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किसकी विरासत पर जनता मेहरबान!

प्रियंका गांधी के आगमन के साथ “बृजेन्द्र” की राह मुश्किल, मगर मोदी के नाम का फायदा,भजनलाल की छवि और गैर जाट वोटों के साथ भव्य को लाभ

Hisar Today 

5 साल के रिपोर्ट कार्ड से जनता की संतुष्टि “दुष्यंत” के लिए फायदेमंद

अर्चना त्रिपाठी | हिसार
हिसार लोकसभा चुनाव इस बार बेहद कांटे की टक्कर बनकर साबित होगा। इसलिए इस बार का चुनाव त्रिकोणीय होने की उम्मीद जताई जा रही है। हिसार लोकसभा चुनाव में बदलते समीकरणों के साथ ग्रामीण और शहरी इलाकों में बातें इस चुनाव में मतदाता प्रत्याशियों के तकदीर का फैसला करने वाले हैं। आज हर पार्टी प्रत्याशी जहां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहा है।
मगर हकीकत तो यह है कि यह पार्टी भी जानती है कि इस बार का मुकाबला इतना तगड़ा होगा कि हार जीत का आंकड़ा महज कुछ हजार वोट तय करेंगे प्रत्यशियों की हार -जीत। यही कारण है कि सभी पार्टी असमंजस में है कि क्या जनता हर पार्टी के परफॉर्मेंस को सलाम करेगी या बड़ी गलती करेगी और 5 साल रोएगी। खैर इस बार हिसार लोकसभा चुनाव में तीन दिग्गज पार्टियों के बीच मुकाबला हो रहा है वो है जननायक जनता पार्टी प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला, भाजपा से बृजेन्द्र सिंह और कांग्रेस से प्रत्याशी भव्य बिश्नोई के बीच।

दुष्यंत चौटाला के 5 साल के बेहतरीन रेकॉर्ड से जनता संतुष्ट

हिसार के सेंट मैरी स्कूल से अपनी शिक्षा प्रारंभ कर दसवीं तथा बारहवीं की परीक्षा लॉरेंस स्कूल, सनावर हिमाचल प्रदेश से पास की। पढ़ाई के साथ साथ खेलों में भी रूचि रखने वाले दुष्यंत ने स्कूली जीवन में बाक्सिंग में गोल्ड मेडल और स्कूल की बॉस्केटबॉल टीम की कप्तानी भी की। लॉरेंस स्कूल की ही हॉकी टीम के गोलकीपर भी दुष्यंत चौटाला रहे।
दुष्यंत चौटाला भारतीय टेबल टेनिस फेडरेशन के सीनियर वाईस प्रेजीडेंस रहे। कैलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ साईंस इन बिजनेस एडमिनिस्टे्रशन में बैचलर की डिग्री प्राप्त कर दुष्यंत ने पोस्ट ग्रेजुएट की। सबसे कम उम्र के सांसद के तौर पर अपना नाम दर्ज करवाने दुष्यंत हिसार के मौजूदा सांसद रहे है। वह स्वर्गीय देवीलाल की विरासत को लेकर आगे चल रहे हैं।
यही कारण है कि उनका जमीं से जुड़ाव ज्यादा है जो उनके पक्ष में जाएगा। विपक्ष में होते हुए उन्होंने जिस प्रकार शहर के लिए कार्य करवाए वो इस बार चुनाव में उनको लाभ पंहुचा सकता है, मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की इन 5 सालो में उन्होंने हिसार की जनता के बीच अपने विकासशील कार्यों के दम पर जो जगह बनायी है वह उनके लिए इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण काम कर रहा है। दुष्यंत के नाम रिकॉर्ड दर्ज है जिन्होंने असंख्य मुद्दों पर सदन में सभी का ध्यान आकर्षित करवाकर, प्रश्न उठाकर हिसार की जनता को न्याय देने का काम किया है। इतना ही नहीं गांव से लेकर शहर में किये गए विकासशील कार्यों के कारण उनको इस चुनाव में लाभ पहुंच सकता है, साथ ही इतने सालो में बेदाग छवि भी दुष्यंत के लिए मददगार साबित हो सकती है।
सर छोटूराम के विशाल प्रतिमा के अनावरण में बड़े नेताओं के हाथो उद्घाटन के लिए नहीं मिल रहे समय के कारण जिस प्रकार उन्होंने आंदोलन छेड़ा और सर छोटूराम की प्रतिमा का अनावरण करवाने पर बाध्य किया उससे उनकी अलग छवि लोगों के बीच गयी जिसका लाभ दुष्यंत को हो सकता है। 5 साल का ट्रैक रेकॉर्ड इसबार उनको लाभ पंहुचा रहा है, हालांकि उनके खिलाफ यही बात जाती है कि वह क्षेत्रीय पार्टी से आते हैं और उनके पीछे भाजपा या कांग्रेस की तरह कोई और लोकप्रिय चेहरा नहीं है।

भव्य बिश्नोई को मिलेगा भजनलाल के कार्यों का आशीर्वाद

आदमपुर के विधायक कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर अपना भाग्य आजमा रहे है। सेंट एंथोनी कॉलेज ओक्सफोर्ड यूनिवसिर्टी से एम.एस.सी. (राजनीतिक अर्थशास्त्र) में करके उन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। बता दें की स्वर्गीय भजनलाल जी ने हिसार की जनता के विकास में यूनिवर्सिटी के साथ हिसार के विकास की दिशा में जो कदम बढ़ाया था, उनके इन्ही कार्यो का लाभ भव्य बिश्नोई को इस बार लोकसभा चुनाव में हो सकता है। इतना ही नहीं अपने दादा की तरह विकास की बात करने वाले भव्य बिश्नोई इस बार हिसार को राजधानी बनाने के साथ चुनाव में उतरे हैं। जिसके सर्वांगीण विकास के लिए उन्होंने ब्लू प्रिंट भी तैयार किया। इसलिए उनके सुनियोजित प्लान का फायदा भव्य को होगा। साथ ही पिता कुलदीप बिश्नोई और मां रेणुका बिश्नोई के विधायक पद पर होने का लाभ भी भव्य बिश्नोई को इस चुनाव में मिल सकता है। इतना ही नहीं नॉन जाट चेहरा होजाने का लाभ भी भव्य को इस चुनाव में हो सकता है। इतना ही नहीं कांग्रेस के एकजुटता होने हुड्डा के हिसार जिला में भव्य के प्रचार के लिए आना, सावित्री जिंदल का साथ आना और सबसे प्रमुख बात कांग्रेस के चर्चित चेहरे प्रियंका गांधी और नवजोत सिंह सिद्दू का भव्य के लिए चुनाव प्रचार करना भी उनको बनहुत लाभ पंहुचा सकता हैै। हालांकि उनके खिलाफ यही बात जाती है कि वो भी नया चेहरा है, राजनीतिक अनुभव उन्हें नहीं है।

मीडिया मैनेजमेंट में भाजपा पूरी तरह फेल दुष्यंत और भव्य की टीम ने मारी बाजी
इस हिसार लोकसभा चुनाव को भाजपा ने अपने नाक का सवाल बना रखा था, अमित शाह की हाजिरी इस बात के पहले ही संकेत दे चुकी थी। मगर इस बार हिसार लोकसभा चुनाव में हम बेहतर मीडिया मैनजमेंट की बात करें तो सभी पार्टियों की तुलना में भाजपा एकदम पिछड़ी और अनुभवहीन साबित हुयी। खबरों में बार बार त्रुटिया, नामों में गलती, व्यक्तियों में गलती, फोटो खींचने वाले नौसीखिए, प्रत्याशी की प्रेस नोट भेजते थे मगर फोटो नहीं, प्रत्याशी की तस्वीर भी ढंग से नहीं खींची गई, जो कहना कहीं न कहीं उनकी अनुभवहीनता का जीता जगता नमूना बनकर साबित हुआ। जो मीडिया मैनेजमेंट के कारण भाजपा का नाम था वह इस चुनाव में भाजपा के लिए शर्म का कारण बना। नौबत यहां तक थी कि स्वर्गीय लोगों को भी भाजपा के मीडिया मैनेजमेंट की टीम ने जिन्दा बताया, वहीं ठीक दूसरी तरफ नई पार्टी होने के बावझूद जननायक जनता पार्टी के प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला की मीडिया मैनेजमेंट टीम ने बहुत ही अलग प्रकार से दुष्यंत को जनता के बीच का नेता बनाने में कामयाबी हासिल की। खुद दुष्यंत ने भी समय समय पर अपने कार्यो का खुद वीडियो के जरिये सत्ताधारी पार्टी की करतूतों को उजागर किया और वह लोगों के बीच जिस तेजी से सर्कुलेट हुआ उसने चुनाव के दौरान अपने कार्यो को जनता के सामने लाने में कामयाब रहे और इस प्रकार उन्होंने बेहतरीन मीडिया मैनेजमेंट का परिचय दिया। वही जब बात करे कांग्रेस की तो कांग्रेस के मीडिया मैनेजमेंट की टीम ने भाजपा जैसी दिग्गज पार्टी को पछाड़ते हुए बड़े ही सलीके से अपनी कैमपैनिंग को अंजाम दिया। कांग्रेस की टीम ने भव्य, कुलदीप और रेणुका बिश्नोई के हर कार्यक्रम की बेहतरीन खबर और तस्वीरों के साथ उनकी मीडिया मैनेजमेंट टीम ने भव्य के पक्ष में मीडिया में हवा बनाने में कामयाब रही।

बृजेन्द्र सिंह मोदी लहर और पिता के सहारे

केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेन्द्र सिंह के लिए इस चुनाव में सबसे सकरात्मक पहलू यह है कि वह उस भाजपा पार्टी से है जिसकी केंद्र और राज्य में सत्ता है, पिता मंत्री और माँ विधायक है। इतना ही नहीं पूर्व आईएएस अफसर रहने का उनको फायदा मिल सकता है। सर छोटूराम के खानदान से होने के कारण उनको विरासत का फायदा मिल सकता है. हालाँकि उनके खिलाफ यह बात जाएगी वह है उनके पिता का अन्य भाजपा नेताओ से बर्ताव। 5 साल में उनके पिता केंद्रीय मंत्री रहे मगर अपने उल्लेखनीय कार्य वह उपलब्धिया गिनाने में वह नाकामयाब साबित हुए। हिसार में फ़ैक्टरिया लाने और रोजगार देने में नाकाम होने के कारण भी यह पहलू उनके बेटे बृजेन्द्र के खिलाफ जा सकता है। इतना ही नहीं भाजपा के कुछ कार्यकर्ता भी अंदरूनी तौर पर बीरेंद्र सिंह से नाराज है साथ ही प्रधानमंत्री की हिसार में एक भी सभा न होना भी उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। जनता के सामने नया चेहरा है। इतना ही नहीं जाट प्रत्याशी के तौर पर बृजेन्द्र सिंह को देखा जा रहा है मगर जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े यशपाल मलिक से अच्छे सम्बंधों के कारण भाजपा की दुहरी नीति सामने आने से बृजेन्द्र को नुकसान होगा। मगर बताकर आईएएस अफसर उन्होंने जा काम किये, और इतने सालो में उनके चरित्र में कोई दाग न लगा यह उनको चुनाव में फायदा पंहुचा सकता है।साथ ही अमित शाह और मनोहर लाल खट्टर के चुनाव प्रचार का लाभ भी बृजेन्द्र को होगा।
ऐसे में सवाल यही है कि बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक कॅरिअर इसी चुनाव में दांव पर लगा है।

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