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कुलदीप कांग्रेस में पैठ बनाने में कामयाब

नवीन जिंदल ने हार के डर या भाजपा के दबाव से किया चुनाव लड़ने से इंकार ?
महेश मेहता | हिसार
जैसा की कयास लगाया जा रहा था कि भव्य बिश्नोई को टिकट देने के पक्ष में कांग्रेस हाईकमान बिलकुल नहीं है, मगर कुलदीप बिश्नोई जिद पर अड़े थे कि किसी भी हाल में वह भव्य के लिए टिकट लेकर आएंगे। यह एक ऐसा फैसला था जो यह साबित करने वाला था कि क्या कुलदीप बिश्नोई की कांग्रेस में कोई मजबूत पकड़ है या नहीं? इतना ही नहीं यह फैसला यह भी साबित करता कि अगर क्या कुलदीप हरियाणा के मुख्यमंत्री का दावेदार बन पाएंगे? मगर आखिरकार कांग्रेस पार्टी ने कुलदीप के बेटे को हिसार लोकसभा का सीट देकर यह दिखा दिया कि कुलदीप बिश्नोई की मजबूत पकड़ है।
वहीं ठीक दूसरी तरफ पार्टी ने हुड्डा समर्थकों को 10 में से 5 लोकसभा सीट देकर उनका भी दमखम कायम रखा है। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका गांधी के व्यवक्तिगत हस्तक्षेप के बाद उनका टिकट काटकर मुसीबत मोल ले ली है। इतना ही नहीं यह पहली बार होगा कि कांग्रेस पिता और पुत्र को इस बार साथ लड़ाएगी। इस रोचक गतिविधियों ने एक तरफ इस चुनाव को रोचक बना दिया है तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा के सामने कड़ा मुकाबला भी खड़ा कर दिया है।

कुलदीप ने दिखाया “हम भी किसी से कम नहीं ”
कुलदीप बिश्नोई जो खुद मुख्यमंत्री बनने का खवाब देख रहे हैं वो चाहते थे कि वह केवल हरियाणा की राजनीति में अपनी सक्रियता दिखाए और केंद्र में भव्य की एंट्री करवाएं। हालांकि कांग्रेस के अंदर और बाहर सभी भव्य को हिसार लोकसभा की टिकट देने के खिलाफ थे। खुद पार्टी सूत्र ने भी कहा था कि पार्टी हाईकमान हिसार जैसी सबसे हॉट सीट पर भव्य की जगह कुलदीप को चुनाव लड़वाना चाहते थे। मगर कुलदीप भव्य की टिकट पर अड़े थे। आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने हिसार से पार्टी के गैर जाट नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को टिकट दिया। भव्य बिश्नोई को टिकट दिलाने में कामयाब रहे कुलदीप बिश्नोई के इस फैसले के बाद हाईकमान में न केवल कुलदीप का कद बढ़ा है, बल्कि उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ साबित की है और उन्होंने अन्य कोंग्रेसी नेताओं के सामने चुनौती पेश कर दी है कि वह भी “किसी से कम नहीं”। मुख्यमंत्री की दौड़ में वह सबसे अव्वल हैं।

पिता-पुत्र होंगे चुनावी मैदान में
यह पहला मौका है जब हरियाणा में पिता भूपेंद्र हुड्डा सोनीपत में और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक में एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि पार्टी ने इस बार भूपेंद्र हुड्डा पर ज्यादा विश्वास जताते हुए महागठबंधन न होने पर उन्हें ही चुनाव में उतारने का फैसला लिया है। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि हुड्डा की लोकसभा चुनाव लड़ने की बिलकुल इच्छा नहीं थी। वैसे अब उनके सोनीपत से चुनाव लड़ने से अब मुकाबला कड़ा हो गया है। यहां हुड्डा के ताल ठोंकने से भाजपा के मौजूदा सांसद एवं उम्मीदवार रमेश कौशिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि यहां से कौशिक का जगह जगह विरोध चल रहा है। वहीं रोहतक सीट से दीपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ भाजपा से अरविन्द शर्मा और जजपा से छात्र संघ नेता प्रदीप देशवाल होंगे। जिसके चलते यह सीट बेहद रोचक मानी जा रही है।

क्या भाजपा के दबाव में नवीन जिंदल ने चुनाव लड़ने से किया इंकार ?

बता दें कि हिसार टुडे ने अपनी पूर्व रिपोर्ट में इस बात के संकेत दिए थे कि नवीन जिंदल इस बार कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। दरअसल कई समय से यह चर्चा थी कि जिंदल परिवार भाजपा स बेहद करीबियां बढ़ा रहे हैं और इसीलिए वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते। इतना ही नहीं जानकार यह भी बता रहे हंै कि नवीन जिंदल ने जब कुरुक्षेत्र में कुछ सभाएं आयोजित की थी तब उन्होंने पाया था कि उनके उनके पक्ष में माहौल नहीं है। हवाओं का रुख देखते हुए नवीन जिंदल ने खुद न खड़े होकर अपनी पत्नी को टिकट देने की सिफारिश करना शुरू कर दिया था। बता दें कि कुंभ स्नान के साथ ही जिंदल परिवार ने भाजपा से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली थी। माना जा रहा है कि व्यापार के दृषिकोण से भी जिंदल चाहते थे कि उनकी भाजपा खिलाफ इमेज न हो। इतना ही नहीं उनके ही परिवार के लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं और वह लम्बे समय से यह चाह रहे थे कि नवीन जिंदल परिवार समेत भाजपा में जुड़ जाए। हालांकि नवीन ने इसका कई बार विरोध किया परिणाम स्वरूप आज भी वह कांग्रेस में हंै और उन्हें इस बार अपने हार का डर सताये जा रहा है। इसलिए उन्होंने कोई रिस्क नहीं लिया और निजी कारणों का हवाल देकर चुनाव लड़ने से ही इंकार कर दिया। जिसके चलते आखिरकार कांग्रेस हाईकमान को यहां हुड्डा समर्थक निर्मल सिंह को चुनाव मैदान में उतारना पड़ा। जानकार मानते हैं कि 2019 का चुनाव तय करेगा की नवीन जिंदल किस राह चलते हैं।

टिकट कटने से ललित नागर नाराज, कार्यकर्ता बोले देंगे नोटा को वोट
कांग्रेस हाईकमान ने फरीदाबाद के उम्मीदवार ललित नागर का अचानक टिकट काटकर, टिकट की आस में राम भरोसे बैठे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए अवतार सिंह भड़ाना को टिकट देकर आफत मोल ले ली है। सूत्रों का मानना है कि खुद प्रियंका वाड्रा की सिफारिश और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर अचानक ललित नागर का फरीदाबाद से टिकट काटकर अवतार सिंह भड़ाना को दिया गया। जिससे ललित नगर ने पार्टी के खिलाफ विरोध जताते हुए कहा है कि टिकट के ऐलान के बाद से उन्होंने 9 विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के दफ्तर खोले, 9 विधानसभा के प्रचार सामग्री जैसे बैनर पोस्टर लाकर प्रचार भी शुरू कर दिया था, 100-100 कार्यकर्त्ता हर विधानसभा क्षेत्र में सैंकड़ो गाड़ियों के माध्यम से पार्टी का प्रचार कर रहे थे, पूरा माहौल एक तरफा होने के कारण यहां से कांग्रेस की जीत पक्की थी। नागर ने कहा कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर उस आदमी को टिकट दी जो तीन से चार पार्टियां घूमकर हाल में कांग्रेस में शामिल हुए। ललित नागर ने कांग्रेस के खिलाफ अपना रोष जताते हुए कहा कि वह कांग्रेस के एक ऐसे सच्चे कार्यकर्ता हैं जो मोदी लहर में भी विधानसभा चुनाव जीत कर आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के लिए धरना प्रदर्शन कर चुके हैं, पार्टी का झंडा उठाकर उन्होंने काम किया है, मगर मुझ जैसे सच्चे कार्यकर्ता का पार्टी ने टिकट काट दिया। यही कारण है कि ललित नागर के समर्थक इस घटना की निंदा करते हुए इस बार नोटा पर वोट देने की बात कर रहे हैं। यही कारण है कि इस सीट से अवतार सिंह भड़ाना को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।

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