टुडे न्यूज़ताजा खबरराजनीतिहरियाणाहिसार

अभय के आरोप कुलदीप का तंज

2014 में दुष्यंत की जीत के आरोप पर कुलदीप का तंज #AccidentalMPHisar

हिसार
यह सवाल उठाना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि हरियाणा की सियासत में पार्टियों की आपसी धोखेबाजी और टिकट की बिकी का सनसनीखेज आरोप लगा है। ये आरोप और कोई नहीं बल्कि खुद इनेलो नेता अभय चौटाला लगा रहे है। जिसने फिर एक और बार राजनीति में एक चर्चा शुरू कर दी है। तभी तो अभय के आरोप लगते ही भुक्तभोगी कुलदीप बिश्नोई का अचानक ट्वीट आता है. जिसमें हिसार लोकसभा चुनाव में दुष्यंत से हारे कुलदीप बिश्नोई के तंज भरे ट्वीट में वह लिखते है
#AccidentalMPHisar
छल से जीता रण तो फिर क्या जीता? छल, फरेब और झूठ उजागर आज सरेआम हुआ। बता रहे चिल्ला-चिल्ला कर खुद ही ‘वो’ ईमानदारी, सच्चाई और लोकतंत्र का कैसे कत्लेआम हुआ। दरअसल इनेलो नेता अभय चौटाला आज पारिवारिक विवाद से इतने ज्यादा परेशान हो चुके है कि वह अब ऐसे ऐसे बयान खुलेआम दे रहे है जिसने हरियाणा की राजनीति में बहुत भूचाल ला दिया है। चुनाव में टिकट की बिक्री का प्राय आरोप लगता था, मगर पहली बार है कि किसी नेता ने चार साल बाद खुले आम खुलासा किया की कैसे अपने चहिते को सांसद बनाने के लिए एक पार्टी ने कई पार्टियों की मदद ले कर चुनाव में जीत हासिल की। अभय चौटाला ने यह आरोप जिस पर लगाया है वो और कोई नहीं बल्कि उनके बड़े भाई अजय चौटाला और भतीजे सांसद दुष्यंत चौटाला है।
अभय चौटाला ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए यह दवा किया है कि अजय चौटाला ने अपने बेटे दुष्यंत सांसद का चुनाव जिताने के लिए इनेलो पार्टी से गद्दारी करते हुए जयप्रकाश, अभिमन्यु, धनखड़, व जिंदल के साथ सौदेबाजी की। वही कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के प्रत्याशी नवीन जिंदल की मदद करने की एवज में हिसार में उनसे मदद ली। इतना ही नहीं उन्होंने अजय चौटाला पर फतेहाबाद, अटेली, और बल्लबगढ़ में 50 लाख रुपए में टिकट बेचने का भी आरोप लगाया।

कांग्रेस डर्टी पॉलिटिक्स शुरू : जेपी बोले अभय माफी मांगे नहीं तो केस होगा दर्ज
जेपी या यूं कहें जयप्रकाश आज खुद अपने बेटे के लिए टिकट के दौड़ में लगे हैं। ऐसे में अचानक चुनाव के दौरान सीटों की सौदेबाजी में उनका नाम सामने आने से न केवल मतदाता बल्कि खुद उनके लिए भी चुनाव जितना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जयप्रकाश ने हाल में बयान देते हुए कहा कि अभय चौटाला माफी मांगे वरना उनके खिलाफ मुकदमा दाखिल करवाएंगे। खैर इस बात को लेकर जयप्रकाश कितना गंभीर होते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

अभय का बयान पॉलिटिकल बेवकूफी!

गौरतलब बात है कि जींद उपचुनाव में इनेलो की पूरी ताकत भी उनके प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बचा पाई। ऐसे में राजनीतिक पंडितो का मानना था कि हो सकता है अभय चौटाला को इनेलो पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए गठबंधन का सहारा लेना होगा। मगर जिस प्रकार से अपने भाई अजय चौटाला पर आरोप लगाते लगाते उन्होंने इसमें भाजपा और कांग्रेस के भी नेताओं को घेर लिया। उससे कहीं न कहीं इन दोनों ही पार्टी के सामने उनके गठबंधन के दरवाजे बंद हो जाएं। अभय चौटाला को बाद में समझ आया कि उनका यह बयान उनकी पॉलिटिकल गलती थी।

हरियाणा की निगाहें इन दिनों हिसार की सियासी खबरों पर टिकी हुई है

  •  क्या यह मुमकिन है कि हिसार से दुष्यंत को जिताने के लिए इनेलो के तत्कालीन नेता अजय चौटाला ने भाजपा और कांग्रेस से हाथ मिलाया था ?

  • क्या इस चुनाव में कुलदीप बिश्नोई को हरवाने के लिए गठबंधन में रही भाजपा ने कुलदीप से दगाबाजी करते हुए दुष्यंत का साथ दिया था?

  • क्या लोकतंत्र के साथ मजाक बनाते हुए इनेलो के तत्कालीन नेता अजय चौटाला ने अपने बेटे दुष्यंत चौटाला को जितवाने के लिए पार्टी के साथ दगाबाजी की?

  • क्या जिंदल परिवार ने नवीन जिंदल को कुरुक्षेत्र जितवाने के लिए इनेलो से सौदेबाजी की थी?

क्या दुष्यंत की जीत धोखेबाजी से और कुलदीप बिश्नोई के साथ अपनों ने दिया दगा!

आज अभय चौताल के आरोपों के बाद यह सवाल उठा खड़ा हुआ है कि सदन में लोकतंत्र की दुहाई और हरियाणा के ज्वलनशील मुद्दे उठाने वाले सांसद दुष्यंत चौटाला की यह जीत अजय चौटाला के साम, दाम, दंड, भेद का परिणाम है ? क्योंकि खुद कुलदीप बिश्नोई और रेणुका बिश्नोई काफी बार बता चुकी हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में उनके ही गठबंधन की पार्टी भाजपा ने उनके साथ धोखेबाजी करते हुए इनेलो के लिए काम किया। अगर तब के वोटों के आकड़े उठाकर देखा जाए तो कांग्रेस के प्रत्याशी को जो वोट मिले थे उसने कहीं न कहीं ये साबित किया है कि जिस जिंदल परिवार की हिसार में तूती बोलती थी, वह जिंदल परिवार कांग्रेस ने अपने ही उम्मीदवार को लोकसभा में वोट दिलवाने में कामयाबी नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा होता है कि क्या अभय सच कह रहे हैं कि कुरुक्षेत्र में नवीन जिंदल को जिताने के एवज में हिसार लोकसभा में इनेलो के साथ सेटिंग हुई थी। सूत्रों के हवाले से इस बात का खुलासा होता है कि चुनाव के एक दिन पहले जिंदल हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। यह बैठक किसके साथ और क्या हुई इसका अंदाजा तो आपको उस दौरान के चुनावी परिणामों ने ही बता दिया होगा।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close