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पिता की विरासत, मोदी के नाम के सहारे बृजेन्द्र सिंह

Hisar Today 

  • खुद की काबलियत पर नही बल्कि मां-पिता के नाम पर बेटे को मिला टिकट

  • जिसने हिसार की जनता के लिए नहीं किया काम उसे दिया टिकट

महेश मेहता | हिसार
7 अक्टूबर 2018 को जब हिसार लोकसभा चुनाव की लेकर सिर्फ चर्चायें थी उस दौरान हिसार टुडे ने अपनी खास रिपोर्ट “कैप्टन और डूमरखां के बीच होगा टिकट का टकराव” रिपोर्ट के माध्यम से 7 महीने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि हिसार लोकसभा सीट में भारतीय जनता पार्टी चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेन्द्र सिंह को चुनावी मैदान में उतार सकती है। आखिरकार हिसार टुडे की खबर पर मौहर लगाते हुए भाजपा ने हिसार लोकसभा सीट से चौधरी बीरेंद्र सिंह के आईएएस बेटे बृजेन्द्र सिंह को हिसार लोकसभा चुनाव में उतारकर नहले पर दहला मारा है।
बता दें कि मौजूदा सांसद दुष्यंत चौटाला के खिलाफ बृजेन्द्र सिंह को मैदान में उतारकर भाजपा ने यहां से जाट और नॉन जाट का गेम खेलकर दुष्यंत को सीधे पटखनी देने का काम किया है। बता दें कि जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर तमाम जाट समुदाय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार और वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की भूमिका से बेहद नाराज हैं और शायद उनकी यही नाराजगी उन्हें चुनाव में भारी न पड़ जाए, यही चिंता भाजपा सरकार को खाए जा रही थी। भाजपा के नेताओं को लग रहा था कि अगर उन्होंने जाट चेहरा यहां से उतारा तो उन्हें जाट समुदाय के रोष का सामना करना पड़ेगा और नॉन जाट वोट के बलबूते उनके लिए हिसार लोकसभा जैसी प्रतिष्ठित सीट जीतना मुमकिन ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। यही कारण है कि भाजपा ने जाट कार्ड खेलने के लिए अभिमन्यु पर रिस्क न लेकर बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेन्द्र सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव में बहुत बड़ा दांव खेला है। एक तरफ चौधरी बीरेंद्र सिंह की जाट लुभावनी छवि तो दूसरी तरफ जिंदल परिवार पर चौधरी बीरेंद्र सिंह की मेहरबानी इस बार लोकसभा चुनाव में उनके बेटे के लिए आसान राह तय करेगी। हिसार टुडे आज इस बात की पुष्टि कर रहा है कि इस बार जजपा को झटका और भाजपा का कमल हिसार में खिलाने के लिए भाजपा ने अपनी कमर पूरी तरह से कस ली है और अगर भाजपा का दाव सटीक बैठा तो भाजपा का कमल खिलने से कोई नहीं रोक पायेगा।

हिसार टुडे ने 7 महीने पूर्व ही बताया था कि हिसार से बृजेन्द्र सिंह पर भाजपा लगाएगी दांव
हिसार टुडे ने 7 अक्टूबर 2018 को अपनी एक रिपोर्ट के माध्यम से पहले ही इस बात की पुष्टि कर दी थी कि समीकरणों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी हिसार लोकसभा चुनाव से केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के लड़के आईएएस अधिकारी चौधरी बृजेंद्र सिंह को मैदान में उतार सकती है। हिसार टुडे की उस विश्वसनीय खबर पर मोहर लगाते हुए आखिरकार भाजपा हाईकमान ने बृजेन्द्र सिंह के नाम की घोषणा कर हिसार लोकसभा चुनाव को रोचक बना दिया है।

बृजेन्द्र सिंह को टिकट देकर भाजपा ने वंशवाद को दिया बढ़ावा
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी और उनके पार्टी हाईकमान जो खुद वंशवाद का कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं आज वह सत्ता की कुर्सी में आने के नशे में खुद वंशवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। जैसा की जनता को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता और जनता जानती है कि किस पार्टी की कथनी और करनी में कितना अंतर है। जब बात आये चौधरी बीरेंद्र सिंह की तो बीरेंद्र सिंह खुद केंद्रीय इस्पात मंत्री रह चुके हैं और राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी प्रेमलता उचाना से विधायक है और अब वह राजनीति में उनके ही परिवार के बेटे बृजेन्द्र सिंह को हिसार लोकसभा की टिकट देकर वंशवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, सिर्फ और सिर्फ सत्ता पर आने के लिए। जिससे निपटना और भाजपा की छवि में वंशवाद के दाग को मिटाना मुश्किल है।

भाजपा उम्मीदवार बृजेन्द्र सिंह की हिसार में कोई पहचान नहीं
गौरतलब बात है कि हिसार लोकसभा चुनाव की चर्चायें काफी समय से चल रही थी, मगर कभी भी बृजेन्द्र सिंह ने हिसार में कोई भी सक्रीय भूमिका नहीं अख्तियार की और न ही उन्होंने हिसार की जनता के हित की दिशा में कोई ठोस कदम उठाये। न वो जनांदोलन और न ही जनसमस्या के लिए कभी हिसार की जनता के बीच दिखे, न ही उन्होंने यहां के किसानों के उत्थान के लिए कोई कदम उठाया। ऐसे में सिर्फ अपने माता-पिता के एहसान से टिकट पाया है न कि खुद की क़ाबलियत के दम पर। बता दें  कि बृजेन्द्र सिंह को अगर जो वोट मिलेंगे तो वह उनके नाम और काम पर नहीं, बल्कि पिता और मां के काम और मोदी के नाम पर मिलेंगे। ऐसे में जनता भी इस बात से भली भांति वाकिफ है कि उनको किस प्रकार भाजपा बेवकूफ बनाने का काम कर रही है।

भजनलाल परिवार और दुष्यंत का डर भाजपा को अभी भी बरकरार
भाजपा की जाट वोट बैंक की नाराजगी और जाट नेताओं के अभाव के कारण मजबूरन भाजपा को यहां से बृजेन्द्र सिंह को चुनावी मैदान उतारना पड़ा है। बात दें कि भाजपा के लिए हिसार लोकसभा सीट जितना करो या मरो की लड़ाई है। भाजपा के लिए यहां से दुष्यंत और भजनलाल परिवार को सीधी टक्कर देने वाला कोई उम्मीदवार नही था यही कारण है कि उन्हें यहां से बीरेंद्र सिंह के बेटे को मैदान में उतारना पड़ा।

चौधरी बीरेंद्र सिंह का इस्तीफा दिल की आवाज या सियासत
बता दें कि इन दिनों अपने बेटे को टिकट मिलने के बाद चौधरी बीरेंद्र सिंह द्वारा इस्तीफे की पेशकश की खबर के बाद मीडिया में बीरेंद्र सिंह के इस कदम को सराहनीय बताया जा रहा है, जबकि यह बस आलोचकों और विपक्ष को चुप करवाने का कदम है। दरअसल केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने रविवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कैबिनेट और राज्यसभा से इस्तीफा देने की पेशकश की। बताया जाता है चौधरी ने ये फैसला उनके बेटे बृजेन्द्र सिंह को हरियाणा के हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिलने के मद्देजनर लिया है। चौधरी बीरेंद्र सिंह के मुताबिक भाजपा चुनाव में वंशवादी शासन के खिलाफ है। इसलिए उन्होंने सोचा कि बेटे को मौका मिलता है तो उन्हें राज्यसभा और मंत्रीपद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसलिए उन्होंने अमित शाह को लिखा है कि “मैं इसे पार्टी पर छोड़ता हूं, मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।” अब यह उनका महज ड्रामा माना जा रहा है। अगर बीरेंद्र सिंह को वाकई लगता कि उन्हें इस्तीफा देना है तो उन्हें राजयसभा के सभापति को जाकर इस्तीफा देना चाहिए था। मगर इस्तीफा देने की पेशकश बीरेंद्र सिंह ने की अमित शाह से, ऐसे में जनता भी जानती है कि यह इस्तीफा का महज सियासत के अलावा कुछ नहीं।

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