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फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, एसपी, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी को किया तलब

ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी फर्जी रेड प्रकरण

राज्यपाल और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को डीएसपी और जज के बारे में दी शिकायत
एडवोकेट महत्ता ने जज के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के लिए राज्यपाल से मांगी इजाजत
अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
20 सितम्बर 2018 को शिव शक्ति मेडिकल हॉल के मालिक केमिस्ट सुरेंद्र सिंह की दुकान में 20 हजार की मंथली न देने के एवज में ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी द्वारा कथित फर्जी रेड डालने के आरोप में हिसार सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार, एसपी, डीएसपी कादियान और ड्रग इंस्पेक्टर को तलब किया है। हाईकोर्ट ने सभी को 26 अप्रैल को हाजिर होने को कहा है। अधिवक्ता मुलखराज महत्ता का कहना है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा और गलत धारणा के तहत दिए गए फैसले पर उचित कार्यवाई होगी।
बता दें कि शिव शक्ति मेडिकल केमिस्ट सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि 20 सितम्बर 2018 को में शिव शक्ति मेडिकल के मालिक केमिस्ट सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी ने उनसे 20 हजार की मंथली मांगी थी।
सुरेंद्र सिंह का आरोप था कि जब उन्होंने मंथली नहीं दी, तब ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी ने उनकी दुकान में आकर फर्जी रेड करवाई। इस अन्याय के खिलाफ सुरेंद्र सिंह ने एसपी के पास ड्रग इंस्पेक्टर के खिलाफ 16 अक्टूबर को शिकायत दर्ज करवाने के लिए पत्र भेजा। डीएसपी ने जांच की और बिना किसी गवाह और सीसीटीवी की जांच के बिना रिपोर्ट बनाकर सुरेंद्र सिंह को दोषी करार दिया।
इस फैसले के खिलाफ केमिस्ट सुरेंद्र सिंह ने हिसार सत्र न्यायालय में मामला दर्ज करवाकर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई, मगर सुरेंद्र सिंह के वकील मुलखराज महत्ता का आरोप है कि यह मामला जिस जज के पास था, उनके खिलाफ पहले ही उन्होंने एक शिकायत दर्ज करवाई थी।
इसलिए जज ने पहले तो उनके ऑब्जेक्शन को सुना नहीं बाद में सुना और सारी जानकारी लेने के बाद अगली तारीख 26 मार्च दी गई, मगर जैसे ही उस दिन उन्होंने आर्डर देखा जज ने 26 की जगह 20 को ही दो फैसले सुना कर केमिस्ट सुरेंद्र सिंह के खिलाफ 182 लगा कर नोटिस के तहत मामला दर्ज कर एएफआईआर करने के आदेश दिए थे। अधिवक्ता महत्ता के अनुसार ऐसे आदेश कोर्ट नहीं दे सकता।

हिसार सैशन कोर्ट के फैसले को दी हाईकोर्ट में चुनौती

एडवोकेट महत्ता के अनुसार 182 के तहत मामला दर्ज करने का अधिकार अदालत को होता ही नहीं। नियम के अनुसार अदालत ऐसे आर्डर नहीं दे सकती कि 182 बनाओ। यह काम कानूनी तौर पर जांच करने वाले पुलिस विभाग का होता है।
इस पुरे मामले में जैसे आर्डर दिए गए उसके खिलाफ कहीं न कहीं संदेह नजर आया और उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को पत्र लिखकर जज के आदेशों और डीएसपी की शिकायत की और राज्यपाल को पत्र लिखकर भी इस मामले की शिकायत की। इतना ही नहीं इन दोनों आदेशों के खिलाफ वे हाई कोर्ट गए।

डीएसपी की तफ्तीश पर भरोसा नहीं : मुलखराज महत्ता

एडवोकेट मुलखराज महत्ता।
बता दें कि मुलखराज महत्ता ने हिसार टुडे से खास मुलाकात में बताया कि 16 अक्टूबर 2018 को उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी के खिलाफ एसपी को शिकायत दी थी, मगर यह मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि यह मामला दर्ज करना अनिवार्य था, तो सुरेंद्र सिंह ने हिसार सत्र न्यायलय में मामला दर्ज करवाया।
जहां उसने लिखा था कि सुरेश चौधरी के पास कानूनन आय से ज्यादा संपति, हांसी और बरवाला में उसके दलाल हैं। जिसके बाद जज ने सीडी देखने के बाद मामला दर्ज करने के आदेश दिए और एआईआर क्रमांक 19 जेर धरा 7,13 पीसी एक्ट 167/218/323/330/465/471 और 504 के तहत मामला दर्ज हुआ।
उस दौरान कोर्ट के आदेश में मामला तफ्तीश के लिए डीएसपी कादियान के पास गया। सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कादियान कथित ड्रग इंस्पेक्टर का करीबी है इसलिए मामला विजिलेंस के पास भेजा जाए। एडवोकेट के अनुसार इसके बावजूद नरेंद्र कादियान ने तफ्तीश शुरू कर सिर्फ सुरेश चौधरी के बयान दर्ज किये, बल्कि अन्य गवाहों के बयान दर्ज नहीं किये और न ही सीडी देखी।
सुरेश के बयान पर तफ्तीश कर इस मामले को हाईकोर्ट भेज दिया। जज ने कहा अगली सुनवाई 26 मार्च को की जायेगी, मगर एडवोकेट महता के अनुसार 26 तारीख में जब उन्होंने आर्डर देखा तो पता चला कि जज ने 20 तारीख को ही केमिस्ट सुरेंद्र सिंह के खिलाफ 2 आर्डर पास कर दिए। एक आर्डर में तो जज ने धारा 182 के तहत कार्यवाई करने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, एसपी, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी को किया तलब
जब यह मामला हाई करत गया तब हाई कोर्ट ने उनका पक्ष सुनाने के बाद और गलत आदेश और जांच से नाराज होकर इस पुरे मामले का संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार, एसपी, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी को 26 अप्रैल को तलब किया है।
क्या है 182 :
एडवोकेट महत्ता का कहना है कि अगर पुलिस इन्वेस्टीगेशन में कहा जाता है कि मामला झूठा है। ऐसे में जिस अफसर को शिकायत की जाती है सिर्फ वही 182 के तहत मामला दर्ज कर सकता है। इस मामले में अदालत को कोई अधिकार नहीं कि वो आर्डर करे 182 के तहत मामला दर्ज करवाने का। अदालत 211 के तहत केस बना सकती हैै। इसलिए मेरा मानना है की जज ने जो आर्डर पास किया है वो 219 आईपीसी ऑफेंस के खिलाफ है।
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