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चुनावी बजट :5 लाख सालाना आमदनी पर अब कोई टैक्स नहीं

हरियाणा के किसानों का सवाल क्या हुआ स्वामिथान आयोग की सिफारिशों का ?

– टैक्स छूट की सीमा 2.5 से बढ़कर 5 लाख हुई

महेश मेहता| हिसार
देश में आज किसानों का रोष सरकार की तरफ इतना था की सरकार को डर लगने लगा था कि किसानों की नाराजगी उन्हें चुनाव में भारी न पड़ जाए, दूसरी तरफ नोटबंदी के कारण बेरोजगारी की बढ़ती समस्या और बढ़ती महंगाई से भी मध्यम मार्गीय नागरिक सरकार से नाराज था. यही कारण है कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी बजट में किसान और मिडल क्लास के लोगो को रिझाने की कोशिश कि है।
मोदी सरकार ने किसानों को इस साल बड़ी सौगात दी है। बजट 2019 में मोदी सरकार ने किसानों को छह हजार रुपये सालाना पेंशन दिये जाने की घोषणा की है। आज केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट पेश करते हुए इसकी जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट पेश करते हुए किसानों को बड़ी सौगात देते हुए ऐलान किया कि जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर जमीन है उन किसानों को छह हजार रुपये सालाना आर्थिक मदद दी जाएगी।
पीयूष गोयल ने कहा कि ये ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना शुरू की है। इसके तहत कमजोर और छोटे किसान को हर साल 6 हजार रुपए दिए जाएंगे ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके। ये तीन किस्त में दिया जाएगा (2 हजार -2 हजार रुपये)। ये पैसे सीधे किसानों के खाते में जाएंगे। इसकी 100 फीसदी सरकार फंडिंग करेगी। पीयूष गोयल ने कहा कि ये स्कीम एक दिसंबर 2018 से लागू होगी। इससे देश के 12 करोड़ किसान परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। तीन किस्तों में किसानों को मिलेगा योजना का लाभ मिलेगा। इससे सरकार पर कुल 75 हजार करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा।
हालाँकि हरियाणा के किसान इससे नाराज है। अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति के राष्ट्रिय अध्यक्ष विकल पचार के अनुसार सरकार ने बहुत ही कम राशि किसानों को प्रदान की है। इतना ही नहीं चुनाव में स्वामीनथन आयोग की सिफारिश लागू करने का वादा करने के बावजूद उसको पूरा नहीं किया गया है।

झूठी और जुमलों की सरकार

विकल पचार (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति

दुःख हुआ इस बजट को देखकर। आज मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट से हमें उम्मीद थी कि वह हरियाणा के किसानों के लिए काफी खुशखबरी लेके आएंगे। मगर आज बजट से हमें केवल निराशा हाथ लगी है। सरकार ने किसानों के आर्थिक मदद के नाम पर 5 एकड़ जमीन पर किसान को 6000 रुपये सालाना देने की घोषणा की। जिसका अर्थ 500 रुपये महीना। आज दिहाड़ी में काम करने वाले को 250 रुपये एक दिन के मिलता है। हमे तो बेहद कम राशि दी गयी है। इतना ही नही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को भी लागू नही किया गया। यह बजट किसानों के लिए कोई खास नही रहा। यह सरकार सिर्फ जुमलों और झूठे वादों की सरकार है। मोदी जी ने एलन चुनावी वादा भी नही पूरा किया। हालांकि इस बजट में सरकार ने आम नागरिक को रिझाने और सरकार की साफ़ छवि पेश करने की भी कोशिश की है डालते है उसी की कुछ ख़ास झलकी।

महंगाई-आर्थिक विकास
‘‘हमारी सरकार ने कमरतोड़ महंगाई की कमर ही तोड़ दी। हम महंगाई दर को 4.6% तक ले आए। यह किसी भी सरकार के कार्यकाल की तुलना में कम था। दिसंबर 2018 में सिर्फ 2.19% महंगाई दर रही। अगर हम महंगाई काबू में नहीं करते तो हमारे परिवारों को 35 से 40% अतिरिक्त खर्च करना पड़ता। सात साल पहले की तुलना में वित्तीय घाटा भी हमने कम किया है। करंट अकाउंट डेफिसिट भी जीडीपी का 2.5% रह गया है।’’ ‘‘पिछले पांच साल में जीडीपी किसी भी सरकार के कार्यकाल की तुलना में ज्यादा रही है। आज हम दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमने डबल डिजिट इन्फ्लेशन को काबू किया। इन्फ्लेशन एक प्रकार का छुपा हुआ टैक्स होता है। यह कभी 10.1% था।’’ ‘‘हम 2020 तक न्यू इंडिया बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। हम सभी के लिए शौचालय, पानी, बिजली, घर होने के भारत की संकल्पना कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी होगी और देश आतंकवाद से मुक्त होगा। पिछले पांच साल में भारत ग्लोबल इकोनॉमी में छाया रहा। हम दुनिया में आज सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं।’’ पीयूष गोयल ने बजट भाषण की शुरुआत करते हुए कहा, ‘‘मैं अरुण जेटली की अनुपस्थिति को लेकर चिंतित हूं। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। जनता ने हमें मजबूत जनादेश दिया था। प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने निर्णायक, बेदाग सरकार दी है। हम देश को पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर लाए हैं।’’

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