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भगवान को प्रेम से ही पा सकते है: आचार्य

Hisar Today

हिसार। गुज्जर अहीर कल्याण सभा के तत्वावधान में गुज्जर अहीर धर्मशाला में राधा अष्टमी पर्व के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए व्यास पीठ पर आचार्य श्री तरूण कृष्ण शाण्डिल्य (वृंदावन वाले) ने कहा कि पत्थर भगवान नहीं हो सकता, इंसान भगवान नहीं हो सकता व मूर्ति भगवान नहीं हो सकती, लेकिन भक्त के प्रेम में भगवान पत्थर, इंसान व मूर्ति का रूप धारण करके आ सकते हैं। परमात्मा प्रेम के आधीन हैं। भगवान स्वयं कहते हैं प्रेम से बड़ा साधन कोई नहीं हो सकता।

भगवान की कृपा को पूजा से, दान से, धर्म से पाया जा सकता है, परंतु भगवान को प्रेम से ही पाया जा सकता है। इस अवसर पर प्रधान उदय सिंह घडगस, माटी कला बोर्ड के चेयरमैन कर्ण सिंह राणौलिया, ज्ञानदीप आश्रम से स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज, शेर सिंह, शीशपाल रावत, नरेश, जसवंत खटाणा, विनोद गर्ग, सुनील, चंदन, कृष्ण खटाणा (एमसी), रामफल, जयदयाल, मनजीत, मुकेश, कृष्णा, रितु, पूनम, सुशील, गीता, अनू, विमला, सुमन, निशा, सरोज, कविता, लक्ष्मी, अंजू, कंचन व मंजू सहित सैंकड़ों महिलाएं व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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