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“मां-बाप-बेटे” की तिगड़ी मांग रही वोट

महेश मेहता | हिसार टुडे
मिजाज गर्म है जी सभी के, अब दोपहर चाय से ज्यादा ठंडे कोल्डड्रिंक की जरुरत कुछ ज्यादा ही पड़ती जा रही है। एक तो मौसम गर्म, चुनाव गर्म और प्रत्याशी गर्मागर्म। मेरे कहने का मतलब यह है कि अब जब गिनती के ही दिन बचे हैं ऐसे में अब सब फैमिली लोग प्रचार में जुट गए हैं।
पापा, मम्मी और बेटा घूम-घूम कर वोट मांग रहे हैं। वैसे हर मां-बाप यह चाहते हैं कि अपने बेटे को तरक्की करते देखें। ऐसे में इस बार यही हाल हिसार लोकसभा में देखने को मिल रहा है। क्योंकि यहां भी है मां-बाप और बेटे की जोड़ी।
आज जहां देखो वहां पिता ऐसे कठिन दौर में अपने बच्चे के लिए जी जान एक कर रहा है। अब भाजपा को ही ले लीजिये भाजपा के प्रत्याशी हैं बृजेन्द्र सिंह, उनके पिता हैं केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह, मां है विधायक प्रेमलता।
अब चलते हैं दूसरे प्रत्याशी की तरफ पार्टी है कांग्रेस, प्रत्याशी हैं भव्य बिश्नोई, साथ हैं उनके पिता विधायक कुलदीप बिश्नोई, मां विधायक रेनुका बिश्नोई।
तीसरे प्रत्याशी हैं जो चुनावी मैदान में है वो है जननायक जनता पार्टी के प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला, उनका साथ मैदान में देने के लिए पिता डॉ अजय चौटाला और माँं विधायक नैना चौटाला मैदान में प्रचार में उतर आये हैं। यानि मां-बाप और बेटों की यह 3 जोड़ी इस बार सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गई है।
अब जब मुकाबला तगड़ा है तो प्रचार का भी तो कोई नया जरिया खोजना पड़ेगा। एसी अर्थात एयर कण्डीशन में बैठने वाला आज ट्रक चला रहा है, कोई जूस की दूकान में शरबत पीते हुए फोटो सोशल मीडिया में डालकर यह जताने की कोशिश कर रहा है कि वो जनता के नेता हैं।
हंसी आती है भाई जब आप जनता के नेता हो तो दिखाते क्यों हो भाई। आपको तो पता ही होगा कि 5 साल आपको कोई पूछे नहीं मगर अब ऐसा दिल खोलकर मिलेगा, ऐसे गले लगाएगा कि मानो आपसे इतना प्यार है जितना किसी से नहीं।
सुना है कुछ कार्यकर्ताओं के साथ नाश्ता कर रहे हैं, कुछ चाय की चुस्कियां ले रहे हैं तो कोई रूठो को मनाने में लगा है। होता है- भाई अक्सर ऐसा होता है। ऐसा व्यवहार में परिवर्तन अक्सर चुनाव में कुछ लोगों का दिखता है। क्या आप यह तो नहीं सोच रहे कि जिसके पार्टी प्रत्याशी में जितनी भीड़ वह ज्यादा लोकप्रिय!
कभी यह सोचने की गलती से भी गलती नहीं करना। खैर पता है जैसे अपने नेता वैसे ही इन पार्टी के कार्यकर्ता भी अपने नेताओं से कम चालाक नहीं। अपने घर सभा रखते हैं मगर भीड़ जुटाने के लिए अपने दोस्तों को बुला लेते हैं, जो दूसरी पार्टी का समर्थक होता है।
हाल में हिसार में भी एक नेता आये थे हिसार, उस समय भी हिसार के एक वरिष्ठ पद में बैठे व्यक्ति ने उस बड़े नेता के स्वागत में अपने उस दोस्त को बुलावा भेजा जो खुद दूसरी पार्टी का कट्टर समर्थक है। मैं नाम नहीं लूंगा, क्योंकि पोल खुल जायेगी। मगर मुझे उम्मीद है वो मेरा यह लेख पढ़ कर समझ तो जरूर जाएंगे कि मैं किस महान हस्ती की बात कर रहा हूं।
वैसे मेरी राय है आप भी अपने जीवन में मतदान करने के पहले एक बार ऐसे पार्टी के दफ्तर में जरूर जाएं और वहां की चर्चा सुने। आप खुद सर पकड़ लेंगे और सवाल करेंगे “ऐसा भी होता है।” खैर! कल मैंने विकास की क्या बात की आज भाजपा चुनाव आयोग पहुंच गई।
भाई मेरे खिलाफ नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव लड़ रहे विभिन्न पार्टियों के उन उम्मीदवारों के खिलाफ शिकायत लेकर जिन्होंने अब तक अपने आपराधिक मामले की जानकारी मीडिया में नहीं दी। दरअसल, चुनाव आयोग के निर्देशानुसार नामांकन वापस लेने और मतदान से दो दिन पहले तक उम्मीदवारों को अपने आपराधिक मामलों की जानकारी देनी मतदाताओं को अनिवार्य है।
इस तरह के मामलों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में प्रत्याशी विज्ञापन दे सकता है, जो अनिवार्य है। भाजपा के विधि विभाग ने ऐसे 26 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे उम्मीदवारों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी है।
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