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जीवन एक सिक्के की तहर है जिसमें सुख भी है और दुख भी: स्वामी मण्डल

अक्षर धाम में स्वामी ज्ञान मण्डल व स्वामी त्याग निष्ठ महाराज ने स्थानिय शकुंतला गार्ड में आयोजित सत्संग में कहे।

हिसार टुडे ।भिवानी

जीवन एक सिक्के की तरह है जिसमें सुख भी है और दुख भी है। इस युग में राजा भी दुखी है और लंका भी दुखी है। लेकिन आप यदि सत्संग से जुड़े है तो आपका जीवन सुख और दुख से ऊपर सुखमय हो सकता है। यह विचार अक्षर धाम में स्वामी ज्ञान मण्डल व स्वामी त्याग निष्ठ महाराज ने स्थानिय शकुंतला गार्ड में आयोजित सत्संग में कहे। स्वामी यहां अक्षरधाम के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देने के लिए पहुंचे। उन्होंने उपस्थित भक्तजनों को स्वामीनारायण मंदिर अक्षरधाम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने चलचित्र के माध्यम से दिल्ली व गुजरात के अक्षरधाम अहमदाबाद के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक पूरे विश्व में 194 देशों के नागरिक अक्षरधाम मंदिर देख चुके हैं व बहुत से देशों में अक्षरधाम मंदिर बन चुके हैं व बहुत जगह रहे है जोकि भारत की संस्कृती को विश्व के हर कौने में पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आपकी प्रतिष्ठा, आपका वैभव, आपका गोरव, आपकी सुख और शांति प्रदान वही कर  सकता है अपितु सत्संग ही जीवन को स्थिर रख सकता है। भगवान का सत्संग और शस्त्रों का ज्ञान ही आपको सुख प्रदान कर सकता है। स्वानी ज्ञान मण्डल ने बताया कि दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर 11 हजार कारीगरों के द्वारा 5 साल में ही पुरा किया गया था। उन्होंने बताया कि आज अक्षरधाम के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों को दुर करने का संदेश निरंतर किया जा रहा है। इस अवसर पर सीबीएलयू कुलपति राजकुमार मित्तल, सुखबीर सिंह, सीबीएलयू से पवन गुप्ता, डीपीएस प्रधानाचार्या अनीता शर्मा, वैश्य कॉलेज निदेशक प्रोमिला सुहाग, सुनीता भरतवाल, पार्षद मुकेश रहेजा, डा. राज महता, एडवोकेट बृजलाल, धर्मपाल देवसर, उपेन्द्र, डा. सतबीर सिंह, आरएल राय, हरिन्द्र सिंह, रामकिशन मुखिजा, योगेश मेहता, पियुश गुप्ता, ललित कुमार, हिमांशु, ओमप्रकाश, रजनीश, प्रवेश गुप्ता, रोहित भाकर, शर्मीला, मोनिका, छाया,मनिषा अहलावत, नंदिनी, नेहा, सारीका, सोनम, सवीता, रेखा, भारती, रिंकु,एसपी जोशी, पुष्पा जोशी, विष्णुकांत, मनोज भरतवाल व रितेश आदि उपस्थित थे।

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