गांव में कोई समस्या हुयी या उनके मदद के लिए किसी की जरुरत पड़ी और अगर उनका चुना हुआ विधायक कभी हलके में भी कदम न रखे, तो क्या वो मदद के लिए पीएम मोदी के पास जायेंगे? दरअसल हकीकत यह है कि आज हिसार में भाजपा पूरी तरह से जनता के सवालों से घिर चुकी है।
जिस प्रकार से उन्होंने परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए उस व्यक्ति (बृजेन्द्र सिंह) को भाजपा की टिकट दी, जिसने हिसार की जनता के लिए 5 साल से कभी कुछ नहीं किया, न ही अपनी शक्ल दिखाई उससे जनता नाराज है। खुद भाजपा के भी नेता केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह को भी पता है कि वह कौनसा काम दिखा कर वोट मांगे। इसलिए उन्होंने पत्रकारों के जायज से सवाल पर जब कोई जवाब न सुझा तो अपनी भड़ास निकालकर खुद की कमजोरी को बखान किया।
मंत्री जी को वोट के लिए आती है गांव की याद, समस्या पर कहते हैं मेरा काम नहीं : वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुंडू
अब जमाना भी क्या आ गया है जब वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुंडू ने भाजपा प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह के लिए वोट मांगने गांव लाडवा में आये उनके पिता केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह से उसी गांव की सबसे गंभीर समस्या अर्थात सरकारी अस्पताल की दयनीय अवस्था के कारण मरीजों के जीवन पर मंडराते प्रश्न पर सवाल किया तो खुद को वरिष्ठ नेता बताने वाले महाशय बीरेंद्र सिंह ऐसे आग बबूला हो गए और कहने लगे मुझसे राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल करो। इस जवाब को बेहद निंदनीय करार देते हुए राजेश कुंडू ने कहा कि जनता पीएम मोदी को नहीं बल्कि अपने स्थानीय मुद्दे सुलझाने के लिए अपना सांसद चुन रही है।
उन्होंने सवाल किया कि वोट के लिए गांव की याद आती है और उसी गांव की समस्या को वह अपनी समस्या नहीं समझते। यह बात बहुत गलत है। राजेश कुंडू ने बताया कि यह लोग वोट मांगने आते हैं, अपना इमोशनल पत्ता भी फेकेंगे, राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करेंगे, मगर जब गांव की सबसे ज्वलंत समस्या को सुलझाने की बात आती है तो यही नेता कहते हैं कि यह उनका मुद्दा नहीं है।
तो फिर यह जवाबदेही किसकी होगी? सांसद का काम क्या होता है? सांसद अपने संसदीय क्षेत्र की हर समस्या के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार भी होता है, उसे समस्याओं को उठाना भी पड़ता है, योजना को लागू करवाने के लिए मांग भी उठानी पड़ती है। आप खुद को कद्दावर नेता समझकर आग बबूला होकर औरों को नीचा दिखाने का काम करते हो, यह अशोभनीय है।

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