धर्मकर्म

श्राद्ध पक्ष का महत्व व कर्तव्य कर्म

श्राद्ध से अिभप्राय श्रद्धा से है

Hisar Today

पं. राजेन्द्र कोशिक सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य
पं. राजेन्द्र कोशिक
सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य

शास्त्रों के अनुसार अश्विन कृष्ण पक्ष से सृष्टि की रचना का आरम्भ होता है। इस समय संसार में आत्मा ही विराजमान थी। न नक्षत्र, न ही गृह, न ही देवता, न ही मनुष्य, मूर्त रुप में थे। कार्तिक में ग्रह, नक्षत्र, देवता की उत्पति हुई व धन तथा दृव्यधन तथा धरती को सभी अधिकार व अधिकार प्राप्त हुए। दिवाली के दिन महालक्ष्मी ने सभी को पद व अधिकार देकर सभी देवी देवताओं काे आशिर्वाद देकर अर्न्तध्यान हो गई। विष्णु को लक्ष्मी, शिव को गौरी व ब्रह्मा को सरस्वती प्रदान की। विष्णु को विश्व का पालन पोषण, ब्रह्मा के सृष्टि रचना का कार्य व शिव को संसार का विनाश या सृष्टि में बाधा आने पर संकट नाश का अधिकार दिया। कार्तिक शुक्ल एकादशी से सभी देवता अपने-अपने कार्य में लगाए। अत: आश्विन कृष्ण पक्ष श्राद्ध पक्ष आत्माओं की शांति के लिए अन्त वस्त्र, धन देकर पितरों की आत्मा को शांति की प्रार्थना की जाती है।

श्राद्ध में 16 दिनों तक क्यों नहीं करते शुभ कार्य

धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। इस अवधि के16 दिन पितरों अर्थात श्राद्ध कर्म के लिए विशेष रूप से निर्धारित किये गए हैं। यही अवधि पितृ पक्ष के नाम से जानी जाती है। पितृ पक्ष में किये गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। श्राद्ध पक्ष का संबंध मृत्यु से होता है। इस मौके पर पितर मृत्यु लोक से धरती पर 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं। इस अवधि में पितर हमसे और हम पितरों के करीब आ जाते हैं इसलिए शुभ और मांगलिक कार्यों को त्यागकर पितरों के प्रति सम्मान और एकाग्रता रखते हैं।

श्राद्ध पक्ष में मिलता है शुभ संकेत

अपने घर के आसपास अगर आपको कौए की चोंच में फूल-पत्ती दिखाई दे जाए तो मनोरथ की सिद्धि होती है। अगर कौआ गाय की पीठ पर चोंच को रगड़ता हुआ दिखाई तो समझिए आपको उत्तम भोजन की प्राप्ति होगी। अगर कौआ अपनी चोंच में सूखा तिनका लाते दिखे तो धन लाभ होता है। कौआ अनाज के ढेर पर बैठा मिले, तो धन लाभ होता है। अगर सूअर की पीठ पर कौआ बैठा दिखाई दें, तो अपार धन की प्राप्ति होती है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close