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पीपल में जल चढ़ाने से भी पितृ होते हैं प्रसन्न

श्राद्ध न हो पाए तो करें ऐसे ही आसान उपाय

Today News| रीलिजन

श्राद्ध मनाने का सही समय और विधि होती है।इसी के साथ पितरों को श्राद्ध देने के कुछ खास नियम भी होते हैं। हिंदु मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध मनाने का अर्थ है साल में एक बाद अपने पितरों को याद कर उन्हें भरपेट भोजन कराना और उनकी आत्माओं को खुश करना। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितरों को तृप्ति मिलती है जिससे वो खुश होते हैं, लेकिन कुछ लोगों को तिथि और पूजा का ज्ञान नहीं होता है। जिससे वो श्राद्ध नहीं कर पाते हैं। ऐसे में पितृदोष के कारण कई तरह की समस्याएं उनके जीवन में बनी रहती हैं। इसलिए पुराणों के अनुसार पितृओं को प्रसन्न करने के लिए कुछ खास उपाय भी किए जा सकते हैं।

श्राद्ध न हो सके तो ये उपाय करें

  • सुबह नहाकर तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें गाय का कच्चा दूध, जौ, तिल और चावल डालें। फिर दक्षिण दिशा की और मुंह कर के उस जल को पीपल में चढ़ाएं। इससे पितृदेव खुश हो जाएंगे

  • गायों को हरा चारा खिलाएं और गौशाला में जाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह रखकर पानी में कच्चा दूध मिलाकर पितृओं को अर्पण करें। इससे पितृ शांति होती है।

  •  पितृपक्ष में रोज ब्राह्मण को भोजन करवाएं या किसी मंदिर के पूजारी को रोज भोजन साम्रगी (आटा, घी, फल, गुड़ और सब्जी) दान करें। इसके साथ श्रीफल पर अपनी श्रद्धा अनुसार दक्षिणा भी दें।

  •  सर्वपितृ अमावस्या पर चावल के आटे से पिंड बनाकर उन पर जौ और तिल लगाएं। फिर सफेद कपड़ें में रखें और पलाश के पत्तों पर रखकर पवित्र नदी में बहा दें।

  •  घर में जहां पीने का पानी रखा जाता है वहां सुबह-शाम घी का दीपक लगाने से पितृदेव खुश होते हैं।

  •  गाय का गोबर सुखाकर उस कंडे पर घी और गुग्गल की धूप देने से भी पितृदेव प्रसन्न हो जाते हैं।

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