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कांग्रेस की डूबती नैय्या का आखिरी सहारा कुलदीप बिश्नोई

जजपा से भी पिछड़ी कांग्रेस, अशोक तंवर के अध्यक्ष बनने के बाद रसातल में पहुंची पार्टी

जाटों का झुकाव जेजेपी की तरफ, भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा व रणदीप हुए फेल

महेश मेहता | हिसार

बांगर के रण ने इस बात को जरूर साबित कर दिया कि हरियाणा कांग्रेस पर लगा ग्रहण लगता है कांग्रेस के ही स्वार्थी नेताओं के कारण कभी छटने वाला नहीं है।

याद है आपको मेयर चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की शर्मनाक हार और जींद उपचुनाव में कांग्रेस की पूरी फोर्स के बावजूद बड़ी मुश्किल से जमानत बचाने की नौबत सुरजेवाला पर आना।

यह इस बात का संकेत है कि हरियाणा में कांग्रेस की स्थिति कमजोर नहीं बल्कि बेहद शर्मानक है।आखिर खुद को जाट नेता और सीएम पद का उम्मीदवार कहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और हरियाणा में कांग्रेस का मजबूत संगठन खड़ा करने का दावा करने वाले प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की काबिलियत कहां गायब हो गई? कहां गए उनके बड़े-बड़े ढींगे?

जनता के बीच इन नेताओं का क्या रसूख है? उसकी जींद उपचुनाव के नतीजों ने बहुत बुरी तरह धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। यह बात कांग्रेस के सभी नेता जानते थे कि अगर जींद उपचुनाव में रणदीप सुरजेवाला की जीत हुई तो उनकी सीएम की दावेदारी मजबूत हो जाएगी।

यही कारण है कि जब राहुल गांधी के निर्देश पर रणदीप सुरजेवाला को चुनाव में उतारा गया, तो उनके नंबर और प्रतिमा राहुल गांधी के सामने धूमिल करने की चाल कुछ कांग्रेसी नेताओ ने चल दी। याद है सुरजेवाला के नामांकन के दौरान रामबिलास शर्मा और हुड्डा के बीच का वह वक्तत्व जिसमें उन्होंने कहा था “तेरा कांटा लगता है निकल गया।” आज जींद उपचुनाव के नतीजों ने हुड्डा की हसरतों को जरूर पूरा कर दिया।

कुलदीप के हाथ में होती कमान तो बदल सकते थे हार को जीत में, अकेले दम पर चलाई है पार्टी

हरियाणा में एक के बाद एक दिग्गज नेताओं के बावजूद, कांग्रेस की हरियाणा में नई क्षेत्रीय पार्टी जजपा से भी बद से बद्दतर हालत को देखते हुए कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को आज दुबारा चौधरी भजनलाल की कमी खलने लगी है।

स्वर्गीय भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई को आज कांग्रेस के कट्टर समर्थक और जुझारू कार्यकर्ता आशा भरी नजरों से देख रहे हैं।

क्योंकि वह जानते हैं कि कुलदीप बिश्नोई की तरफ नेतृत्व क्षमता और सबको साथ में लेकर चलने की कला सिर्फ कुलदीप बिश्नोई ही जानते हैं। आज जिस प्रकार से हरियाणा में कांग्रेस का संगठन बूथ स्तर पर कमजोर हुआ है, लगातार चुनावों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ रहा है।

उससे जाट नेताओं से लोगों का मोह भंग हो गया है। आज लोगों को लगता है कि भाजपा को अगर कोई कड़ी टक्कर देने का साहस रख सकता है तो वो बस कुलदीप बिश्नोई ही है।

असंतुष्ट नॉन जाट का झुकाव बढ़ रहा है लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी की तरफ

बता दें कि इस बार जींद उपचुनाव में जिस प्रकार से जजपा और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी को वोट मिले उससे यह तो तय है कि लोग भाजपा से खुश नहीं है। वो भाजपा का पर्याय हरियाणा में खोज रहे हैं। ऐसे में लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के उम्मीदवार को इतना वोट मिलना और जाट वोटों का जजपा की तरफ मुड़ना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस की खराब स्थिति को देखते हुए लोग पर्याय के तौर पर अन्य पार्टी को वोट देना कबुल कर रहे हैं, मगर कांग्रेस को नहीं।

इतना ही नहीं आज कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के शासन में कांग्रेस की पकड़ कमजोर है और पार्टी में हुड्डा का डर है, इसलिए काफी कांग्रेसी कार्यकर्ता भी हाशिये में आती कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इसलिए अगर कांग्रेस को हाशिये पर जाने से बचाना है तो यह जरुरी हो गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कोई बड़ा फैसला ले।

बता दें कि राहुल गांधी हरियाणा के पैर्टन को देख यह समझ चुके हैं कि अब हरियाणा में जाट चेहरा नहीं बल्कि नॉन जाट चेहरा ही करिश्मा कर सकता है। भाजपा इसी का जीता जागता उदाहरण है। यही कारण है कि अगर भाजपा को टक्कर देनी है तो राहुल गांधी को यहां से नॉन जाट चेहरे को ही फ्रंट में लाना होगा। ऐसे में हरियाणा में नॉन जाट चेहरे के तौर पर कुलदीप बिश्नोई के अलावा और कोई दूसरा चेहरा नहीं बचा है।

प्रदेश में हर क्षेत्र में लोगों से सीधे सम्बंध हैं कुलदीप का पार्टी उठा सकती है फायदा

कुलदीप ने प्रदेश की राजनीति का हर स्वाद चखा है, समय के साथ परिपक्व राजनेता के गुण उनमें दिखाई देने लगे हैं। वे आगे बढ़कर बड़ी जिम्मेवारी न होते हुए भी हर जिम्मेवारी निभाते नजर आ रहे हैं।

वे कड़वी यादों को भूलाकर पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं। उन्हें अब हुड्‌डा के साथ मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाने में कोई गुरेज नहीं हैं। गौरतलब है कि अब तक हरियाणा में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी आलाकमान राहुल गांधी ने हुड्डा को मौका दिया, अशोक तंवर को मौका दिया, रणदीप सुरजेवाला को भी मौका दिया, मगर कोई भी उनकी कसौटी में खरा नहीं उतरा।

ऐसे में जींद उपचुनाव के बाद हो सकता है कि कुलदीप बिश्नोई पर ही राहुल की आखिरी उम्मीद टिकी है। क्योंकि यह सभी जानते हैं कि राहुल गांधी ही कुलदीप को बैक फुट से फ्रंट फुट पर लाए थे।

ऐसे में अब राहुल गांधी को भी यह लगने लगा है कि हरियाणा में कांग्रेस की गिरती साख को बचाना है और भाजपा के नॉन जाट चेहरा के तौर पर मशहूर मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अगर कड़ी टक्कर देनी है तो उन्हें कुलदीप बिश्नोई पर ही अपना आखिरी दांव खेलना पड़ेगा।

क्योंकि कुलदीप का आज भी कार्यकर्ताओं के बीच मधुर सम्बन्ध और कांग्रेस नेताओं के बीच मजबूत पकड़ है। जो कांग्रेस को हरियाणा में मजबूत करने के लिए काफी है। इतना ही नहीं बेदाग छवि और सभी 36 बिरादरी में लोकप्रियता के साथ हरियाणा में उनका कोई काट नहीं है।

यही कारण है कि अब यह कहना गलत नहीं होगा कि कुलदीप बिश्नोई ही कांग्रेस की डूबती नैय्या को ही पार लगा सकते हैं। आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण दिखाई दे सकते हैं। आप व जजपा का समझौता सिरे चढ़ सकता है ऐसे में कांग्रेस को फ्रंट फुट पर आकर खेलना चाहिए।

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