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बेटे की जीत लाखों वोट से और विपक्ष की होगी “बेचारी और दयनीय स्थिति”: वीरेन्द्र सिंह (Video)

दुष्यंत को दी नसीहत “दुष्यंत को अगर राजनीति में आगे बढ़ना है तो 36 बिरादरी को साथ लेकर चलो वरना तुम्हारा भविष्य ठीक नहीं”

भव्य और कुलदीप पर निकाली भड़ास
अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
हिसार लोकसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने बीरेंद्र सिंह के पुत्र आईएएस अफसर पद पर रहे बृजेन्द्र सिंह को चुनावी मैदान में उतारकर कांग्रेस और जजपा को कड़ी टक्कर देने की कोशिश की है।
बृजेन्द्र सिंह को टिकट देने के बाद बीरेंद्र सिंह ने अपने राजयसभा सांसद पद से इस्तीफा देकर यह प्रदर्शित करने की कोशिश की कि उन्होंने वंशवाद को खत्म करने की अनोखी पहल की है। मगर क्या जो दिखता है वही सत्य है? यह सवाल इसलिए क्योंकि आज विपक्ष खुद भाजपा पर वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कह रहा है कि “यह इस्तीफा महज ड्रामा है”।
इतना ही नहीं हिसार टुडे ने भी अपनी खबर के माध्यम से यह बताने की कोशिश की थी कि भाजपा की नीतियों के अनुसार 75 साल के उम्र के बाद नेताओं की राजनीति में एंट्री की गुंजाईश बिलकुल नहीं है। इसलिए सूत्रों के अनुसार ऐसा माना जा रह है कि इसलिए भाजपा के कई नेताओं के टिकट कट चुके हैं।
लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, इसका जीता जागता उदाहरण है। यही कारण है कि आगे चलकर बीरेंद्र सिंह के लिए भी भविष्य में चुनाव लड़ना न के बराबर है। यही कारण है कि राजनीति से विदाई लेने के पहले उन्होंने अपने बेटे को सेट करने के लिए हिसार लोकसभा सीट से उम्मीदवारी दिलवाई यह इस बात का सबूत है कि उन्होंने भी वंशवाद को बरकरार रखा है।
हिसार टुडे ने कई बार यह मुद्दा भी उठाया। मगर जब इस मुद्दे पर पहली बार बीरेंद्र सिंह से हमारी मुलाकात हुयी तो वह हमारे सवाल से भड़क उठे. इतना ही नहीं उन्होंने जातिगत फैक्टर को देखकर दिए जाने वाले सीट के सवाल पर भी अपनी चुप्पी और गुस्सा दिखाया। जो इस बात का सबूत है कि भाजपा को यह दो सवाल चुनाव में हावी पड़ रहे है। जिसका जवाब शायद उनके पास भी नहीं है।
वरिष्ठ नेता हूं, पार्टी के लिए आसान नहीं इस्तीफा स्वीकार करना : बीरेंद्र
बीरेंद्र सिंह जहां इस्तीफे के बात से बौखलाए नजर आये, वहीं उन्होंने हिसार टुडे से खास मुलाक़ात में बड़े अहम और विश्वास में एक अहम बात कह दी की “बीरेंद्र सिंह कोई छोटा नाम नहीं, हो सकता है पार्टी इलेक्शन होने तक उनका इस्तीफा मंजूर न करे।” उनका यह बयान यह साबित करने के लिए काफी था कि भाजपा के अंदर क्या खिचड़ी पक रही है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अभी उनके राजयसभा सांसद पद का कार्यकाल खत्म होने में साढ़े 3 साल पड़े है। इतना ही नहीं वह 25 मंत्रियो के मंत्रिमंडल में उम्र के हिसाब से भी सबसे ज्यादा वरिष्ठ हैं। इसलिए उनका इस्तीफा पार्टी ने मंजूर नहीं किया।
जातिगत फैक्टर पर भड़के बीरेंद्र “खुद को छोड़ -दुष्यंत को दी सलाह”
माना जा रहा था कि भाजपा हाईकमान हिसार से कोई जाट उम्मीदवार की खड़ा करेगी। जब इसी सन्दर्भ में उसने हिसार टुडे ने सवाल किया कि क्या वह भाजपा की टक्कर दुष्यंत चौटाला से मानते है? तो वह फिर भड़क उठे। उन्होंने कहा कि यह जातिगत आधार पर मीडिया क्यों ठप्पा लगा रही है। उन्होंने तो अपनी छोड़ मौजूदा सांसद दुष्यंत को सलाह देना शुरू कर दिया और कहा “दुष्यंत को अगर राजनीति में आगे बढ़ना है तो 36 बिरादरी को साथ लेकर चलो वर्ना तुम्हारा भविष्य ठीक नहीं।”
हिसार टुडे के वंशवाद के सवाल पर भड़के बीरेंद्र सिंह
जैसा की सभी जानते हैं कि आज चौधरी बीरेंद्र सिंह राजयसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी प्रेमलता उचाना की विधायक है। बावजूद इसके उन्होंने हर सभाओ में भाजपा के नेताओं और मुख्यमंत्री से बार-बार गुजारिश की कि वह उनके बच्चे को सोनीपत या हिसार से टिकट दें। माना जाता है कि हिसार लोकसभा से टिकट के लिए बीरेंद्र सिंह ने अपना दम-खम लगाया और अपने बेटे की लिए वह टिकट ले आये।
यानि पूरा परिवार राजनीति में। चूंकि यह मुद्दा चुनाव में हावी न हो जाए इसलिए उन्होंने खुद का इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को सुपुर्द किया। यह सभी जानते हैं कि 75 के बाद भाजपा में टिकट वैसे भी नहीं मिलनी इसलिए बीरेंद्र सिंह को अपने आईएएस बेटे की राजनीति में एंट्री करवाने के लिए नौकरी छुड़वा दी।
जो कहीं न कहीं वंशवाद की बता को साबित करता है। इतना ही नहीं खुद दुष्यंत चौटाला ने भी कहा था कि बीरेंद्र सिंह ने वंशवाद की नयी परिभाषा लिखी है। जब वंशवाद के तीखेे सवाल हिसार टुडे ने पूछे तो वह भड़क उठे। बीरेंद्र सिंह ने कहा “आप हमारा इस्तीफा मंजूर करवा दें, उन्होंने कहा कि मुझे पूछने से अच्छा उन पिता-पुत्र से पूछो उनको महज 3 महीने बचे हैं वह इस्तीफा कब देंगे।

उचाना पर भव्य के बयान पर बीरेंद्र का पलटवार “भव्य तो पैदा भी नहीं हुआ था”, उचाना छोड़ाे कुलदीप को बोलो अपने हल्केे को बचाये

हाल में भव्य बिश्नोई ने चौधरी बीरेंद्र सिंह के गढ़ अर्थात प्रेमलता के हलके में जाकर यह बयान दिया था कि उचाना का बीरेंद्र सिंह और उनके परिवार ने बिलकुल विकास नहीं किया। जवाब में बीरेंद्र सिंह ने कहा कि “भव्य कुछ भी कहे -तब तक तो वह पैदा भी नहीं हुआ था”। उन्होंने तो भव्य और उनके पिता कुलदीप पर निशाना साधते हुए कहा कि उचाना की छोड़ो उनको जाकर बोलो पहले वह पहले अपने हलके को देखे वही उनको खतरा हो रहा है। बाद में उचाना की बात करे।

हर जगह छा चुके है मोदी अब “क्या भव्य करेगा और क्या उसके पिता करेंगे”

बीरेंद्र सिंह ने कहा कि इस बार चुनाव जाती, गोत्र, धर्म, कर क्षेत्र के आधार पर नहीं बल्कि मोदी के नाम पर हो रहा है। आज ऐसी हवा चल रही है मोदी जी की “पार्टी लुप्त, प्रत्याशी लुप्त, हम लुप्त, वोटर चमक रहा है, सब जगह मोदी मोदी हो रहा है। अब ऐसे में “क्या करेगा भव्य और क्या भव्य के पिता।

बृजेन्द्र की जीत पक्की, जीत लाखों वोट से होगी

बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे की जीत पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस बार हिसार में भाजपा का कमल खिलेगा। आज लड़ाई केवल जजपा और कांग्रेस के बीच है, भाजपा से उनकी कोई टक्कर नहीं। उन्होंने भरोसा दिलाया की इस बार जीत लाखों वोट की होगी, वह 1 लाख हो सकते हैं या 2 लाख। जबकि विपक्ष की हालत “दयनीय और बेचारी” होगी।

 

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