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गालियों पर आंसू और विज की गालियों पर चुप्पी, वाह रे मोदी सरकार!

चुनाव के 3 दिन पहले पीएम मोदी ने क्यों दिखाई भावुकता?

महेश मेहता | हिसार
ऐन चुनाव के दिन एक भाषण और उनमें नेता की भावुकता ने मुझे अंदर से झगझोर दिया। आखिर क्या कारण था कि आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के आंखों से आंसू छलक गए वह भी तब-जब हरियाणा मेँ 3-4 दिनों में चुनाव होने को है। क्या यह भावुकता वाकई दिल को लगी ठेस का नतीजा है या हरियाणा में भाजपा के प्रत्याशियों की हार का डर? मुझे नहीं पता। वैसे आपको पता है कि ऐन चुनाव के दौरान पीएम मोदी क्या कहकर रोने लगे। ऐसा क्या हुआ उनके साथ कि उनके आंसू आ गए।
दरअसल वह इस बात से भावुक हुए क्योंकि उन्हें “कांग्रेस के नेताओं ने नाली का कीड़ा कहा, पागल कुत्ता कहा, लहू पुरुष कहा, बंदर कहा, मौत का सौदागर कहा।” बस इस कथन से पीएम मोदी के आंखों में आंसू आ गया। अब मेरे दिमाग यह सोच रहा है कि अगर इस बात से पीएम मोदी भावुक हो उठे तो क्या उनको भाजपा के उस कैबिनेट मंत्री “अनिल विज” की बात पर रोना नहीं आया, जो चुनाव के दौरान मतदाताओं को “मां-बहन की गाली और कुत्ता” कहता नजर आ रहा है।
शालीनता, मर्यादा और महिलाओं के अपमान के साथ सिख समुदाय के साथ मां-बहन की गाली भाजपा के नेता अनिल विज द्वारा दिए जाने पर पीएम मोदी भावुक नहीं हुए। अगर वह अपने ऊपर कहे शब्द पर रो सकते हैं तो उन्हें अपने भाजपा के नेता की करतूत पर भी रोना चाहिए जो लोगों को मां-बहन की गाली देता हुआ खुलेआम कुत्ता भी कह रहा हैै। आदरणीय मोदी जी अगर आप कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए ऐसा कह रहे हैं तो फिर आपको अपने पार्टी के हरियाणा के कैबिनेट मिनिस्टर अनिल विज पर भी प्रहार करके रोना चाहिए था।
पीएम मोदी जी आप दूसरे पर आरोप लगाते हुए रोये जिसका मुझे दुःख है मैं चाहूंगा आप अपने उस मंत्री की करतूत पर भी रोएं, जिसने लोगों को गाली गलौज देने में कोई को-कसर नहीं छोड़ीं। 9 अक्टूबर 2018 का मामला ले लीजिये जब तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय मासचिव, हरियाणा-छत्तीसगढ़ के प्रभारी सांसद अनिल जैन के मुख से ऐसे गालियां और असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “चुनाव के बाद इन्हें #&*रहना नहीं है क्या … चुनाव के बाद इन्हें #%*देंगे …” पता है यह नेता गुस्सा क्यों हुए क्योंकि प्रशासन ने नगरपालिका के किराये वाली दुकान से आचार सहिंता का हवाल देख कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के पोस्टर-बैनर निकाल फेंके थे। यह है भाजपा के मंत्रियों का हाल क्या पीएम मोदी जी को कभी इनमें रोना आया?
वैसे मेरे संपर्क में ऐसे कई लोग कह रहे हैं कि कमाल है यह आंसू तब नहीं देखे जब नोटबंदी में कतार में लगे असंख्य लोगों की मौत हो गयी थी, यह आंसू तब नहीं आये जब पुलवामा में हमारे भारतीय जवानो की आतंकवादी हमलो से मौत हुयी। मैं तो कहता हूं दिल में ठेस हो तो रोना जरुरी है।
रोना किसी व्यक्ति की भावुकता को दर्शाता है, मगर यह भावुकता उस समय कहां चली जाती है जब नोटबंदी, बेरोजगारी और आतंकवादी हमले में इतने लोगों की मौत हो जाती है। खैर मुझे तो लगता है कि इस अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल बंद हो जाना चाहिए। मगर क्या इसमें एकमात्र कांग्रेस जिम्मेदार है? क्या भाजपा के मंत्री दूध से धुले हुए हैं? क्या उन्होंने कभी अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया?
क्या उनकी भाषा से किसी को दुःख नहीं होता? क्या अनिल विज की मां-बहन की गाली शोभनीय थी? क्या प्रधानमंत्री अपने इस मंत्री की ऐसी बदजुबानी पर आंसू नहीं बहाएंगे? क्या मुख्यमंत्री अनिल विज द्वारा महिला और बहन के नाम पर गाली देकर उनके प्रतिष्ठा को चोट पहुंचने वाले विज को बक्श देंगे? क्या यह भाजपा का चाल चरित्र अलग नहीं दिखता?
जिस पंजाबी समाज से हमारे सम्मानीय मुख्यमंत्री और शहर के मेयर आते हैं उसी समाज के लोगों को अनिल विज द्वारा गालिया देना गलत नहीं है? क्या पीएम मोदी पर इसपर कोई वक्तत्व या आंसू नहीं बहाने चाहिए? यही सवाल आज आम जनता को दिखाई दे रहा है।
हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैं बहुत सम्मान करता हूं मगर उनकी भावुकता वो भी हरियाणा में चुनाव होने के 3 दिन पहले कहीं न कहीं यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि यह कहीं भाजपा के प्रत्याशी के लगातार विरोध के चलते उनके हार की बौखलाहट तो नहीं? या क्या इस भावुकता से कोई इमोशनल कार्ड तो नहीं खेला गया? यह मैं नहीं बल्कि लोगों के जहन से निकल कर सामने आ रहा है। आगे मतदाता समझदार हंै।
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