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एड्स पीड़ित ने पत्नी के साथ की बर्बरता, बेटी से किया रेप का प्रयास, डॉक्टरों ने की इलाज में कोताही

Hisar Today 

  • सुप्रीम कोर्ट की अवेहलना कर डॉ विष्णु मित्तल ने कहा कि मुझे डॉ धर्मेंद्र ने दिए आदेश मत करो पुलिस को फोन

  • पीड़िता और उनके रिश्तेदारों के साथ भी किया बुरा बर्ताव

  • हिसार टुडे के हस्तक्षेप के बाद सीएमओ के संज्ञान में आया पूरा मामला, तुरंत लिया एक्शन और डॉ मित्तल को पढ़ाया सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन का पाठ

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट दिशानिर्देश जारी कोई है कि अगर अस्पताल में कोई रेप पीड़ित, एसिड पीड़िता आती है तो उसका तुंरत इलाज करवाकर पुलिस को जानकारी देना अनिवार्य है। परंतु सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए हिसार सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने निर्भया कांड जैसे हालात से गुजर रही रेप पीड़िता के साथ अमानवीय व्यवहार करके मानवता को तार तार कर दिया।
हांसी के करीब स्थित मैय्यड़ में रहने वाली रेप पीड़ित महिला के साथ उनसे पति ने जबरदस्ती करते हुए उसके निजी भाग में पत्थर डाल दिया। और इतना ही नही उसकी 3 साल की बेटी के साथ बलात्कार करने की कोशिश करने लगा। जब महिला को दर्द असहनीय हो गया तो सुबह उनके पड़ोसी ने उसे सिंघला हस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर ने उनके निजी पार्ट से पत्थर निकालकर सिविल हस्पताल भेज दिया। मगर सिविल हस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में सुबह 11 बजे से हस्पताल आने के बाद भी रेप पीड़िता के साथ डॉक्टर ने बड़ा ही अमानवीय व्यवहार करते हुए न तो उसका इलाज किया और न ही इसकी जानकारी पुलिस को दी। रेप पीड़िता ने हिसार टुडे को बातचीत में यह साफ बताया कि डॉ विष्णु मित्तल ने उन्हें कहा है कि वह सदर थाने जाए, मगर इस दर्द में उसका वहां जाना बेहद मुश्किल है। इतना ही नही वह यह भी कहने लगी कि डॉ बड़े बुरे तरह से बर्ताव कर रहा है। ऐसा कह कर वह रोने लगी। सिविल अस्पताल के इन डॉक्टरों का खराब बर्ताव का आलम इतना था कि जब हिसार टुडे ने उनसे पूछा कि वह पुलिस को क्यों इत्तला नही कर रहे? क्यों मरीज का इलाज नही कर रहे, तब डॉ मित्तल ने कहा कि उन्हें डॉ धर्मेंद्र ने ऐसा करने से कहा है। इतना ही नहीं जब हमने उन्हें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन का हवाला दिया तो अपनी गलती और अपने अहम के कारण डॉ मित्तल भड़क गए। बता दें कि सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के इस बर्ताव पर जब हिसार टुडे ने सीएमओ के संज्ञान में लाया तो उन्होंने मौके की गंभीरता समझते हुए इस क्रूरता को देखते हुए व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप कर पीड़ित से मुलाकात की और उसे तुरंत इलाज दिलवाया। सामान लाने की पति करता था डिमांड, डिमांड पूरी न करने पर महिला के साथ हाथापाई और जबरदस्ती रेप करने की घटना को देता था अंजाम।
पीड़ित ने हिसार टुडे को दिए बयान में कहा कि वह गरीब घर से है, उसके पिता नही हैं और मां की कभी भी मृत्यु हो सकती है। उसकी पहले शादी में इसकी 3 साल की लड़की थी, जिसे वह दूसरी शादी के बाद ले आयी, मगर उसका पति मायके से सामान लाने का उसपर दबाव बनाता और मांग न पूरी करने पर उसके साथ मारपीट कर जबरन करता था रेप। बेटी से भी बलात्कार करने की धमकी देता था।

सीएमओ के हस्तक्षेप के बाद एक्शन में हस्पताल
हिसार टुडे द्वारा पीड़िता के साथ सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के अभद्र और अमानवीय व्यवहार की जानकारी देने के बाद सीएमओ दहिया ने तुरंत कठोर एक्शन लिया, वह पीड़िता से मिलने आये और उन्होंने पीड़िता के साथ खराब बर्ताव करने वाले डॉ विष्णु मित्तल को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन बताई और उन्हें तुरंत कार्यवाई करने के आर्डर दिए।

मामला
पीड़ित महिला का आरोप है कि शादी के बाद उसके पति ने बताया कि उसे एड्स है, मगर रात पति ने उसे मायके से समन लेने के लिए मारपीट की और बिना निरोध संबध बनाने के दबाव बनाया, पीड़ित महिला ने माना किया तो उसके पति ने धमकी दी कि अगर वह नही करेगी तो उसकी बेटी के साथ बलात्कार करेगा। सम्बन्ध बनाने के दौरान उसके पति ने पीड़िता के निजी भाग में पत्थर डाल दिया। जब दर्द से महिला ने इसके विरोध किया तो उसके पति ने हाथापाई कर उसकी बच्ची को जबरन कमरे में ले जाकर उसके कपड़े उतारने लगा, मगर पीड़िता ने धक्का दिया और अपनी बेटी को टॉवल से लपेटकर खुद से बांध लिया और अपने रिश्तेदारों को फोन लगा कर अपनी और अपनी बच्ची की जान बचाई

पिता ने की बेटी से कई बार बलात्कार की कोशिश
पीड़िता का आरोप है कि उसकी 3 महीने पहले ही शादी हुई ही, मगर जब से वह आयी है उसका पति कई बार उसके साथ मार-पीट के साथ उसकी बेटी से भी जबरन बलात्कार की घटना को अंजाम देने की कर चुका है कोशिश। पीड़िता ने बताया कि कई बार उसका पिता अपनी बेटी के कपड़े उतारकर उसके साथ बलात्कार करने कमरे में जबरन लेटा था, मगर बड़ी मुश्किल से उसने अपनी बच्ची की जान बचाई।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश रेप पीड़िता और एसिड पीड़ित महिला का सिविल अस्पताल में तुरंत इलाज करने के लिए सभी सरकारी अस्पताल में सुकून सेंटर या उपस्थित डॉक्टरों के माध्यम से पीड़िता का तुरत इलाज होना अनिवार्य है और ऐसा न करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ दंडनीय अपराध के प्रावधान है।

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