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पंजाबी सिख सम्मेलन में पंजाबियों के हितों पर हुई चर्चा

Today News | सिरसा

पंजाबी समुदाय को एकजुट होकर अपने राजनैतिक हितों की लड़ाई को लडऩा होगा। पंजाबी बिरादरी मेहनती तो बहुत है परतु राजनीति में पंजाबी समाज की भागीदारी बहुत कम है। उन्हे अपना हक नहीं मिल रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि राजनीति में भागीदारी बढ़ाई जाए और साथ समाज के हितों की रक्षा के लिए प्रयास किया जाए। यह बात दिदार सिंह नलवी, कंबोज सभा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रेेम सिंह कंबोज, परमजीत सिंह माखा, मलकीत सिंह गंगा, राष्ट्रीय पंजाबी सभा के प्रदेशाध्यक्ष भूपेश मेहता, कुलदीप सिंह गदराना, राजेंद्र देसूजोधा, पंजाबी सत्कार सभा के अध्यक्ष प्रदीप सचदेवा ने बतौर मुख्य वक्ता कही। वक्ताओं ने कहा कि पंजाबी समाज शिक्षित है और अपनी मेहनत के बल पर तरक्की की राह पर है, परंतु अभी भी समाज के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज के व्यक्ति मेहनती, मिलनसार जुझारू होते है। वह अपनी मेहनत के बल पर अपना व समाज का नाम रोशन करते है। आज के बदलते राजनीतिक परवेश में पंजाबी समाज का एकजुट होना आवश्यक है। आज समय की माग है कि हम सब इकठे मिलकर चले। तभी हमारा व हमारे समाज का भला हो सकता है। अगर हम एकजुट न हुए तो हम हर जगह पिछड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब से अलग होकर जब से हरियाणा प्रदेश अस्तित्व में आया है, तब से पंजाबियों की अनदेखी हुई है। पिछले 5 दशक से आज तक हरियाणा के पंजाबी व सिख समाज की किसी भी क्षेत्र में सुध नहीं ली गई है।

अब वह समय आ गया है, जब पंजाबी व सिख समाज के लोगों को अपने अधिकारों की लड़ाई लडऩे के लिए संगठित होने की आवश्यकता है। इस अवसर पर मौजूद हजारों पंजाबियों ने एकजुटता के साथ अपने हितों की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया। इस दौरान मांग जताई गई कि पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा दिया जाए और पूरी तरह से लागू किया जाए।

 

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