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क्या वोटों के लिए जाट आरक्षण और सिख दंगो का मामला उठाना भाजपा के डर का संकेत है! (Video)

हुड्डा की रैली ने तोड़े सारे रिकॉर्ड वहीं पीएम नरेंद्र मोदी की रैली रही फीकी

लोकसभा चुनाव 2019
महेश मेहता | हिसार
सोनीपत और कुरुक्षेत्र के बाद रोहतक की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे कांग्रेस पर जोरदार प्रहार करने की कोशिश की। उन्होंने रोहतक में दीपेंद्र हुड्डा के गढ़ में सेंध लगाने के लिए अपनी पूरी टीम को जिस प्रकार काम पर लगाया था, उसको देखकर लोग सोच रहे थे कि शायद रोहतक की सभा इतिहासिक होगी।
मगर पूरे आत्मविश्वास में भरे रोहतक से कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुडा ने पहले ही यह बयान दे दिया था कि गोहाना की रैली सारे रेकॉर्ड तोड़ेगी और रोहतक की जनता पीएम मोदी को जवाब देगी। और होना क्या था, जिस तरह से लोगों का अथाह सागर रूपी प्रेम दीपेंद्र हुड्डा और भूपेंद्र हुड्डा में बरसता दिखाई दिया उसने सारे रिकार्ड तोड़ दिए।
गोहाना की रैली में जिस प्रकार से लोगों का हुजूम दिखाई दिया उसने पीएम मोदी की रैली को भी फीका करके छोड़ दिया। यह बड़े ही शर्म की बात है कि जिस रोहतक में सेंध लगाने के लिए भाजपा प्रयासरत थी उसको भूपेंद्र और दीपेंद्र हुड्डा की टीम के साथ जनता के प्यार ने चारों खाने चित कर दिया।
मगर इस चुनाव में मुझे इस बात का दुख है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इन कुछ दिनों में जहां जाट आरक्षण आंदोलनों को मंचो पर भुनाने की कोशिश की। जबकि खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने सिख दंगे के काण्ड को उठाकर जातिवाद व तनावग्रस्त स्थिति का माहौल पैदा करने की कोशिश की।
मुझे यह सवाल पूछना है आखिर जो हिसार के भाजपा प्रत्याशी के पिता केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह बड़े जोशोखरोश के साथ कहते हैं कि यह चुनाव जातिवाद पर बटा चुनाव नहीं है। अब वो इस सवाल का क्या जवाब देंगे कि उनके ही पार्टी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ऐसा मुद्दा उठाकर साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने और ठेस पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और मुझे यह भी ताज्जुब होता है कि चुनाव आयोग इस पर संज्ञान तक नहीं लेता।
क्या यह बात खेदजनक नहीं कि खुद भाजपा के ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज में सिख दंगो के बारे में काफी रिपोर्ट पोस्ट कर चुनावी माहौल अंतिम समय में जातिवाद और सांप्रदायिक करने की कोशिश की है। मुझे यह पूछना है कि अगर मोदी लहर है, सभी भाजपा नेता अगर यह मानते हैं कि मोदी लहर है तो उन्हें इस सिख दंगो की बात चुनाव के दौरान उठाने की क्या जरुरत थी।
मुझे लगता है कि जख्मों को खुरेदना नहीं चाहिए। मगर भाजपा ने बाकायद राजीव गांधी की स्पीच और सिख दंगो से पीड़ित लोगों की न्यूज विडिओ डालकर 2-3 साल पुराने बयानों को दिखा कर इस अति संवेदनशील मामले को ऐन चुनाव के दौरान जिन्दा करने की कोशिश की है। इससे यह बात तो साबित होती है कि भाजपा भी कहीं न कहीं यह जानती है कि इस बार न कोई मोदी लहर है न ही जनता उनसे धरातल में संतुष्ट। इसीलिए वह इस प्रकार के मुद्दे उठा रही है।
याद है कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का वह वाक्य जिन्होंने जाट आरक्षण के लिए बाप-बेटे अर्थात भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा समेत कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। यह चुनाव गालियों से होते हुए जाट आरक्षण आंदोलन और अब सिख दंगो तक पहुंच चुका है। पता नहीं आने वाले दिनों में यह राजनीति और कितनी हद्द पार कर समाज में प्रेम भाईचारे को चोट पहुंचाने का काम करते हुए गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम करेगी। व्यथित हूं और चिन्तित हूं कि हमारी युवा पीढ़ी के दिमाग में ये नेता क्या भर रहे हैं।

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